{"_id":"5a9ae0574f1c1b585f8b468f","slug":"81520099415-azamgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाघरा से सटे गांवों की स्थिति ठीक लेकिन तमसा बनी मुसीबत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाघरा से सटे गांवों की स्थिति ठीक लेकिन तमसा बनी मुसीबत
Updated Sat, 03 Mar 2018 11:36 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आजमगढ़। जनपद से होकर गुजरने वाली दो प्रमुख नदियां घाघरा और तमसा हैं। घाघरा में प्रतिवर्ष बाढ़ आने के कारण इससे सटे गांवों में भूजल की स्थिति ठीक है। लेकिन तमसा नदी के किनारे बसे गांवों ककी हालत खसज्ता है। नदी स्त्रत्त्के किनारे बसे पल्हनी और सठियांव विकास खंड डार्क जोन में पहुंच गए हैं। कई वर्षों से यह दोनों ब्लाक डार्क जोन में हैं लेकिन अभी तक इन्हें डार्क जोन से बाहर निकालने का कोई प्रयास नहीं किया गया है।
शासन-प्रशासन और आम जनमानस की उपेक्षा के कारण तमसा आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। अगर तमसा की यही हालत रही तो इसके विलुप्त होने में ज्यादा दिन नहीं हैं। अगर तमसा का अस्तित्व मिटता है जनपद के लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना होगा। भूगर्भ विभाग की मानें तो जिले के दो ब्लाक सठियांव और पल्हनी डार्क जोन में हैं। लेकिन इन दोनों ही ब्लाकों को निकट भविष्य में इससे बाहर निकलने की कोई योजना दिखाई नहीं दे रही है। क्योंकि एक तो सरकार ने इसके लिए कोई बजट नहीं दिया है। इतना ही नहीं सरकार का पूरा ध्यान बुंदेलखंड पर है। सरकार ने बजट के स्थान पर राज्य भूजल संरक्षण मिशन नाम से एक नई योजना शुरू की है। जिसके तहत सभी विभाग अपने-अपने मद से कार्ययोजना बनाकर इस पर कार्य करेंगे। प्रदेश सरकार की ओर से 25 ब्लाकों का चयन किया गया है। जिसमें इस वर्ष सभी ब्लाक बुंदेलखंड के हैं। अगले वर्ष के लिए भी जो योजना बनी है उसमें बुंदेलखंड के शेष बचे ब्लाकों में कार्य होना है। जिले में दिसंबर और मई माह में भूगर्भ जल के स्थिति की जांच होती है। मई माह में ही गिरे भूगर्भ जलस्तर के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
00000000000
सरकार का पूरा फोकस बुंदेलखंड पर है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के जिल 22 ब्लाकों का चयन भूजल संरक्षण मिशन के तहत किया गया है सभी बुंदेलखंड के हैं। अगले वर्ष बुंदेलखंड के शेष बचे ब्लाकों में इस योजना के तहत कार्य होगा। सरकार की ओर से इस मद में कोई बजट नहीं दिया गया है। बल्कि सभी विभाग अपनी-अपनी कार्ययोजना बनाकर इस पर कार्य करेंगे।
विज्ञापन
अनुपम कुमार, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ विभाग।
विज्ञापन
शासन-प्रशासन और आम जनमानस की उपेक्षा के कारण तमसा आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। अगर तमसा की यही हालत रही तो इसके विलुप्त होने में ज्यादा दिन नहीं हैं। अगर तमसा का अस्तित्व मिटता है जनपद के लोगों को पानी के लिए संघर्ष करना होगा। भूगर्भ विभाग की मानें तो जिले के दो ब्लाक सठियांव और पल्हनी डार्क जोन में हैं। लेकिन इन दोनों ही ब्लाकों को निकट भविष्य में इससे बाहर निकलने की कोई योजना दिखाई नहीं दे रही है। क्योंकि एक तो सरकार ने इसके लिए कोई बजट नहीं दिया है। इतना ही नहीं सरकार का पूरा ध्यान बुंदेलखंड पर है। सरकार ने बजट के स्थान पर राज्य भूजल संरक्षण मिशन नाम से एक नई योजना शुरू की है। जिसके तहत सभी विभाग अपने-अपने मद से कार्ययोजना बनाकर इस पर कार्य करेंगे। प्रदेश सरकार की ओर से 25 ब्लाकों का चयन किया गया है। जिसमें इस वर्ष सभी ब्लाक बुंदेलखंड के हैं। अगले वर्ष के लिए भी जो योजना बनी है उसमें बुंदेलखंड के शेष बचे ब्लाकों में कार्य होना है। जिले में दिसंबर और मई माह में भूगर्भ जल के स्थिति की जांच होती है। मई माह में ही गिरे भूगर्भ जलस्तर के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
विज्ञापन
00000000000
सरकार का पूरा फोकस बुंदेलखंड पर है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के जिल 22 ब्लाकों का चयन भूजल संरक्षण मिशन के तहत किया गया है सभी बुंदेलखंड के हैं। अगले वर्ष बुंदेलखंड के शेष बचे ब्लाकों में इस योजना के तहत कार्य होगा। सरकार की ओर से इस मद में कोई बजट नहीं दिया गया है। बल्कि सभी विभाग अपनी-अपनी कार्ययोजना बनाकर इस पर कार्य करेंगे।
विज्ञापन
अनुपम कुमार, अधिशासी अभियंता, भूगर्भ विभाग।