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दो ग्रामीण अदालतों के लिए नहीं मिल सकी भूमि

Wed, 15 Nov 2017 11:46 PM IST
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:46 PM IST
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दो ग्रामीण अदालतों के लिए नहीं मिल सकी भूमि
आजमगढ़। न्यायालयों के बढ़ते बोझ को कम करने और आम जन मानस को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने ग्रामीण अदालतों की स्थापना करने का निर्णय लिया। जिसके तहत जनपद में भी चार स्थानों पर न्यायालय की स्थापना होनी है। लेकिन अभी तक सिर्फ दो स्थानों पर ही न्यायालय के लिए मनमाफिक जमीन उपलब्ध हो सकी है। अभी दो जगहों के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
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सरकार ने पूरे देश में पांच हजार ग्रामीण अदालतों की स्थापना करने का निर्णय लिया गया। इस क्रम में आजमगढ़ जनपद में चार ग्रामीण अदालतों की स्थापना के लिए एक वर्ष पूर्व जिला प्रशासन को जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश जनपद न्यायालय की ओर से मिला। एक ग्रामीण न्यायालय की स्थापना बूढ़नपुर तहसील के रायपुर गांव, दूसरी लालगंज तहसील के मेहरोकला गांव, तीसरी फूलपुर तहसील के बरौली और चौथी मेंहनगर के गौरा गांव में स्थापित होनी है। जिला प्रशासन की ओर से इन गांवों में न्यायालय की स्थापना के लिए जमीन के अभिलेख उपलब्ध कराए गए। लेकिन अब जिला प्रशासन की ओर से सिर्फ दो स्थानों बूढ़नपुर के रायपुर और लालगंज के मेहरोकला गांव की जमीन को न्यायालय की स्थापना के लिए उपयुक्त बताया गया है। बाकी फूलपुर तहसील के बरौली और मेंहनगर तहसील के गौरा गांव की जमीन को जनपद न्यायालय की ओर से नकार दिया गया है। जिला प्रशासन अब इन गांवों में दूसरी जमीन की तलाश में जुटा हुआ है।
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प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई भूमि
बूढ़नपुर तहसील के रायपुर गांव में ग्रामीण न्यायालय की स्थापना के लिए प्रशासन की ओर से 440 नंबर गाटे से .405 हेक्टेयर और लालगंज तहसील के मेंहरोकला गांव के गाटा 120 से .945 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। जिसे न्यायालय की ओर से मंजूरी मिल गई है। जबकि फूलपुर तहसील के बरौली गांव के 170 गाटे से .750 हेक्टेयर में रास्ता न होने और मेंहनगर तहसील के गौरा गांव के 623 नंबर गाटे से .932 एकड़ में त्रिभुजाकार और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण इसे न्यायालय की ओर से अनुपयुक्त बताया गया है।
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