Azamgarh Film Festival: पटकथा लेखक इम्तियाज हुसैन ने दिए सवालों के जवाब, बोले- आजमगढ़ आज भी हमारे दिल में बसा
आजमगढ़ के सिधारी स्थित शारदा टॉकीज में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सोमवार को जाने-माने सुविख्यात पटकथा लेखक इम्तियाज हुसैन पहुंचे। उन्होंने बॉलीवुड के अपने अनुभवों को भी लोगों से साझा किया और लोगों के मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए।
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आजमगढ़ के सिधारी स्थित शारदा टॉकीज में आयोजित चौथे अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सोमवार को जाने-माने सुविख्यात पटकथा लेखक इम्तियाज हुसैन लोगों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने लोगों के सवालों का जवाब दिए। उन्होंने कहा कि भले ही मैंने आजमगढ़ को छोड़ मुंबई को अपना कर्मक्षेत्र बना लिया। लेकिन, आज भी आजमगढ़ हमारे दिल में बसा हुआ है। यही कारण है कि आजमगढ़ फिल्म फेस्टिवल में जरूर आते हैं।
फूलपुर तहसील माहुल निवासी इम्तेयाज ने जनपद से दूर मायानगरी में अपनी दुनिया बसाई है। उनके पटकथा लेखन का लोहा हर कोई मानता है। उन्होंने परिंदा, इस रात की सुबह नहीं, वास्तव और दिल आशना है जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।
स्क्रिप्ट राइटिंग बेहतर विकल्प
सोमवार को जब वह जनपद के लोगों से रूबरू हुए तो वहां मौजूद लोग उनसे अपने सवालों के जवाब पाने को काफी उत्सुक नजर आए। उन्होंने एक-एक कर सभी के सवालों का जवाब दिए। बॉलीवुड के अपने अनुभवों को भी लोगों से साझा किया और लोगों के मन में उठ रहे सवालों के जवाब दिए।
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उन्होंने कहा कि जर्मनी में रहने के बावजूद उन्हें भारतीय फिल्मों से काफी प्रेम रहा, इसीलिए उन्होंने हिंदी सीखी। मराठी फिल्मों में काम करने के लिए मराठी लोक नृत्य लावडी भी सीखा। वहीं फ्रेंच अभिनेत्री मारियान बोर्गो ने अपनी फिल्मों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय फिल्मों के साथ ही उन्हें भारत की संस्कृति से बहुत प्रेम है।