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लयुग में काली और हनुमान ही महापूज्य देवता
Updated Thu, 24 May 2018 12:33 AM IST
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लालगंज। लहुवां कला गांव में देवी महायज्ञ के अवसर पर बुधवार को देवी कथा का प्रवचन करते हुए देवरहवा बाबा के परम शिष्य द्वारकाधीश मठ वाराणसी के महंथ राम अखंड दास ने कलयुग पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि कलयुग में काली और हनुमान जी महापूज्य एवं प्रिय देवता है। मां काली दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं। हनुमान जी शक्ति, सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं। हमारे पूर्वजों ने हमेशा संकटों से मुक्ति पाने के लिए देवी की आराधना की है। भगवान राम की शक्ति पूजा सर्वविदित है। वसुदेव जी ने संकटों से मुक्ति पाने के लिए हमेशा देवी की आराधना की। देवी की आराधना से ही उन्हें श्रीकृष्ण जैसा तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ था। कहा भी गया है कि देवि पूजि पद कमल तुम्हारे, सुर-नर मुनि सब होहिं सुखारे। यज्ञ का अर्थ समर्पण होता है। मानवता के कल्याण एवं विश्व शांति रकी कामना से ही यज्ञ का आयोजन किया गया है। धर्म कभी भी आपस में बैर करना नहीं सिखाता है। हम यज्ञ के माध्यम से लोगों में वसुधैव कुटुंबकम् के भाव को जागृत करते हैं। यज्ञ के आयोजनकर्ता राम अवतार सिंह और सहायक पद्मनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कथा वाचक मिथिलेश त्रिपाठी, यज्ञाचार्य अखिलेश भार्गव, राम सागर दास, राम कमल दास जी वेदांती, सरस्वती जी महराज, ओमप्रकाश सिंह, रतन सिंह आदि उपस्थित थे।
अखंड संकीर्तन में गूंज रहे जयकारे
अखंड संकीर्तन में गूंज रहे जयकारे
फूलपुर। पुरुषोत्तम मास में बाबा परमहंस मंडल सेवा समिति की ओर से बाबा की कुटी पर एक मास तक चल रहा अखंड संकीर्तन की गूंज से पूराी क्षेत्र का भक्तिमय हो गया है। सुबह-शाम प्रतिदिन विशेष आरती में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। आरती के बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ परिवार की सुख समृद्धि की कामना की जा रही है।ॉ
उन्होंने कहा कि कलयुग में काली और हनुमान जी महापूज्य एवं प्रिय देवता है। मां काली दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं। हनुमान जी शक्ति, सेवा और समर्पण के प्रतीक हैं। हमारे पूर्वजों ने हमेशा संकटों से मुक्ति पाने के लिए देवी की आराधना की है। भगवान राम की शक्ति पूजा सर्वविदित है। वसुदेव जी ने संकटों से मुक्ति पाने के लिए हमेशा देवी की आराधना की। देवी की आराधना से ही उन्हें श्रीकृष्ण जैसा तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ था। कहा भी गया है कि देवि पूजि पद कमल तुम्हारे, सुर-नर मुनि सब होहिं सुखारे। यज्ञ का अर्थ समर्पण होता है। मानवता के कल्याण एवं विश्व शांति रकी कामना से ही यज्ञ का आयोजन किया गया है। धर्म कभी भी आपस में बैर करना नहीं सिखाता है। हम यज्ञ के माध्यम से लोगों में वसुधैव कुटुंबकम् के भाव को जागृत करते हैं। यज्ञ के आयोजनकर्ता राम अवतार सिंह और सहायक पद्मनाथ सिंह ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कथा वाचक मिथिलेश त्रिपाठी, यज्ञाचार्य अखिलेश भार्गव, राम सागर दास, राम कमल दास जी वेदांती, सरस्वती जी महराज, ओमप्रकाश सिंह, रतन सिंह आदि उपस्थित थे।
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अखंड संकीर्तन में गूंज रहे जयकारे
अखंड संकीर्तन में गूंज रहे जयकारे
फूलपुर। पुरुषोत्तम मास में बाबा परमहंस मंडल सेवा समिति की ओर से बाबा की कुटी पर एक मास तक चल रहा अखंड संकीर्तन की गूंज से पूराी क्षेत्र का भक्तिमय हो गया है। सुबह-शाम प्रतिदिन विशेष आरती में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। आरती के बाद श्रद्धा और विश्वास के साथ परिवार की सुख समृद्धि की कामना की जा रही है।ॉ
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