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गाजे-बाजे संग माता सीता को ब्याहने पहुंचे श्रीराम
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:38 PM IST
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फूलपुर/मेजवां। फूलपुर क्षेत्र के जगदीशपुर कुटी से श्रीश्री 108 बाबा सीताराम के नेतृत्व में गुरुवार को गाजे बाजे के साथ प्रभु श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी निकाली गई। झांकी शबाना आजमी रोड के समीप गढ़वा कुटी पर देर शाम पहुंची। यहां धनुष यज्ञ का आयोजन किया गया। धनुष टूटते ही जय श्रीराम के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
श्रीराम, लक्ष्मण को रथ पर बैठाकर जगदीशपुर, शंकर तिराहा, शनिचर बाजार, पुरानी मिर्चा मंडी होकर शबाना रोड गढ़वा लाया गया। रथ के आगे हाथी और श्रीहनुमान दल अखाड़ा के कलाकर करतब दिखाते चल रहे थे। रोड पर हाथी दौड़ हुआ। कुंवर नदी तट गढ़वा स्थित विवाह स्थल पर हाथी के पहुंचने पर महंत को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान बारातियों का स्वागत फूलमाला पहना कर किया गया। श्रीराम विवाहोत्सव के पूर्व महिलाओ ने मंगलगीत प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने धनुष को तोड़ा और सीताजी ने श्रीराम के गले में वरमाला डाला। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारे से गढ़वा गूंजायमान हो उठा। इस मौके पर ज्ञानी बाबा, बबलू यादव, पप्पू यादव, दशरथ सोनकर, जलहारी दास जी, फलहारी दास जी मउनी, बाबा रामायणी दास जी थे।
राम विवाहोत्सव में जमकर गूंजे जयघोष
अहरौला/अतरौलिया। दुर्वाषा महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 ब्रह्मलीन मौनी बाबा के आश्रम गहजी महिपालपुर की सिद्धपीठ पर गुरुवार को धूमधाम से राम विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान प्रभु राम और माता सीती के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
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वर पक्ष से आचार्य हरिकेश चौबे और जनकपुर के कुल पुरोहित पंडित सीताराम तिवारी की ओर से विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच राम विवाह संपन्न कराया गया। आश्रम के साधु-संतों की ओर से महाराज दशरथ और अयोध्या से आए बारातियों का मंगलगीत से स्वागत किया गया। कथा वाचक संतराम सिंह ने कहा कि राम विवाह देखने और कथा सुनने से पापों का विनाश हो जाता है। इस मौके पर आश्रम के महंथ हरिप्रसाद दास, जयप्रकाश दास, सुधाकर चौबे, उपेन्द्र शर्मा, मेवा शर्मा, अतुल आदि रहे। वहीं, अतरौलिया के के बाबा प्रथमदेव की धर्मस्थली और संत मुसई दास की तपस्थली प्रथमदेव सिद्धपीठ धाम बहिरादेव पर चल रहे पांच-दिवसीय रामकथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को राम विवाह कार्यक्रम संपन्न हुआ। राम-सीता के जयकारों से पूरा आश्रम भक्ति में डूब गया। आश्रम के महंत प्रेमदास की ओर से एक जोड़े का विवाह करवाया गया। बाबा प्रेमदास और आश्रम के अन्य सदस्यों तथा क्षेत्रीय लोगों ने नवदंपति को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। नवदंपति को गृहस्थी के सारे सामान दिए गए। शुक्रवार को भगवान राधा-कृष्ण और शनिदेव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। सभी क्षेत्रवासियों से प्राण प्रतिष्ठा और भंडारे में शामिल होकर पुण्य के भागीदार बनने की अपील की। इस मौके पर आचार्य कौशल, सीताराम सिंह, सुदर्शन जी, ऋषिशुक्ल, पंकज मिश्रा, विवेक मिश्र, राधेश्याम मिश्र, राकेश शुक्ला सहित श्रद्धालु उपस्थित थे।
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श्रीराम, लक्ष्मण को रथ पर बैठाकर जगदीशपुर, शंकर तिराहा, शनिचर बाजार, पुरानी मिर्चा मंडी होकर शबाना रोड गढ़वा लाया गया। रथ के आगे हाथी और श्रीहनुमान दल अखाड़ा के कलाकर करतब दिखाते चल रहे थे। रोड पर हाथी दौड़ हुआ। कुंवर नदी तट गढ़वा स्थित विवाह स्थल पर हाथी के पहुंचने पर महंत को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान बारातियों का स्वागत फूलमाला पहना कर किया गया। श्रीराम विवाहोत्सव के पूर्व महिलाओ ने मंगलगीत प्रस्तुत किया। इसके बाद प्रभु श्रीराम ने धनुष को तोड़ा और सीताजी ने श्रीराम के गले में वरमाला डाला। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारे से गढ़वा गूंजायमान हो उठा। इस मौके पर ज्ञानी बाबा, बबलू यादव, पप्पू यादव, दशरथ सोनकर, जलहारी दास जी, फलहारी दास जी मउनी, बाबा रामायणी दास जी थे।
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राम विवाहोत्सव में जमकर गूंजे जयघोष
अहरौला/अतरौलिया। दुर्वाषा महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 ब्रह्मलीन मौनी बाबा के आश्रम गहजी महिपालपुर की सिद्धपीठ पर गुरुवार को धूमधाम से राम विवाह संपन्न हुआ। इस दौरान प्रभु राम और माता सीती के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
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वर पक्ष से आचार्य हरिकेश चौबे और जनकपुर के कुल पुरोहित पंडित सीताराम तिवारी की ओर से विधि विधान से मंत्रोच्चार के बीच राम विवाह संपन्न कराया गया। आश्रम के साधु-संतों की ओर से महाराज दशरथ और अयोध्या से आए बारातियों का मंगलगीत से स्वागत किया गया। कथा वाचक संतराम सिंह ने कहा कि राम विवाह देखने और कथा सुनने से पापों का विनाश हो जाता है। इस मौके पर आश्रम के महंथ हरिप्रसाद दास, जयप्रकाश दास, सुधाकर चौबे, उपेन्द्र शर्मा, मेवा शर्मा, अतुल आदि रहे। वहीं, अतरौलिया के के बाबा प्रथमदेव की धर्मस्थली और संत मुसई दास की तपस्थली प्रथमदेव सिद्धपीठ धाम बहिरादेव पर चल रहे पांच-दिवसीय रामकथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को राम विवाह कार्यक्रम संपन्न हुआ। राम-सीता के जयकारों से पूरा आश्रम भक्ति में डूब गया। आश्रम के महंत प्रेमदास की ओर से एक जोड़े का विवाह करवाया गया। बाबा प्रेमदास और आश्रम के अन्य सदस्यों तथा क्षेत्रीय लोगों ने नवदंपति को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। नवदंपति को गृहस्थी के सारे सामान दिए गए। शुक्रवार को भगवान राधा-कृष्ण और शनिदेव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी। सभी क्षेत्रवासियों से प्राण प्रतिष्ठा और भंडारे में शामिल होकर पुण्य के भागीदार बनने की अपील की। इस मौके पर आचार्य कौशल, सीताराम सिंह, सुदर्शन जी, ऋषिशुक्ल, पंकज मिश्रा, विवेक मिश्र, राधेश्याम मिश्र, राकेश शुक्ला सहित श्रद्धालु उपस्थित थे।