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Azamgarh News: शहर के नालों पर स्लैब नहीं, हादसों को दे रहे दावत
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हाइदिल चौराहा पर खुला नाला। संवाद
शहर में जलनिकासी के लिए बनाए गए नालों पर कई स्थानों पर स्लैब नहीं हैं। सड़क किनारे खुले नाले हादसों को दावत दे रहे हैं। नालों के किनारे दुकान और मकान होने के साथ ही यहां आने वाले लोग अपने वाहन भी खड़े कर देते हैं।
ऐसे में जरा सी चूक होने पर वाहन समेत नाले में गिरने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन की ओर से खुले नालों को ढकने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
शहर के सिधारी, हर्रा की चुंगी, सिविल लाइन, दलालघाट, रैदोपुर और अतलस तिराहा सहित कई स्थानों पर नाले खुले पड़े हैं। कहीं नाले सड़क से सटे हैं तो कहीं इनके किनारे पर्याप्त जगह भी नहीं है।
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दिन में तो लोग किसी तरह संभलकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने से खुले नाले दिखाई नहीं देते। ऐसे में हमेशा हादसे का डर बना रहता है।
इन स्थानों पर सड़क किनारे दुकानें होने के कारण ग्राहक और दुकानदार नाले के आसपास ही वाहन खड़े कर देते हैं। पैदल राहगीरों को भी सड़क और नाले के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। भीड़भाड़ के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है।
शहर के रहने वाले दीपक जायसवाल, अबुबकर, मो. एहतेशाम, जंगबहादुर यादव ने बताया कि खुले नालों के आसपास न तो पर्याप्त सुरक्षा घेरा है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
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कमिश्वरी रोड के नाले का भी यही हाल
सिधारी पुराने पुल से नगर पालिका अध्यक्ष के आवास पर जाने वाले मार्ग के किनारे नाला बना है। इस सड़क पर आयुक्त कार्यालय, कृषि, वन विभाग के कार्यालय हैं। नाला बनने के बाद से इस पर स्लैब नहीं लगा। हाल यह है कि नाले में झाड़ियां उग आई हैं। इससे पता नहीं चल पा रहा कि नाला कहां है।
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खोल कर छोड़ दिया गया नाला
हाइडिल चौराहे के आगे रेलवे ओवरब्रिज के पास सड़क किनारे लगभग तीन मीटर नाला खोलकर छोड़ दिया गया है। अभिषेक बरनवाल, अंगद यादव ने बताया कि लगभग चार महीने पहले सफाई करने के उद्देश्य से नगर पालिका के सफाई कर्मियों ने इसे खोला था। फोटो खींचकर कहीं भेजकर खुला छोड़कर चले गए। इसके बाद से अब तक उसे ढका नहीं गया। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। सभासद की शिकायत के बाद भी इसे ढका नहीं गया।
00 वर्जन
आयुक्त कार्यालय जाने वाले मार्ग के किनारे नाले पर पटिया लगाने के कार्य को कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा शहर में जहां अन्य जगहों पर खुले नाले हैं, उनको दिखवाता हूं। नालों पर पटिया रखवाकर उन्हें सुरक्षित किया जाएगा। -डॉ. बृजेश कुमार, अधिशासी अधिकारी।
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ऐसे में जरा सी चूक होने पर वाहन समेत नाले में गिरने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन की ओर से खुले नालों को ढकने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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शहर के सिधारी, हर्रा की चुंगी, सिविल लाइन, दलालघाट, रैदोपुर और अतलस तिराहा सहित कई स्थानों पर नाले खुले पड़े हैं। कहीं नाले सड़क से सटे हैं तो कहीं इनके किनारे पर्याप्त जगह भी नहीं है।
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दिन में तो लोग किसी तरह संभलकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने से खुले नाले दिखाई नहीं देते। ऐसे में हमेशा हादसे का डर बना रहता है।
इन स्थानों पर सड़क किनारे दुकानें होने के कारण ग्राहक और दुकानदार नाले के आसपास ही वाहन खड़े कर देते हैं। पैदल राहगीरों को भी सड़क और नाले के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। भीड़भाड़ के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है।
शहर के रहने वाले दीपक जायसवाल, अबुबकर, मो. एहतेशाम, जंगबहादुर यादव ने बताया कि खुले नालों के आसपास न तो पर्याप्त सुरक्षा घेरा है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं।
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कमिश्वरी रोड के नाले का भी यही हाल
सिधारी पुराने पुल से नगर पालिका अध्यक्ष के आवास पर जाने वाले मार्ग के किनारे नाला बना है। इस सड़क पर आयुक्त कार्यालय, कृषि, वन विभाग के कार्यालय हैं। नाला बनने के बाद से इस पर स्लैब नहीं लगा। हाल यह है कि नाले में झाड़ियां उग आई हैं। इससे पता नहीं चल पा रहा कि नाला कहां है।
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खोल कर छोड़ दिया गया नाला
हाइडिल चौराहे के आगे रेलवे ओवरब्रिज के पास सड़क किनारे लगभग तीन मीटर नाला खोलकर छोड़ दिया गया है। अभिषेक बरनवाल, अंगद यादव ने बताया कि लगभग चार महीने पहले सफाई करने के उद्देश्य से नगर पालिका के सफाई कर्मियों ने इसे खोला था। फोटो खींचकर कहीं भेजकर खुला छोड़कर चले गए। इसके बाद से अब तक उसे ढका नहीं गया। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है। सभासद की शिकायत के बाद भी इसे ढका नहीं गया।
00 वर्जन
आयुक्त कार्यालय जाने वाले मार्ग के किनारे नाले पर पटिया लगाने के कार्य को कार्ययोजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा शहर में जहां अन्य जगहों पर खुले नाले हैं, उनको दिखवाता हूं। नालों पर पटिया रखवाकर उन्हें सुरक्षित किया जाएगा। -डॉ. बृजेश कुमार, अधिशासी अधिकारी।

हाइदिल चौराहा पर खुला नाला। संवाद