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घाघरा में प्रतिदिन डिस्चार्ज हो रहा 7 लाख 11 हजार क्यूसेक पानी

Tue, 11 Oct 2022 12:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 11 Oct 2022 12:24 AM IST
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7 lakh 11 thousand cusec water is being discharged daily in Ghaghra
लाटघाट। घाघरा नदी में पानी छोड़े जाने से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गिरजा बैराज से 470800, शारदा बैराज से 160996, सरयू से 79448 क्यूसेक पानी छोड़ने के कारण जलस्तर में तेजी से बढ़ाव हो रहा।
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नदी खतरा बिंदु के ऊपर बह रही घाघरा नदी में प्रतिदिन विभिन्न बैराज से 711244 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बदरहुंआ गेज पर नदी खतरा बिंदु से 65 सेमी तो डिघिया पर 117 सेमी ऊपर बह रही है। अगर नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो तटवर्ती क्षेत्रों की स्थिति फिर खराब हो जाएगी।
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महुला गढ़वल बांध और घाघरा नदी के बीच में करीब 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में 104 गांव की सवा लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित होती है। बाढ़ से निपटने के लिए दस बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। दाम महुला, गांगेपुर, हाजीपुर, जमुवारी, इस्माइलपुर, हैदराबाद, कुड़ही, शिवपुर, सहदेवगंज, उल्टहवा में बाढ़ चौकियां हैं।
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सोमवार को साढ़े 11 बजे दाम महुला बाढ़ चौकी पर स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर संजय यादव उपस्थित रहे। बाकी कर्मचारी नदारद रहे। इसके अलावा गांगेपुर बाढ़ चौकी में राजस्व लेखपाल ओंकार सोनकर उपस्थित रहे।
बाढ़ चौकी हाजीपुर में पशुधन अधिकारी डॉक्टर रामराज, डॉक्टर विनोद कुमार उपस्थित रहे। बाढ़ चौकियों की हालत काफी खराब है। अधिकतर बाढ़ चौकियों से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नदारद रहे। लेकिन कर्मचारियों की बाढ़ ड्यूटी लग जाती है। यही हाल राजस्व व विकास विभाग का है। इस संबंध में तहसीलदार शक्ति प्रताप सिंह ने कहा कि सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं। सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है।

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बाढ़ प्रभावित इलाकों में नहीं हुआ दवा का छिड़काव
लाटघाट। देवारा क्षेत्र में कई बार नदी का पानी बढ़ा और घटा। इससे तटवर्ती गांवों के लोग प्रभावित भी हुए। हाल यह है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में न तो दवा का छिड़काव हुआ और न ही क्लोरिन की गोली का ही वितरण हो पाया है। गांव के करीब बाढ़ का पानी पहुंचने से पशुओं के लिए जहां चारे का संकट उत्पन्न हो गया है वहीं, जहरीले जंतु भी घरों में पहुंच रहे हैं। बीते 8 अक्टूबर से गांव में बिजली नहीं है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को किरोसन तेल की जरूरत है। गांव में वायरल फीवर बढ़ रहा है। नाव की सबसे अधिक जरूरत है।
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अधिकारी बोले- जरुरत की जगहों पर नाव लगा दी गई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। कहीं कोई समस्या नहीं है।
राजीव रतन सिंह, एसडीएम सगड़ी।
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