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Azamgarh News: गेहूं की कटाई-मड़ाई से बढ़े अस्थमा के रोगी, रोज आ रहे 30 पीड़ित
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बलरामपुर। गेहूं की कटाई-मड़ाई सेहत पर बुरा असर डाल रही है। फसल की कटाई और मड़ाई के दौरान मशीन से निकलने वाले मिट्टी-धूल और भूसे के कणों ने अस्थमा के मरीजों की समस्या बढ़ा दी है। सांस के रोगों से संबंधित मरीज सांस फूलने की समस्या लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल के डॉक्टर अनिलेश यादव ने बताया कि अधिक समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसके अलावा फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से आग लगाने के कारण पैदा होने वाले कण भी हवा में मिल जाने से रोगियों को दिक्कत दे रहे हैं। अस्थमा रोगियों को श्वास नलिकाएं प्रभावित होती हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 के आसपास मरीज देने जा रहे हैं। इसमें 25 से 30 मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनमें इस तरह की शिकायत मिल रही है। उन्हें दवा देने के साथ ही जरूरी सलाह भी दी जा रही है।
सभी को बरतनी चाहिए सावधानी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिलेश यादव ने कहा कि अस्थमा का शिकार तंदुरुस्त व्यक्ति भी हो सकता है। धूल ज्यादा उड़ती है, इससे एलर्जी होने के साथ व्यक्ति अस्थमा का शिकार हो जाता है। भूसे के कण इतने बारीक होते हैं कि वह दिखाई नहीं देते हैं और सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिन्हें पहले ही श्वास रोग या एलर्जी की समस्या है। वह गेहूं की कटाई और मड़ाई के दौरान विशेष सावधानी बरतें। मास्क लगाएं, घर के अंदर रहे और पर्याप्त पानी पीयें। बिना चिकित्सीय परामर्श दवा नहीं लेना चाहिए।
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जिला अस्पताल के डॉक्टर अनिलेश यादव ने बताया कि अधिक समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। इसके अलावा फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से आग लगाने के कारण पैदा होने वाले कण भी हवा में मिल जाने से रोगियों को दिक्कत दे रहे हैं। अस्थमा रोगियों को श्वास नलिकाएं प्रभावित होती हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 300 के आसपास मरीज देने जा रहे हैं। इसमें 25 से 30 मरीज ऐसे आ रहे हैं जिनमें इस तरह की शिकायत मिल रही है। उन्हें दवा देने के साथ ही जरूरी सलाह भी दी जा रही है।
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सभी को बरतनी चाहिए सावधानी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिलेश यादव ने कहा कि अस्थमा का शिकार तंदुरुस्त व्यक्ति भी हो सकता है। धूल ज्यादा उड़ती है, इससे एलर्जी होने के साथ व्यक्ति अस्थमा का शिकार हो जाता है। भूसे के कण इतने बारीक होते हैं कि वह दिखाई नहीं देते हैं और सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जिन्हें पहले ही श्वास रोग या एलर्जी की समस्या है। वह गेहूं की कटाई और मड़ाई के दौरान विशेष सावधानी बरतें। मास्क लगाएं, घर के अंदर रहे और पर्याप्त पानी पीयें। बिना चिकित्सीय परामर्श दवा नहीं लेना चाहिए।
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