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आरईएस के कर्मचारी ने नियुक्ति के लिए की पैरवी, भड़के सीडीओ
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:48 AM IST
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आजमगढ़। शासन न खाने और न खाने देने की सिद्धांत की कितनी भी पैरवी कर लें, निचले स्तर पर इसका प्रभाव अभी कम ही नजर आ रहा है। विकास भवन में स्वेच्छग्राहियों के प्रशिक्षण से पहले उनके चयन की प्रक्रिया चल रही है। ग्रामीण अभियंत्रण (आरईएस) विभाग के एक कर्मचारी ने चयन समिति के सामने ही चार-पांच स्वेच्छाग्राहियों को चयनित करने के लिए सिफारिश कर दी। मामले की जानकारी मुख्य विकास अधिकारी को हुई तो उन्होंने अधिशासी अभियंता को संबंधित कर्मचारी पर र्कारवाई के निर्देश दिए हैं।
विकास भवन इन दिनों स्वेच्छाग्रहियों के चयन कि प्रक्रिया चल रही है। चयन के बाद 100 से 110 स्वेच्छाग्रहियों का प्रशिक्षण करा उन्हें ग्राम पंचायतों में लोगों को खुले में शौचमुक्ति के प्रति मोटीवेट करने के लिए भेजा जाएगा। लिखित परीक्षा के बाद विभाग और यूनिसेफ के मंडलीय कंस्टलटैंट आदि की कमेटी उन्का साक्षात्कार ले रही है। इस दौरान ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में तैनात एक कर्मचारी ने कमेटी से चार-पांच स्वेच्छाग्रहियों के चयन के लिए सिफारिश कर दी। कमेटी के सदस्य कर्मचारी के कृत्य को देख हैरान हो गए। उन्होंने मामले से मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह विभाग के आधिशासी अभियंता को संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि ये सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी कर्मचारी इस तरह का कृत्य नहीं करें।
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विकास भवन इन दिनों स्वेच्छाग्रहियों के चयन कि प्रक्रिया चल रही है। चयन के बाद 100 से 110 स्वेच्छाग्रहियों का प्रशिक्षण करा उन्हें ग्राम पंचायतों में लोगों को खुले में शौचमुक्ति के प्रति मोटीवेट करने के लिए भेजा जाएगा। लिखित परीक्षा के बाद विभाग और यूनिसेफ के मंडलीय कंस्टलटैंट आदि की कमेटी उन्का साक्षात्कार ले रही है। इस दौरान ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में तैनात एक कर्मचारी ने कमेटी से चार-पांच स्वेच्छाग्रहियों के चयन के लिए सिफारिश कर दी। कमेटी के सदस्य कर्मचारी के कृत्य को देख हैरान हो गए। उन्होंने मामले से मुख्य विकास अधिकारी को अवगत कराया। मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक सिंह विभाग के आधिशासी अभियंता को संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी अधिकारियों को चेतावनी दी है कि ये सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी कर्मचारी इस तरह का कृत्य नहीं करें।
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