{"_id":"69498da6b3262b54b10ca4b2","slug":"bhojpuri-needs-structure-and-global-recognition-azamgarh-news-c-258-1-svns1001-142656-2025-12-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोजपुरी को संरचना और वैश्विक मान्यता की जरूरत : डॉ. वर्षा रानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोजपुरी को संरचना और वैश्विक मान्यता की जरूरत : डॉ. वर्षा रानी
विज्ञापन
20 अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी संगम में कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार। श्रोत-आयोजक
- फोटो : भिनगा में आयोजित बैठक में मौजूद संगठन के पदाधिकारी।
आजमगढ़। भोजपुरी भाषा, साहित्य और लोक संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से आयोजित अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी संगम का भव्य आयोजन सोमवार को हरिऔध कला केंद्र में हुआ। उद्घाटन सत्र में मॉरीशस से आईं भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन की चेयरपर्सन डॉ. वर्षा रानी विशेश्वर ‘दुल्चा’ ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान होती है।
उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज लगभग पांच पीढ़ी पहले मॉरीशस गए थे, लेकिन आज भी वहां भारतीय, विशेषकर भोजपुरी संस्कृति जीवंत रूप में संरक्षित है। डॉ. वर्षा रानी ने भोजपुरी भाषा को संरचनात्मक मजबूती देने और वैश्विक मान्यता दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने जानकारी दी कि मॉरीशस में स्कूलों के पाठ्यक्रम में भोजपुरी को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी चल रही है, जो भोजपुरी भाषा के इतिहास में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब तक नई पीढ़ी भोजपुरी से नहीं जुड़ेगी, तब तक भाषा का समुचित विकास संभव नहीं है।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि नेपाल के मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त ने कहा कि आजमगढ़ ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है और इसका संबंध भगवान श्रीराम से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी हमारी लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
नेपाल में अधिकांश लोग भोजपुरी भाषा को समझते हैं, भले ही वे उसे बोल न पाते हों। भाषा के माध्यम से भारत और नेपाल के संबंध अत्यंत प्रगाढ़ और आत्मीय हैं। लीबिया के पूर्व प्रोफेसर अनिल के प्रसाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी की पहचान पर अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि एवं मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भोजपुरी हमारी पहचान है।
महापौर गोरखपुर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय और सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्रो. जगदंबा दुबे, प्रकाश प्रियांशु, भोजपुरी साहित्यकार राम बहादुर राय, प्रो. गीता सिंह सहित अन्य विद्वानों ने भोजपुरी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम संयोजक डॉ. अरविंद चित्रांश ने अतिथियों का स्वागत किया तथा अध्यक्षता डॉ. निर्मल श्रीवास्तव ने की। संचालन डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी और प्रिया तिवारी ने किया।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज लगभग पांच पीढ़ी पहले मॉरीशस गए थे, लेकिन आज भी वहां भारतीय, विशेषकर भोजपुरी संस्कृति जीवंत रूप में संरक्षित है। डॉ. वर्षा रानी ने भोजपुरी भाषा को संरचनात्मक मजबूती देने और वैश्विक मान्यता दिलाने की आवश्यकता पर बल दिया।
विज्ञापन
उन्होंने जानकारी दी कि मॉरीशस में स्कूलों के पाठ्यक्रम में भोजपुरी को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी चल रही है, जो भोजपुरी भाषा के इतिहास में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जब तक नई पीढ़ी भोजपुरी से नहीं जुड़ेगी, तब तक भाषा का समुचित विकास संभव नहीं है।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि नेपाल के मधेशी आयोग के प्रथम प्रमुख आयुक्त डॉ. विजय कुमार दत्त ने कहा कि आजमगढ़ ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है और इसका संबंध भगवान श्रीराम से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भोजपुरी हमारी लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
नेपाल में अधिकांश लोग भोजपुरी भाषा को समझते हैं, भले ही वे उसे बोल न पाते हों। भाषा के माध्यम से भारत और नेपाल के संबंध अत्यंत प्रगाढ़ और आत्मीय हैं। लीबिया के पूर्व प्रोफेसर अनिल के प्रसाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी की पहचान पर अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि एवं मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि भोजपुरी हमारी पहचान है।
महापौर गोरखपुर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, भारतीय जनता पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय और सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्रो. जगदंबा दुबे, प्रकाश प्रियांशु, भोजपुरी साहित्यकार राम बहादुर राय, प्रो. गीता सिंह सहित अन्य विद्वानों ने भोजपुरी के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम संयोजक डॉ. अरविंद चित्रांश ने अतिथियों का स्वागत किया तथा अध्यक्षता डॉ. निर्मल श्रीवास्तव ने की। संचालन डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी और प्रिया तिवारी ने किया।