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नंगे पांव कलश लेकर निकले भक्त
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 23 May 2015 12:26 AM IST
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मुहम्मदपुर भागलपुर से शुक्रवार को श्री रुद्र महायज्ञ के शुभारंभ पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान भक्त तपती धरती पर नंगे पांव कलश सिर पर लेकर चल रहे थे। बीच-बीच में लगाए जा रहे जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
कलश यात्रा यज्ञ स्थल से निकलकर भागलपुर, मुहम्मदपुर से लाटघाट होते हुए महुला पहुंची।
भीषण गर्मी और पैर में जलन के बाद भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा था। हर-हर महादेव, जय माता दी आदि देवी-देवताओं के लग रहे जयकारों के बीच भक्त महुला पहुंचे। जहां बाबा 1008 रामस्वरूप दास की देखरेख में कलशों में विधि-विधान से जल भरवाया गया। बाद में कलश यात्रा के यज्ञ स्थल पर पहुुंचने पर कलशों की स्थापना की गई।
उधर, यज्ञ सम्राट रामकृष्णदास महाराज ने कहा कि रावणत्व के विनाश से ही समाज में शांति संभव है। वह शुक्रवार को हरबंशपुर स्थित सर्वोदय पब्लिक स्कूल में 54वें हरिहरात्मक यज्ञ में कथा का अमृतपान करा रहे थे।
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कहा कि समाज में अत्याचार, भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। आज भी वह रावण है। केवल नाम बदला है। आज भूख का रावण गरीबी का और मेघनाद, सुर्पणखा एवं कुंभकरण रूपी लोग जगह-जगह फैले हैं। सारी दुनिया लंका जैसी होती जा रही है। व्याख्यान दिवाकर गोविंद शास्त्री ने कहा कि बिना सत्संग के विवेक जागृति नहीं होता। इस दौरान भारी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडल की परिक्रमा की।
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कलश यात्रा यज्ञ स्थल से निकलकर भागलपुर, मुहम्मदपुर से लाटघाट होते हुए महुला पहुंची।
भीषण गर्मी और पैर में जलन के बाद भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा था। हर-हर महादेव, जय माता दी आदि देवी-देवताओं के लग रहे जयकारों के बीच भक्त महुला पहुंचे। जहां बाबा 1008 रामस्वरूप दास की देखरेख में कलशों में विधि-विधान से जल भरवाया गया। बाद में कलश यात्रा के यज्ञ स्थल पर पहुुंचने पर कलशों की स्थापना की गई।
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उधर, यज्ञ सम्राट रामकृष्णदास महाराज ने कहा कि रावणत्व के विनाश से ही समाज में शांति संभव है। वह शुक्रवार को हरबंशपुर स्थित सर्वोदय पब्लिक स्कूल में 54वें हरिहरात्मक यज्ञ में कथा का अमृतपान करा रहे थे।
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कहा कि समाज में अत्याचार, भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है। आज भी वह रावण है। केवल नाम बदला है। आज भूख का रावण गरीबी का और मेघनाद, सुर्पणखा एवं कुंभकरण रूपी लोग जगह-जगह फैले हैं। सारी दुनिया लंका जैसी होती जा रही है। व्याख्यान दिवाकर गोविंद शास्त्री ने कहा कि बिना सत्संग के विवेक जागृति नहीं होता। इस दौरान भारी संख्या में उमड़े श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडल की परिक्रमा की।