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अल्लामा शिब्ली ने जिंदगी भर शिक्षा को बढ़ावा देने का किया काम
Updated Sun, 19 Nov 2017 11:38 PM IST
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आजमगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर यासीन मजहर सिद्दीकी ने कहा कि अल्लामा शिब्ली नोमानी ने औरतों की शिक्षा और उनके हक हकुक के बारे में लिखा। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया। उनके शिष्य रहे सैय्यद सुलेमा नदवी ने भी उनके इस अभियान को अपनी किताबों के जरिए आगे बढ़ाने का काम किया। यह बातें रविवार को शिब्ली नेशनल महाविद्यालय में उम्हातुल मोमनीन का शैक्षणिक और सामाजिक योगदान विषय पर आयोजित सेमीनार में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि हम अल्लामा शिब्ली नोमानी और सैय्यद सुलेमा की लिखी पूरी किताबों को पढ़ ही नहीं पाए है। यही वजह ही हम नए तरीके से उनके मिशन को आगे नहीं बढ़ा पा रहे है। सेमीनार की अध्यक्षता कर रहे 1967 में विद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले डा.शमशाद अहमद ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चाहे लड़की हो या लड़का सभी को उच्च स्तर तक की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। इंटर या बीए, बीएससी कर छोड़ नहीं देनी चाहिए, क्यों कि शिक्षा के जरिए ही हम ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते है। शिब्ली एकेडमी के उमैर सिद्दीक नदवी ने कहा कि वर्तमान समय में औरतों के जो हालात है उसकी दृष्टि से यह सेमीनार महत्वपूर्ण है। समाज को बनाने वाली औरतें ही होती है। अल्लामा शिब्ली नोमानी ने इसी आधाी आवादी के बारे लिखा और उसे आगे बढ़ाना अपना फर्ज समझा। उन्होंने कहा कि कुरआन में औरत और मर्द को बराबर का हक दिया गया है। इस अवसर पर डा. मोहम्मद ताहिर द्वारा लिखी किताब मुक्कदस मांए और जगदंबा पांडेय द्वारा लिखी इकबाल मजीद के अफसाने का विमोचन मेहमानों ने किया। सेमीनार की शुरुआत मौलाना अब्बासी कि तिलावते कुरआन पाक से हुआ। इस अवसर पर आए हुए मेहमानों का स्वागत प्राचार्य गयास असद खान और चीफ प्राक्टर जहूर आलम ने मेमोंटो देकर किया। सेमीनार का संचालन कार्यक्रम के आयोजक डा. मोहम्मद ताहिर ने किया। इस मौके पर कालेज के सेक्रेटरी शाह आलम गुड्डू जमाली, मौलाना ताहिर मदनी, डा. जावेद अख्तर, फहमीदा जैदी, महमूद मिर्जा आदि उपस्थित रहे। इस दौरान कालेज की छात्रा हेमलता सिंह ने नातिया कलाम सुनाया और छात्रा उमर अफजाल ने भाषण दिए।
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उन्होंने कहा कि हम अल्लामा शिब्ली नोमानी और सैय्यद सुलेमा की लिखी पूरी किताबों को पढ़ ही नहीं पाए है। यही वजह ही हम नए तरीके से उनके मिशन को आगे नहीं बढ़ा पा रहे है। सेमीनार की अध्यक्षता कर रहे 1967 में विद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले डा.शमशाद अहमद ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चाहे लड़की हो या लड़का सभी को उच्च स्तर तक की शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। इंटर या बीए, बीएससी कर छोड़ नहीं देनी चाहिए, क्यों कि शिक्षा के जरिए ही हम ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते है। शिब्ली एकेडमी के उमैर सिद्दीक नदवी ने कहा कि वर्तमान समय में औरतों के जो हालात है उसकी दृष्टि से यह सेमीनार महत्वपूर्ण है। समाज को बनाने वाली औरतें ही होती है। अल्लामा शिब्ली नोमानी ने इसी आधाी आवादी के बारे लिखा और उसे आगे बढ़ाना अपना फर्ज समझा। उन्होंने कहा कि कुरआन में औरत और मर्द को बराबर का हक दिया गया है। इस अवसर पर डा. मोहम्मद ताहिर द्वारा लिखी किताब मुक्कदस मांए और जगदंबा पांडेय द्वारा लिखी इकबाल मजीद के अफसाने का विमोचन मेहमानों ने किया। सेमीनार की शुरुआत मौलाना अब्बासी कि तिलावते कुरआन पाक से हुआ। इस अवसर पर आए हुए मेहमानों का स्वागत प्राचार्य गयास असद खान और चीफ प्राक्टर जहूर आलम ने मेमोंटो देकर किया। सेमीनार का संचालन कार्यक्रम के आयोजक डा. मोहम्मद ताहिर ने किया। इस मौके पर कालेज के सेक्रेटरी शाह आलम गुड्डू जमाली, मौलाना ताहिर मदनी, डा. जावेद अख्तर, फहमीदा जैदी, महमूद मिर्जा आदि उपस्थित रहे। इस दौरान कालेज की छात्रा हेमलता सिंह ने नातिया कलाम सुनाया और छात्रा उमर अफजाल ने भाषण दिए।
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