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Azamgarh News: 17 साल तक कानूनी लड़ाई के बाद पैतृक जमीन पर मिला मालिकाना हक

Thu, 28 May 2026 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 28 May 2026 12:14 AM IST
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After a 17-year legal battle, he got ownership rights over his ancestral land.
मेंहनगर। 17 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार पीड़ित को अपनी पैतृक जमीन का मालिकाना हक मिल गया। मंगलवार को उपजिलाधिकारी भुपाल सिंह की न्यायालय में फैसला सुनाया गया। इस फैसले से पीड़ित भिखमपुर गांव निवासी जगजीवन राम की आंखों में आंसू छलक आए।
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पीड़ित जगजीवन राम ने बताया कि उसके पिता खुनखुन राम की मृत्यु वर्ष 1970 में हो गई थी। उस समय वह नाबालिग था। पिता की मौत के बाद उनकी मां उसे लेकर अपने मायके विषहम मिर्जापुर चली गई और दूसरी शादी कर लीं। काफी वर्षों बाद जब जगजीवन राम अपने ननिहाल से भिखमपुर गांव लौटे तो उन्हें पता चला कि उनके पिता की जमीन उनके सगे चाचा भीखूराम ने अपने नाम दर्ज करा ली है। इसके बाद जगजीवन राम ने वर्ष 2009 में वरासत दर्ज कराने के लिए तहसीलदार न्यायालय मेंहनगर में वाद दाखिल किया।
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तहसीलदार न्यायालय से निर्णय उनके पक्ष में आया, लेकिन विपक्षी भीखूराम ने मामले को आयुक्त आजमगढ़ न्यायालय में चुनौती दे दी। बाद में यह मामला उपजिलाधिकारी न्यायालय मेंहनगर को स्थानांतरित कर दिया गया। करीब 17 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद उपजिलाधिकारी भुपाल सिंह ने मंगलवार को जगजीवन राम को उनकी पैतृक संपत्ति का वैधानिक वारिस मानते हुए फैसला उनके पक्ष में सुनाया। निर्णय सुनते ही जगजीवन राम की आंखें डबडबा गईं।
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उन्होंने कहा कि वर्षों की लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला है, जिससे न्याय व्यवस्था के प्रति उनकी आस्था और मजबूत हुई है। मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व बार अध्यक्ष ने बताया कि मामला काफी पेचीदा था और विपक्षी जमीन पर कब्जा के साथ ही खतौनी में गलत तरीके से नाम अंकित करा लिया था। मामला काफी आगे बढ़ चुका था। इसके बावजूद उपजिलाधिकारी द्वारा दिया गया यह निर्णय ऐतिहासिक और न्यायपूर्ण है। लोगों में न्याय के प्रति विश्वास जगाने वाला है।
उच्च न्यायालय के निर्देशन में और सबूत सहित सभी कागजातों का परीक्षण कराने के बाद फैसला सुनाया गया है। यह पैतृक जमीन का मामला था। पिता की जमीन पर बेटे का अधिकार था। -भुपाल सिंह, एसडीएम।


शराब रखने के चार मामलों में छह दोषी करार, सभी पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना

आजमगढ़। एएसजे-3 अदालत ने अपमिश्रित शराब रखने के चार अलग-अलग मामलों में छह आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल में बिताई गई अवधि के कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सभी मामले बरदह, मुबारकपुर और रौनापार थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं।

पहले मामले में थाना बरदह पुलिस द्वारा वर्ष 2012 में दर्ज मुकदमे में आरोपी लसड़ा खुर्द (देवापुर) निवासी लालजी उर्फ ललई को दोषी पाया था। पुलिस ने उसके कब्जे से 25 लीटर अपमिश्रित शराब बरामद की थी। अदालत ने उसे जेल में बिताई गई अवधि के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दूसरे मामले में थाना मुबारकपुर क्षेत्र के पुरादिवान निवासी शमीम उर्फ झीनक को वर्ष 2018 में 40 लीटर अपमिश्रित शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था।
इस मुकदमे में अदालत ने उसे 16 दिन के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। इसी आरोपी शमीम उर्फ झीनक के खिलाफ वर्ष 2014 में दर्ज एक अन्य मुकदमे में 20 लीटर अपमिश्रित शराब बरामद हुई थी। इस मामले में न्यायालय ने उसे पांच माह 13 दिन के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, थाना रौनापार क्षेत्र में वर्ष 2016 में दर्ज मुकदमे में छपिया जोकरहा निवासी लालचंद यादव व विनोद और सहबदिया सुल्तानपुर निवासी श्रीबल पटेल को दोषी करार दिया गया।

पुलिस ने तीनों के कब्जे से 60 लीटर अपमिश्रित शराब बरामद की थी। अदालत ने सभी आरोपियों को जेल में बिताई गई अवधि के कारावास के साथ प्रत्येक पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अदालत में सभी मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से चार से छह गवाह प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर न्यायालय ने दोष सिद्ध माना।
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