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Azamgarh News: सरकारी अस्पताल से रेफर मरीजों को निजी में पहुंचा रहे एंबुलेंस चालक
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आजमगढ़। अगर आपका कोई अपना गंभीर चोट लगने से घायल है और उसे लेकर आप सरकारी अस्पताल पहुंचे तो उसे वहां से रेफर कर दिया जाएगा। ऐसे में एंबुलेंस चालक आपको निजी अस्पताल पहुंचा देगा। कुछ ऐसा ही खेल जिले में चल रहा है। हालांकि अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि हमारी ओर से मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाता है अब मरीज किस अस्पताल में जा रहा है यह उसकी मर्जी।
जिले के सरकारी अस्पतालों के सामने चाहे वह जिला अस्पताल हो या फिर सीएचसी व पीएचसी हो। यहां पर निजी एंबुलेंस संचालकों का जमावड़ा लगा रहता है और उसके चालक इमरजेंसी का चक्कर काटते रहते हैं। जैसे ही कोई गंभीर मरीज एडमिट हुआ यह लोग तीमारदारों को अपने विश्वास में लेना शुरू कर देते हैं।
ईएमओ ने अगर मरीज को एडमिट कर दिया तो यह वार्ड तक उसका पीछा करते हैं। उसको समझाते हैं डॉक्टर सुबह तक आएंगे तब तक आपके मरीज की हालत और बिगड़ जाएगी। ऐसे में रेफर कराकर दूसरी जगह ले जाइए। पहले से ही घबराया हुआ तीमारदार उनके झांसे में आकर अपने मरीज को रेफर कराता है।
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इसके बाद शुरू होता है इनका खेल यह तीमारदार को तुरंत इलाज का हवाला देकर मरीज को निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। एक से दो किमी की दूरी पर ही स्थित अस्पतालों तक जाने के लिए इनके द्वारा तीमारदारों से 2000 से 2500 रुपये तक वसूले जाते हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो रात के समय यहां प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंचते हैं और इनमें से एक दो मरीज प्रतिदिन रेफर होते हैं।
तीमारदार से भाड़ा और निजी अस्पताल से कमीशन
आजमगढ़। सूत्रों की मानें तो अस्पतालों के गेट पर जितने भी निजी एंबुलेंस संचालक होते हैं इनका किसी न किसी अस्पताल से मिलीभगत रहती है। यह मरीज को अस्पताल से रेफर होने के बाद हायर सेंटर पहुंचाने की बजाए इन अस्पतालों में पहुंचाते हैं। जहां मरीज से मनमाना भाड़ा वसूलने के साथ ही निजी अस्पताल संचालक से कमीशन लेते हैं। इन सबके बीच तीमारदार की जेब ढीली होती है।
जिला अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है। वहीं सीएचसी व पीएचसी से ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल के लिए रेफर किए जाते हैं। कुछ बहुत ज्यादा गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भी रेफर किया जाता है। अब यह मरीज हायर सेंटर जा रहे हैं या फिर किसी नर्सिंग होम यह उनकी मर्जी है। इसमें हम कुछ नहीं कह सकते। - डाॅ. अब्दुल अजीज, प्रभारी सीएमओ।
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जिले के सरकारी अस्पतालों के सामने चाहे वह जिला अस्पताल हो या फिर सीएचसी व पीएचसी हो। यहां पर निजी एंबुलेंस संचालकों का जमावड़ा लगा रहता है और उसके चालक इमरजेंसी का चक्कर काटते रहते हैं। जैसे ही कोई गंभीर मरीज एडमिट हुआ यह लोग तीमारदारों को अपने विश्वास में लेना शुरू कर देते हैं।
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ईएमओ ने अगर मरीज को एडमिट कर दिया तो यह वार्ड तक उसका पीछा करते हैं। उसको समझाते हैं डॉक्टर सुबह तक आएंगे तब तक आपके मरीज की हालत और बिगड़ जाएगी। ऐसे में रेफर कराकर दूसरी जगह ले जाइए। पहले से ही घबराया हुआ तीमारदार उनके झांसे में आकर अपने मरीज को रेफर कराता है।
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इसके बाद शुरू होता है इनका खेल यह तीमारदार को तुरंत इलाज का हवाला देकर मरीज को निजी अस्पताल पहुंचा देते हैं। एक से दो किमी की दूरी पर ही स्थित अस्पतालों तक जाने के लिए इनके द्वारा तीमारदारों से 2000 से 2500 रुपये तक वसूले जाते हैं। जिला अस्पताल की बात करें तो रात के समय यहां प्रतिदिन 15 से 20 मरीज पहुंचते हैं और इनमें से एक दो मरीज प्रतिदिन रेफर होते हैं।
तीमारदार से भाड़ा और निजी अस्पताल से कमीशन
आजमगढ़। सूत्रों की मानें तो अस्पतालों के गेट पर जितने भी निजी एंबुलेंस संचालक होते हैं इनका किसी न किसी अस्पताल से मिलीभगत रहती है। यह मरीज को अस्पताल से रेफर होने के बाद हायर सेंटर पहुंचाने की बजाए इन अस्पतालों में पहुंचाते हैं। जहां मरीज से मनमाना भाड़ा वसूलने के साथ ही निजी अस्पताल संचालक से कमीशन लेते हैं। इन सबके बीच तीमारदार की जेब ढीली होती है।
जिला अस्पताल से रेफर होने वाले मरीजों को हायर सेंटर भेजा जाता है। वहीं सीएचसी व पीएचसी से ज्यादातर मरीज जिला अस्पताल के लिए रेफर किए जाते हैं। कुछ बहुत ज्यादा गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भी रेफर किया जाता है। अब यह मरीज हायर सेंटर जा रहे हैं या फिर किसी नर्सिंग होम यह उनकी मर्जी है। इसमें हम कुछ नहीं कह सकते। - डाॅ. अब्दुल अजीज, प्रभारी सीएमओ।