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रोक के बाद भी ढाबों की भट्ठियों में सुलग रहा कोयला
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 23 Jan 2017 12:09 AM IST
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भट्ठियों में सुलग रहा कोयला
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पर्यावरण संरक्षण के लिए होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में कोयले तथा केरोसिन वाले चूल्हों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के बाद भी जिले के अधिकतर होटलों, रेस्टोरेंटों और ढाबों पर भट्ठियों में कोयला सुलग रहा है। इससे निकले वाले धुएं से पर्यावरण प्रदूषित होता है और लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ता है। इसके गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों से कोयले और केरोसिन का इस्तेमाल न करने की अपील की है। जल्द ही टीम गठित कर जांच कराने की योजना बनाई गई है।
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर 30 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 ढाबे स्थित हैं। इन होटलों, रेस्टोरेंटों में रसोई गैस का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन तंदूरी रोटी पकाने के लिए भट्ठियां इस्तेमाल में लाई जाती हैं जिसमें कोयले सुलगाए जाते हैं। कई होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट तो ऐसे हैं जहां सिर्फ कोयले वाली भट्ठियों का ही इस्तेमाल किया जाता है। छोटे-छोटे चाय की दूकानों पर भी भट्ठियों में कोयले जलाए जाते हैं। केरोसिन की उपलब्धता कम होने और महंगा होने के कारण इसका इस्तेमाल यदाकदा ही दिखाई पड़ता है।
गांव देहात के इलाकों में चाय, पकौड़ी की अधिकतर दूकानों पर केरोसिन से जलने वाले स्टोव का इस्तेमाल होता है। कई दुकानों पर कोयले के चूल्हे मिलते हैं। कोयला और मिट्टी का तेल जलाने से निकला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित करता है। वायु प्रदूषण के चलते सांस रोगियों की संख्या बढ़ रही है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण विभाग ने सभी जिलों को कोयले और केरोसिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कहा है।
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जिला पंचायत के अपर मुख्य विकास अधिकारी एके सिंह ने बताया कि आदेश मिलने के बाद होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों से कोयले, केरोसिन का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है। जल्द ही एक टीम गठित कर इसकी जांच कराई जाएगी। अपील के बाद भी जो दूकानदार इसका प्रयोग करते हुए पाए गए। उनके विरुद्ध नोटिस और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
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शहर में छोटे-बड़े मिलाकर 30 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 ढाबे स्थित हैं। इन होटलों, रेस्टोरेंटों में रसोई गैस का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन तंदूरी रोटी पकाने के लिए भट्ठियां इस्तेमाल में लाई जाती हैं जिसमें कोयले सुलगाए जाते हैं। कई होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट तो ऐसे हैं जहां सिर्फ कोयले वाली भट्ठियों का ही इस्तेमाल किया जाता है। छोटे-छोटे चाय की दूकानों पर भी भट्ठियों में कोयले जलाए जाते हैं। केरोसिन की उपलब्धता कम होने और महंगा होने के कारण इसका इस्तेमाल यदाकदा ही दिखाई पड़ता है।
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गांव देहात के इलाकों में चाय, पकौड़ी की अधिकतर दूकानों पर केरोसिन से जलने वाले स्टोव का इस्तेमाल होता है। कई दुकानों पर कोयले के चूल्हे मिलते हैं। कोयला और मिट्टी का तेल जलाने से निकला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित करता है। वायु प्रदूषण के चलते सांस रोगियों की संख्या बढ़ रही है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण विभाग ने सभी जिलों को कोयले और केरोसिन के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कहा है।
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जिला पंचायत के अपर मुख्य विकास अधिकारी एके सिंह ने बताया कि आदेश मिलने के बाद होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों से कोयले, केरोसिन का इस्तेमाल न करने की अपील की गई है। जल्द ही एक टीम गठित कर इसकी जांच कराई जाएगी। अपील के बाद भी जो दूकानदार इसका प्रयोग करते हुए पाए गए। उनके विरुद्ध नोटिस और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।