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सुन्नत छोड़ने वालों के फर्ज पर नहीं टिकते कदम
Updated Fri, 16 Nov 2018 11:03 PM IST
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सरायमीर। मदरसा बैतूल उलूम के 79वें वार्षिक दीनी जलसे का समापन शुक्रवार को हुआ। जलसे की शुरुआत मौलाना शब्बीर अहमद की तिलावते कुरान एवं नाते पाक से हुआ। कार्यक्रम का समापन कारी अबुल हसन की दुआ से हुआ। मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि अल्लाह ने हमें ईमान एवं अकल की दौलत दी है। हम इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। जो व्यक्ति सुन्नतों को छोड़ता है, उसका फर्ज पर भी कदम नहीं टिकता है। मौलाना अबू तालिब रहमानी ने कहा कि मुसलमान देश की लड़ाई लड़ता है। वह देशभक्त है, देशद्रोही नहीं। सरकार ने मुसलमानों को रिजर्वेशन नहीं दिया, फिर भी हमने अशफाक उल्ला खां जैसा शहीद दिया। मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि मदरसा अल्लाह की पहचान कराने का केंद्र है। मो. याकूब ने कहा कि ईश्वर द्वारा दिए गए पुरस्कारों में से एक पुरस्कार औलाद भी है। स्वयं भी और अपनी औलादों को भी कुरान सीखना-सिखाना चाहिए। इनाम अहमद, सय्यद मो. साकिब, मौलाना हारिस, अब्दुर्रहीम ने भी विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हजरत मौलाना मुफ्ती अहमदुल्लाह और संचालन मौलाना महबूब आलम ने किया। जलसे में ओलमा ए कराम, मुम्बई, हैदराबाद, बंगलौर, दिल्ली, आसाम, कोलकाता, सुल्तानपुर, अफजलगढ़, बिजनौर, नगीना, कांठ, मुरादाबाद, टांडा, रामपुर, लखनऊ, आगरा, फ़िरोजाबाद, बाराबंकी, फैजाबाद, गोरखपुर, बिसाती, मऊ, बलिया, सीवान, चंपारण आदि से हजारों लोग सम्मिलित हुए।
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