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सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है वीरा के पूरा का मोहर्रम
Azamgarh
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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लाटघाट। सगड़ी तहसील के ग्रामसभा मिश्रपुर के वीरा का पूरा (चक सह दौलत) गांव के लोग अपने कर्म से सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं। यहां के हिंदू-मुसलमान वर्षों से एक-दूसरे के पर्वों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते आ रहे हैं। इसक्रम में शुक्रवार को आठवीं मोहर्रम पर दोनों समुदाय के लोगों द्वारा तैयार ताजिए को इमाम चौक पर बैठाया गया।
सगड़ी तहसील का मिश्रपुर ग्राम सभा का वीरा का पूरा (चक सह दौलत) एक हजार आबादी वाला गांव है। यहां के हिंदू-मुसलमानों की एकता की मिसाल है। यहां यादव, चौहान, कन्नौजिया, दलितों सहित मुसलमानों के पांच घर हैं। यहां के हिंदू-मुसलमान दीपावली, ईद, होली आदि पर्व एक साथ मिलजुलकर मनाते हैं। मुहर्रम में इमाम चौक पर बैठाए जाने वाले ताजिया का निर्माण गांव के लोग आपसी सहयोग से बनाने में जुटे थे। शुक्रवार को आठवीं मुहर्रम पर दोनों समुदाय के लोगों ने मिलकर अखाड़ा निकाला। बाद में ताजिए को इमाम चौक पर स्थापित किया। गांव के मोबिन अहमद, अजीम अहमद, जहीन अहमद, अर्जुन यादव, प्रताप यादव, लालचंद्र कन्नौजिया, दयानंद, छोटे लाल ,रामजनम, अजीम अशरफ, अनीस, मंजूर अब्बास, जमील ने कहा कि देश के आजाद होने के बाद हमारे पूर्वज यहीं आकर बस गए। तब से आज का दिन है दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के पर्वों को मिलजुलकर मनाते हैं। यह गांव की एक परंपरा बन गई है।
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सगड़ी तहसील का मिश्रपुर ग्राम सभा का वीरा का पूरा (चक सह दौलत) एक हजार आबादी वाला गांव है। यहां के हिंदू-मुसलमानों की एकता की मिसाल है। यहां यादव, चौहान, कन्नौजिया, दलितों सहित मुसलमानों के पांच घर हैं। यहां के हिंदू-मुसलमान दीपावली, ईद, होली आदि पर्व एक साथ मिलजुलकर मनाते हैं। मुहर्रम में इमाम चौक पर बैठाए जाने वाले ताजिया का निर्माण गांव के लोग आपसी सहयोग से बनाने में जुटे थे। शुक्रवार को आठवीं मुहर्रम पर दोनों समुदाय के लोगों ने मिलकर अखाड़ा निकाला। बाद में ताजिए को इमाम चौक पर स्थापित किया। गांव के मोबिन अहमद, अजीम अहमद, जहीन अहमद, अर्जुन यादव, प्रताप यादव, लालचंद्र कन्नौजिया, दयानंद, छोटे लाल ,रामजनम, अजीम अशरफ, अनीस, मंजूर अब्बास, जमील ने कहा कि देश के आजाद होने के बाद हमारे पूर्वज यहीं आकर बस गए। तब से आज का दिन है दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के पर्वों को मिलजुलकर मनाते हैं। यह गांव की एक परंपरा बन गई है।
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