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मंडलीय अस्पताल परिसर में पुन: प्राइवेट एंबुलेंसों का कब्जा
Updated Wed, 25 Apr 2018 11:12 PM IST
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आजमगढ़। मंडलीय अस्पताल परिसर में एक बार फिर प्राइवेट एंबुलेंस चालकों का कब्जा हो गया है। मुख्य गेट से लेकर इमरजेंसी तक दर्जनों प्राइवेट एंबुलेंस अस्पताल परिसर में खड़ी रहती है। रात के वक्त तो इमरजेंसी के गेट पर तीन-चार की संख्या में प्राइवेट एंबुलेंस पूरी तरह से गेट छेंक कर खड़ी हो जाती है और रेफर होने वाले मरीजों को अपने चेहेते अस्पतालों पर पहुंचाने के लिए आपस में मारपीट करने पर भी उतारू हो जाते है।
अस्पताल में नि:शुल्क इलाज के साथ ही आने और जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी मंडलीय अस्पताल पर प्राइवेट एंबुलेंस का कब्जा बना हुआ है। चौबीसों घंटे अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर इमरजेंसी तक ये प्राइवेट एंबुलेंस संचालक अपनी गाडिय़ा खड़ी किए रहते है। रेफर मरीज को अपने चेहेते अस्पतालों पर पहुंचाने के लिए इनके द्वारा इमजेंसी के गेट पर ही पूरी तरह से कब्जा कर लिया जाता है। इमजेंसी गेट पर तीन से चार की संख्या में एंबुलेंस खड़ी हो जाती है और सरकारी एंबुलेंस को खड़ा होने के लिए जगह ही नहीं मिलती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनके द्वारा जहां मरीजों से मोटी कमाई की जाती है तो वहीं चहेते अस्पतालों द्वारा इन्हें मरीजो से वसूल कर अच्छा कमीशन भी दिया जाता है।
अस्पताल के अंदरखाने तक है सेटिंग
आजमगढ़। ऐसा नहीं है कि अस्पताल प्रशासन को इन प्राइवेट एंबुलेंस के कवायद की जानकारी नहीं है। अस्पताल प्रशासन की शह पर ही इनका परिसर में कब्जा है। कई बार इन प्राइवेट एंबुलेंस वालों के खिलाफ शिकायत भी हुई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्र तो बताते है कि अंदरखाने तक इन एंबुलेंस चालकों की सेटिंग है।
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अस्पताल परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस के खड़ा होने पर पूरी तरह से रोक है। इसके बाद भी यदि ये परिसर में खड़ा होते है तो हम स्वयं लाठी लेकर इन्हें भगा नहीं सकते। समय-समय पर शहर कोतवाली और बलरामपुर चौकी पुलिस को अस्पताल परिसर में अनाधिकृत रुप से खड़े एंबुलेंस को हटाने के लिए कहा जाता है। अब वे प्राइवेट एंबुलेंस को परिसर से नहीं हटवाते है तो हम क्या कर सकते है।
डॉ. जीएल केशरवानी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, मंडलीय अस्पताल, आजमगढ़।
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अस्पताल में नि:शुल्क इलाज के साथ ही आने और जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी मंडलीय अस्पताल पर प्राइवेट एंबुलेंस का कब्जा बना हुआ है। चौबीसों घंटे अस्पताल के मुख्य गेट से लेकर इमरजेंसी तक ये प्राइवेट एंबुलेंस संचालक अपनी गाडिय़ा खड़ी किए रहते है। रेफर मरीज को अपने चेहेते अस्पतालों पर पहुंचाने के लिए इनके द्वारा इमजेंसी के गेट पर ही पूरी तरह से कब्जा कर लिया जाता है। इमजेंसी गेट पर तीन से चार की संख्या में एंबुलेंस खड़ी हो जाती है और सरकारी एंबुलेंस को खड़ा होने के लिए जगह ही नहीं मिलती है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनके द्वारा जहां मरीजों से मोटी कमाई की जाती है तो वहीं चहेते अस्पतालों द्वारा इन्हें मरीजो से वसूल कर अच्छा कमीशन भी दिया जाता है।
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अस्पताल के अंदरखाने तक है सेटिंग
आजमगढ़। ऐसा नहीं है कि अस्पताल प्रशासन को इन प्राइवेट एंबुलेंस के कवायद की जानकारी नहीं है। अस्पताल प्रशासन की शह पर ही इनका परिसर में कब्जा है। कई बार इन प्राइवेट एंबुलेंस वालों के खिलाफ शिकायत भी हुई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्र तो बताते है कि अंदरखाने तक इन एंबुलेंस चालकों की सेटिंग है।
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अस्पताल परिसर में प्राइवेट एंबुलेंस के खड़ा होने पर पूरी तरह से रोक है। इसके बाद भी यदि ये परिसर में खड़ा होते है तो हम स्वयं लाठी लेकर इन्हें भगा नहीं सकते। समय-समय पर शहर कोतवाली और बलरामपुर चौकी पुलिस को अस्पताल परिसर में अनाधिकृत रुप से खड़े एंबुलेंस को हटाने के लिए कहा जाता है। अब वे प्राइवेट एंबुलेंस को परिसर से नहीं हटवाते है तो हम क्या कर सकते है।
डॉ. जीएल केशरवानी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, मंडलीय अस्पताल, आजमगढ़।