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सावधानी से खरीदें मिठाई, कहीं सेहत न बिगाड़े मिलावट
Updated Thu, 01 Nov 2018 12:54 AM IST
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आजमगढ़। त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। जल्द ही दीपावली भी आने वाली है। दीपावली पर मिठाइयों की खास अहमियत होती है। लोग एक दूसरे को मिठाई का तोहफा देकर खुशियां बांटते हैं। लेकिन अगर यहीं मिठाई केमिकल की हो तो आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। मिठाई में प्रयुक्त हो रहे विभिन्न प्रकार के केमिकल आपको कैंसर का रोगी तक बना सकते हैं। हाल यह है कि मिलावटी खोवा, मिलावटी पनीर आदि के बने खाद्य पदार्थों से पूरा बाजार पटा हुआ है। त्योहारों में मिलावट से बने खाद्य पदार्थों की बहार सी आ जाती है। थोड़े से फायदे के लालच में दुकानदार मिलावट करने से नहीं हिचकते। जिसका खामियाजा इन खाद्य पदार्थों का उपयोग करने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। हालांकि जिले में अभी तक सिंथेटिक खोवा और पनीर का मामला अभी तक सामने नहीं आया है। लेकिन दूध में मिलावट, खोवे में मिलावट आदि पकड़ी जा चुकी है। दीपावली पर्व पर मिठाइयों की खास अहमियत होती है। लोग एक दूसरे को मिठाइयों को उपहार स्वरूप भेंटकर अपने प्रेम का इजहार करते हैं। दुकानदारों द्वारा इसकी तैयारी काफी पहले से की जाती है। वहीं मिलावट पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग की टीम भी सक्रिय हो जाती है।
इस वर्ष 150 नमूनों में 95 हुए फेल
आजमगढ़। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय की मानें तो इस वर्ष एक अप्रैल से अब तक उनकी टीम ने 125 स्थानों पर छापा मारकर 150 नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया, जिसमें 95 नमूने फेल हुए। फेल हुए नमूनों पर एडीएम कोर्ट से 43 वादों में फैसला सुनाया गया। जिसके तहत कुल छह लाख छह हजार सात सौ रुपये जुर्माना वसूला गया। उन्होंने बताया कि अगर जनपद में मिलावट की स्थिति देखें तो मिठाइयों पर जिस एल्युमिनीयम बर्क का इस्तेमाल किया जाता है। उनमें से ज्यादातर नकली आ रहे हैं। इसके साथ ही इनके द्वारा दुकानदारों द्वारा मिठाइयों में ज्यादा कलर का प्रयोग किया जाता है। खोए में मिलावट तो मिलती है लेकिन सिंथेटिक खोवा और सिंथेटिक पनीर का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।
दूध में मिलावट से बढ़ रहे कैंसर रोगी
आजमगढ़। फिजिशियन डॉ. पंकज राय की मानें तो मिलावटी और केमिकल युक्त मिठाइयों के सेवन से किसी का भी पेट खराब हो सकता है। केमिकल पेट में कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे सकता है। इसका सेवन करने वाले व्यक्ति को एलर्जी और स्किन की बीमारियां हो सकती है। इनके प्रयोग से कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। सबसे ज्यादा मिलावटी दूध के कारण कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि आम आदमी मिठाइयों में मिलावट की पहचान नहीं कर सकता है।
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मिलावट के बाद भी डिमांड में कमी नहीं
आजमगढ़। मिष्ठान विक्रेता मदन मोदनवाल ने बताया कि मिलावट से इंकार नहीं किया जा सकता है। बहुत से लोग हैं जो थोड़े से लालच में मिलावट करते हैं। लेकिन इसके कारण खोवा और पनीर से बनी मिठाइयों की डिमांड में कमी आई हो ऐसा नहीं लगता है। हम लोग भी सिंथेटिक खोवा और पनीर के बारे में सुनते हैं लेकिन आज तक देखने को नहीं मिला है।
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इस वर्ष 150 नमूनों में 95 हुए फेल
आजमगढ़। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी डीके राय की मानें तो इस वर्ष एक अप्रैल से अब तक उनकी टीम ने 125 स्थानों पर छापा मारकर 150 नमूने लिए। इन नमूनों को जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया, जिसमें 95 नमूने फेल हुए। फेल हुए नमूनों पर एडीएम कोर्ट से 43 वादों में फैसला सुनाया गया। जिसके तहत कुल छह लाख छह हजार सात सौ रुपये जुर्माना वसूला गया। उन्होंने बताया कि अगर जनपद में मिलावट की स्थिति देखें तो मिठाइयों पर जिस एल्युमिनीयम बर्क का इस्तेमाल किया जाता है। उनमें से ज्यादातर नकली आ रहे हैं। इसके साथ ही इनके द्वारा दुकानदारों द्वारा मिठाइयों में ज्यादा कलर का प्रयोग किया जाता है। खोए में मिलावट तो मिलती है लेकिन सिंथेटिक खोवा और सिंथेटिक पनीर का कोई मामला प्रकाश में नहीं आया है।
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दूध में मिलावट से बढ़ रहे कैंसर रोगी
आजमगढ़। फिजिशियन डॉ. पंकज राय की मानें तो मिलावटी और केमिकल युक्त मिठाइयों के सेवन से किसी का भी पेट खराब हो सकता है। केमिकल पेट में कई प्रकार की बीमारियों को जन्म दे सकता है। इसका सेवन करने वाले व्यक्ति को एलर्जी और स्किन की बीमारियां हो सकती है। इनके प्रयोग से कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। सबसे ज्यादा मिलावटी दूध के कारण कैंसर रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि आम आदमी मिठाइयों में मिलावट की पहचान नहीं कर सकता है।
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मिलावट के बाद भी डिमांड में कमी नहीं
आजमगढ़। मिष्ठान विक्रेता मदन मोदनवाल ने बताया कि मिलावट से इंकार नहीं किया जा सकता है। बहुत से लोग हैं जो थोड़े से लालच में मिलावट करते हैं। लेकिन इसके कारण खोवा और पनीर से बनी मिठाइयों की डिमांड में कमी आई हो ऐसा नहीं लगता है। हम लोग भी सिंथेटिक खोवा और पनीर के बारे में सुनते हैं लेकिन आज तक देखने को नहीं मिला है।