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Azamgarh News: 650 विद्यालयों का आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण ही नहीं
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आजमगढ़। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की योजना का जिले में पालन नहीं किया जा रहा है। जिले के 1523 निजी विद्यालयों में से 650 ने तो यूपी आरटीई पोर्टल पर पंजीकरण तक नहीं कराया है। इसमें शहर के कई नामी स्कूल भी शामिल हैं। विभाग अब ऐसे विद्यालयों पर कार्रवाई करने के मूड में हैं।
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में कुल संख्या के सापेक्ष 25 फीसदी सीटों पर गरीब वर्ग के बच्चों का प्रवेश होना है। पहले चरण में छह से 28 फरवरी के बीच हुए आवेदन में 650 बच्चों को लाटरी के जरिए चयनित किया गया। वहीं द्वितीय चरण में 14 मार्च से छह अप्रैल के बीच कुल 1002 बच्चों को ही स्कूलों का आवंटन किया गया। तीसरे चरण की प्रक्रिया जारी है। हालांकि इस मामले में विभागीय लापरवाही से बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां कम सीटें दिखाकर बच्चों को दाखिले से वंचित कर दिया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि इन स्कूलों में शासन से आरटीई के तहत दाखिला कराने वाले बच्चों की फीस से अधिक फीस स्कूलों की है। इससे इतर विभाग के बाबुओं की कारगुजारी से हजारों छात्रों को अपने इलाकों में स्कूल ही नहीं मिल पा रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक से आठ तक के बीच करीब 1523 निजी स्कूलों को बेसिक शिक्षा विभाग ने मान्यता प्रदान किया है, जबकि महज 873 स्कूल ही आरटीई के पोर्टल पर मौजूद हैं।
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आवेदन के समय की जा रही गड़बड़ी
आजमगढ़। आरटीई के तहत दाखिला लेने के लिए आवेदन ऑनलाइन होता है। इस दौरान अभिभावकों द्वारा गलत पता डाल दिया जा रहा है। जिससे चयन होने के बाद भी उनका दाखिला विद्यालय में नहीं हो पा रहा है।
कई नामचीन विद्यालयों को नोटिस
आजमगढ़। आरटीई के तहत चयनित विद्यालयों द्वारा एडमिशन न लेने पर बीएसए द्वारा जिले के कई नामचीन विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही उन्हें सख्त आदेश दिया गया है कि वह हर हाल में बच्चों का दाखिला लें। यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब तक दर्जनों शिकायतें बीएसए के पास पहुंची चुकी हैं।
आरटीई योजना गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए लाई गई है। विद्यालयों के संचालकों को हर हाल में इस योजना के तहत चयनित बच्चों का दाखिला लेना होगा। यदि वह नहीं करते हैं और इसकी शिकायत अभिभावक हमारे पास करेगा तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अतुल कुमार सिंह, बीएसए आजमगढ़।
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आरटीई के तहत निजी स्कूलों में कुल संख्या के सापेक्ष 25 फीसदी सीटों पर गरीब वर्ग के बच्चों का प्रवेश होना है। पहले चरण में छह से 28 फरवरी के बीच हुए आवेदन में 650 बच्चों को लाटरी के जरिए चयनित किया गया। वहीं द्वितीय चरण में 14 मार्च से छह अप्रैल के बीच कुल 1002 बच्चों को ही स्कूलों का आवंटन किया गया। तीसरे चरण की प्रक्रिया जारी है। हालांकि इस मामले में विभागीय लापरवाही से बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल हैं, जहां कम सीटें दिखाकर बच्चों को दाखिले से वंचित कर दिया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि इन स्कूलों में शासन से आरटीई के तहत दाखिला कराने वाले बच्चों की फीस से अधिक फीस स्कूलों की है। इससे इतर विभाग के बाबुओं की कारगुजारी से हजारों छात्रों को अपने इलाकों में स्कूल ही नहीं मिल पा रहे हैं।
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विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक से आठ तक के बीच करीब 1523 निजी स्कूलों को बेसिक शिक्षा विभाग ने मान्यता प्रदान किया है, जबकि महज 873 स्कूल ही आरटीई के पोर्टल पर मौजूद हैं।
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आवेदन के समय की जा रही गड़बड़ी
आजमगढ़। आरटीई के तहत दाखिला लेने के लिए आवेदन ऑनलाइन होता है। इस दौरान अभिभावकों द्वारा गलत पता डाल दिया जा रहा है। जिससे चयन होने के बाद भी उनका दाखिला विद्यालय में नहीं हो पा रहा है।
कई नामचीन विद्यालयों को नोटिस
आजमगढ़। आरटीई के तहत चयनित विद्यालयों द्वारा एडमिशन न लेने पर बीएसए द्वारा जिले के कई नामचीन विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही उन्हें सख्त आदेश दिया गया है कि वह हर हाल में बच्चों का दाखिला लें। यदि ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब तक दर्जनों शिकायतें बीएसए के पास पहुंची चुकी हैं।
आरटीई योजना गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए लाई गई है। विद्यालयों के संचालकों को हर हाल में इस योजना के तहत चयनित बच्चों का दाखिला लेना होगा। यदि वह नहीं करते हैं और इसकी शिकायत अभिभावक हमारे पास करेगा तो संबंधित विद्यालयों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अतुल कुमार सिंह, बीएसए आजमगढ़।