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एडीए बोर्ड की बैठक रखा जा सकता है महायोजना का ड्राफ्ट
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आजमगढ़। जनपद की नई महायोजना का इंतजार लोग कई वर्षों से कर रहे हैं। डिजिटल महायोजना तैयार करने के लिए सर्वे में जुटी कोलकाता की स्टेलाइट कंपनी ने अपनी रिपोर्ट सीटीसीपी को सौंप दी है। सीटीसीपी से रिपोर्ट लेकर टाउन प्लानर महायोजना का ड्राफ्ट तैयार करने में जुटे हुए हैं। वहीं एडीए सचिव बैजनाथ अगस्त माह में एडीए बोर्ड की बैठक कराने की तैयारी में हैं। टाउन प्लानर द्वारा इस बैठक में महायोजना का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया जा सकता है।
जनपद की पुरानी महायोजना 2011 में ही पूरी हो चुकी है। लेकिन इसके बाद नई महायोजना लागू नहीं हो सकी। जिसके कारण लैंडयूज को लेकर पेंच फंसा हुआ है। जनपद में अवैध निर्माण हो रहे हैं और एडीए उनको रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। लैंडयूज परिवर्तन के बाद कृषि क्षेत्र के आवासीय होने की आस लगाए लोग आज भी एडीए का चक्कर काट रहे हैं। वहीं इस बीच महायोजना का प्रस्ताव कई बार तैयार हुआ लेकिन शासन ने उसे अस्वीकृत कर दिया। इस बीच अमृत योजना के तहत शासन ने कई शहरों की डिजिटल महायोजना तैयार करने का निर्णय लिया। इसके तहत सीटीसीपी द्वारा कोलकाता की एक कंपनी स्टेलाइट को जनपद की महायोजना तैयार करने के लिए सर्वे का कार्य सौंपा गया। इसी दौरान जनपद से भेजे गए एक प्रस्ताव के ड्राफ्ट को शासन से मंजूरी मिली। जिस पर दावे और आपत्तियां ली गई। उन आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया लेकिन मामला अब तक ठंडा ही रहा। लेकिन अब सर्वे में जुटी कोलकाता की कंपनी स्टेलाइट ने सीटीसीपी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट को मंगाकर टाउन प्लानर द्वारा महायोजना का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जिसे बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। अगर बोर्ड में इसे स्वीकृति मिल गई तो इसे शासन को भेजा जाएगा।
सर्वे कर रही स्टेलाइट कंपनी द्वारा अपनी रिपोर्ट सीटीसीपी को सौंप दी गई है। टाउन प्लानर से कहा गया है कि वह सीटीसीपी से रिपोर्ट मंगाकर पुरानी आपत्तियों की आख्या के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करें। ताकि इसे बोर्ड की बैठक में रखा जा सके। बोर्ड की बैठक के लिए तिथि के निर्धारण का प्रयास किया जा रहा है।
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बैजनाथ, एडीए सचिव
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जनपद की पुरानी महायोजना 2011 में ही पूरी हो चुकी है। लेकिन इसके बाद नई महायोजना लागू नहीं हो सकी। जिसके कारण लैंडयूज को लेकर पेंच फंसा हुआ है। जनपद में अवैध निर्माण हो रहे हैं और एडीए उनको रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। लैंडयूज परिवर्तन के बाद कृषि क्षेत्र के आवासीय होने की आस लगाए लोग आज भी एडीए का चक्कर काट रहे हैं। वहीं इस बीच महायोजना का प्रस्ताव कई बार तैयार हुआ लेकिन शासन ने उसे अस्वीकृत कर दिया। इस बीच अमृत योजना के तहत शासन ने कई शहरों की डिजिटल महायोजना तैयार करने का निर्णय लिया। इसके तहत सीटीसीपी द्वारा कोलकाता की एक कंपनी स्टेलाइट को जनपद की महायोजना तैयार करने के लिए सर्वे का कार्य सौंपा गया। इसी दौरान जनपद से भेजे गए एक प्रस्ताव के ड्राफ्ट को शासन से मंजूरी मिली। जिस पर दावे और आपत्तियां ली गई। उन आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया लेकिन मामला अब तक ठंडा ही रहा। लेकिन अब सर्वे में जुटी कोलकाता की कंपनी स्टेलाइट ने सीटीसीपी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट को मंगाकर टाउन प्लानर द्वारा महायोजना का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जिसे बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। अगर बोर्ड में इसे स्वीकृति मिल गई तो इसे शासन को भेजा जाएगा।
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सर्वे कर रही स्टेलाइट कंपनी द्वारा अपनी रिपोर्ट सीटीसीपी को सौंप दी गई है। टाउन प्लानर से कहा गया है कि वह सीटीसीपी से रिपोर्ट मंगाकर पुरानी आपत्तियों की आख्या के आधार पर ड्राफ्ट तैयार करें। ताकि इसे बोर्ड की बैठक में रखा जा सके। बोर्ड की बैठक के लिए तिथि के निर्धारण का प्रयास किया जा रहा है।
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बैजनाथ, एडीए सचिव