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शिक्षा क्षेत्र में पहले मुकाम पर हैं अल्लामा फराही: डा. इकबाल
Updated Sat, 24 Mar 2018 11:27 PM IST
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आजमगढ़। शिब्ली नेशनल महाविद्यालय के सभागार में द मुस्लिम एजुकेशन सोसाइटी के प्रथम सचिव मौलाना हमीदुद्दीन फ़राही के %इल्मी व फ़िक्री मीरास(शिक्षा के धरोहर की चिंता)% पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन शनिवार को किया गया। सेमीनार की शुरुआत जेयाद अहमद द्वारा की गई कुरआन की तिलावत से हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शरिया कतर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा.मोहम्मद इकबाल फरहात ने कहा कि अल्लामा हमीदुद्दीन शिक्षा के क्षेत्र में पहले मुकाम पर स्थापित है। उन्होंने जो अपने काम अधूरे छोड़े है उसे आजमगढ़ के लोगों को पूरा करने के लिए आगे कदम बढ़ाना होगा।
उन्होंने कहा कि अल्लामा फराही इतने विद्वान थे कि इनकी विद्वता के चर्चे 1970 में अरब में भी होने लगे। मेरे पिता ने भी उनकी लिखी किताब को पढ़कर उनकी विद्वता की तारीफ की। आप ने मुझे इस सेमीनार में शामिल कर मेरी इज्जत को बढ़ाया है मै इसके लिए शिब्ली के लोगों के प्रति शुक्रगुजार हूं। विशिष्ठ अतिथि इसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा.हसन यशु ने कहा कि सब कुछ खत्म हो सकता है लेकिन जिसके पास विद्वता की दौलत होती है उसकी शोहरत कभी खत्म नहीं हो सकती है। ऐसे ही विद्वान अल्लामा हमीदुद्दीन फराही थे। उन्होंने आजमगढ़ के लोगों से से कहा कि उनके द्वारा लिखी गई किताबों का प्रकाशन कराकर सभी को फायदा पहुंचाए। शिब्ली एकेडमी के डायरेक्टर प्रोफेसर इस्तेयाक अहमद जिल्ली ने कहा कि अल्लामा हमीदुद्दीन फराही ऐसे महान व्यक्तित्व के मालिक थे कि उनकी तारीफ में शब्द कम पड़ जाते है। वह उर्दू, अरबी, फारसी के एक महान विद्वान थे। उन्होंने कुरआन पर गहरा शोध किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उर्दू अकादमी दिल्ली के पूर्व वाइस चेयरमैन अल्ताफ अहमद आजमी ने कहा कि अल्लामा हमीदुद्दीन फराही ने अपने ज्ञान का विषय अल्लाह की किताब कुरआन को बनाया। फराही कुरआन के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ पौराणिक और आधुनिक ज्ञान के पुरोधा थे। उन्होंने यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू के बताए कई तरीकों को गलत साबित करते हुए कुरआन के जरिए उसका विकल्प भी दिया। हम सभी को उनके ज्ञान को फैलाने का काम करना चाहिए। अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य गयास असद खान ने आए हुए मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम का संचालन डा. अलाउद्दीन ने किया। इस मौके पर सेमीनार के संयोजक डा.मोहियुद्दीन आजाद फराही, सह संयोजक डा.नाजिश एहतेशाम, शकील अहमद आजमी, उर्दू विभागाध्यक्ष डा.शबाबुद्दी, वसीउद्दीन एडवोकेट, डा.जावेद अली, मौलाना ताहिर मदनी, डा.बीके सिंह, हरिमंदिर पांडेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि अल्लामा फराही इतने विद्वान थे कि इनकी विद्वता के चर्चे 1970 में अरब में भी होने लगे। मेरे पिता ने भी उनकी लिखी किताब को पढ़कर उनकी विद्वता की तारीफ की। आप ने मुझे इस सेमीनार में शामिल कर मेरी इज्जत को बढ़ाया है मै इसके लिए शिब्ली के लोगों के प्रति शुक्रगुजार हूं। विशिष्ठ अतिथि इसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा.हसन यशु ने कहा कि सब कुछ खत्म हो सकता है लेकिन जिसके पास विद्वता की दौलत होती है उसकी शोहरत कभी खत्म नहीं हो सकती है। ऐसे ही विद्वान अल्लामा हमीदुद्दीन फराही थे। उन्होंने आजमगढ़ के लोगों से से कहा कि उनके द्वारा लिखी गई किताबों का प्रकाशन कराकर सभी को फायदा पहुंचाए। शिब्ली एकेडमी के डायरेक्टर प्रोफेसर इस्तेयाक अहमद जिल्ली ने कहा कि अल्लामा हमीदुद्दीन फराही ऐसे महान व्यक्तित्व के मालिक थे कि उनकी तारीफ में शब्द कम पड़ जाते है। वह उर्दू, अरबी, फारसी के एक महान विद्वान थे। उन्होंने कुरआन पर गहरा शोध किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उर्दू अकादमी दिल्ली के पूर्व वाइस चेयरमैन अल्ताफ अहमद आजमी ने कहा कि अल्लामा हमीदुद्दीन फराही ने अपने ज्ञान का विषय अल्लाह की किताब कुरआन को बनाया। फराही कुरआन के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ पौराणिक और आधुनिक ज्ञान के पुरोधा थे। उन्होंने यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू के बताए कई तरीकों को गलत साबित करते हुए कुरआन के जरिए उसका विकल्प भी दिया। हम सभी को उनके ज्ञान को फैलाने का काम करना चाहिए। अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य गयास असद खान ने आए हुए मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। कार्यक्रम का संचालन डा. अलाउद्दीन ने किया। इस मौके पर सेमीनार के संयोजक डा.मोहियुद्दीन आजाद फराही, सह संयोजक डा.नाजिश एहतेशाम, शकील अहमद आजमी, उर्दू विभागाध्यक्ष डा.शबाबुद्दी, वसीउद्दीन एडवोकेट, डा.जावेद अली, मौलाना ताहिर मदनी, डा.बीके सिंह, हरिमंदिर पांडेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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