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दो अधिशासी अधिकारियों की लड़ाई में लटके पालिका के कार्य
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़। लोगों को बेहतर सुविधा देने वाली नगरपालिका आज दो पाटों के बीच पिस रही है। दो अधिशासी अधिकारियों की लड़ाई में नगरपालिका के सारे कार्य बाधित पड़ेे हैं। न तो कराए गए कार्य का भुगतान हो रहा है और न ही किसी नए कार्य का टेंडर हो रहा है। दोनों की लड़ाई के बीच शहरवासी विकास को तरस रहे हैं।
एक महीने पहले तक नगरपालिका में सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। अधिशासी अधिकारी के रूप में दिनेश चंद्र विश्वकर्मा नगरपालिका का कार्य देख रहे थे। तभी शासन ने उनका स्थानांतरण कर दिया और उनके स्थान पर रामपाल की तैनाती कर दी। स्थानांतरण होने के बाद दिनेश चंद्र विश्वकर्मा शासन के इस निर्णय पर स्टे लेने के लिए हाईकोर्ट चले गए। इस बीच 17 जून को आकर नए अधिशासी अधिकारी के रूप में रामपाल ने नगरपालिका का चार्ज ले लिया। 19 जून को दिनेश चंद्र विश्वकर्मा हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गए। इसके बाद दोनों के बीच कुर्सी की जंग शुरू हो गई। चार्ज लेने के बाद रामपाल नगरपालिका में नहीं बैठे। लेकिन स्टे लेकर आए दिनेश चंद्र विश्वकर्मा लगातार नगरपालिका में बैठकर कार्य कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में रामपाल शासन स्तर से अपना जुगाड़ लगाने में जुटे हुए हैं। वहीं ट्रेजरी में हस्ताक्षर न होने के कारण ठेकेदारों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। संबंधित बिल भुगतान के लिए प्रतिदिन कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को एक ठेकेदार अधिशासी अधिकारी कार्यालय में पहुंचा। अधिशासी अधिकारी की कुर्सी पर दिनेश चंद्र विश्वकर्मा बिराजमान थे। उसने अधिशासी अधिकारी से कहा कि सर, मेरा साठ हजार रुपये की बिल पेंडिंग हैं भुगतान करा दीजिए, बच्चों की फीस जमा करनी है। लेकिन खुद को असहाय महसूस कर रहे दिनेश चंद्र विश्वकर्मा ने उसे किसी तरह से उसे वापस किया।
दिनेश चंद्र के स्थानांतरण होने के बाद मैंने उन्हें रीलीव कर दिया। नए ईओ ने चार्ज भी ले लिया। लेकिन ये कोर्ट से स्टे लेकर आ गए। अब शासन से जो फैसला होगा उस पर अमल किया जाएगा।
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इंदिरा देवी जायसवाल, पालिकाध्यक्ष
स्थानांतरित ईओ की ओर से से स्टे लाने की जानकारी मिली है। मामले में लोकल बाडी डायरेक्टर से बात की गई है। गुरुवार तक मामले की निस्तारण कर दिया जाएगा।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी
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एक महीने पहले तक नगरपालिका में सबकुछ ठीकठाक चल रहा था। अधिशासी अधिकारी के रूप में दिनेश चंद्र विश्वकर्मा नगरपालिका का कार्य देख रहे थे। तभी शासन ने उनका स्थानांतरण कर दिया और उनके स्थान पर रामपाल की तैनाती कर दी। स्थानांतरण होने के बाद दिनेश चंद्र विश्वकर्मा शासन के इस निर्णय पर स्टे लेने के लिए हाईकोर्ट चले गए। इस बीच 17 जून को आकर नए अधिशासी अधिकारी के रूप में रामपाल ने नगरपालिका का चार्ज ले लिया। 19 जून को दिनेश चंद्र विश्वकर्मा हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गए। इसके बाद दोनों के बीच कुर्सी की जंग शुरू हो गई। चार्ज लेने के बाद रामपाल नगरपालिका में नहीं बैठे। लेकिन स्टे लेकर आए दिनेश चंद्र विश्वकर्मा लगातार नगरपालिका में बैठकर कार्य कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो वर्तमान में रामपाल शासन स्तर से अपना जुगाड़ लगाने में जुटे हुए हैं। वहीं ट्रेजरी में हस्ताक्षर न होने के कारण ठेकेदारों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। संबंधित बिल भुगतान के लिए प्रतिदिन कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को एक ठेकेदार अधिशासी अधिकारी कार्यालय में पहुंचा। अधिशासी अधिकारी की कुर्सी पर दिनेश चंद्र विश्वकर्मा बिराजमान थे। उसने अधिशासी अधिकारी से कहा कि सर, मेरा साठ हजार रुपये की बिल पेंडिंग हैं भुगतान करा दीजिए, बच्चों की फीस जमा करनी है। लेकिन खुद को असहाय महसूस कर रहे दिनेश चंद्र विश्वकर्मा ने उसे किसी तरह से उसे वापस किया।
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दिनेश चंद्र के स्थानांतरण होने के बाद मैंने उन्हें रीलीव कर दिया। नए ईओ ने चार्ज भी ले लिया। लेकिन ये कोर्ट से स्टे लेकर आ गए। अब शासन से जो फैसला होगा उस पर अमल किया जाएगा।
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इंदिरा देवी जायसवाल, पालिकाध्यक्ष
स्थानांतरित ईओ की ओर से से स्टे लाने की जानकारी मिली है। मामले में लोकल बाडी डायरेक्टर से बात की गई है। गुरुवार तक मामले की निस्तारण कर दिया जाएगा।
चंद्रभूषण सिंह, जिलाधिकारी