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मुल्क और मजहब से मोहब्बत करने का बताया तरीका
Updated Wed, 15 Nov 2017 11:54 PM IST
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सगड़ी। सगड़ी तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत जीयनपुर स्थित मदरसा माजिदा निसंवा अरबी कॉलेज चुनुगपार में बुधवार को उर्से आला हजरत मनाया गया।
इस मौके पर कुरआनख्वानी, नात और तकरीर का प्रोग्राम रखा गया। मदरसा निस्वां की बच्चियों ने नात- ए- मनकबत पेश किया। मदरसा के प्रधानाध्यापक मौलाना गुलाम यजदानी मिस्बाही ने आला हजरत के कारनामे बयान किए। आला हजरत ने अपने कामों के जरिए हिंदुस्तान के मुसलमानों को हजरत मोहम्मद साहब से सच्ची मोहब्बत करने का सबक दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमान गुमराही के दलदल में फंसने से बचे। उन्होंने मुसलमानों को अपने मुल्क और मजहब से मुहब्बत करने का तरीका बतलाया। उन्होंने कहा कि आला हजरत ने कुरआन का उर्दू में अनुवाद किया। उन्होंने अपनी लिखी किताबों के जरिए वहाबियत को रद्द किया और मुसलमानों के इमानों और अकीदे को बचाया आज भी हिंदुस्तान में 80 प्रतिशत मुसलमान जो सुन्नी कहलाते हैं। आला हजरत के चाहने वाले है। आखिर में सलातो सलाम और दुआ होने के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर मदरसे के प्रबंधक गुलाम रब्बानी रिजवी, शोएब खान, मुमताज अहमद, हाजी अनवारुल हक, इम्तियाज अहमद, हाजी समसुल हक, उज्मा शरीफ, शफीना हाफिज गुलाम सरवर मौजूद थे। संचालन नूरु निशा ने किया।
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इस मौके पर कुरआनख्वानी, नात और तकरीर का प्रोग्राम रखा गया। मदरसा निस्वां की बच्चियों ने नात- ए- मनकबत पेश किया। मदरसा के प्रधानाध्यापक मौलाना गुलाम यजदानी मिस्बाही ने आला हजरत के कारनामे बयान किए। आला हजरत ने अपने कामों के जरिए हिंदुस्तान के मुसलमानों को हजरत मोहम्मद साहब से सच्ची मोहब्बत करने का सबक दिया। उन्होंने कहा कि मुसलमान गुमराही के दलदल में फंसने से बचे। उन्होंने मुसलमानों को अपने मुल्क और मजहब से मुहब्बत करने का तरीका बतलाया। उन्होंने कहा कि आला हजरत ने कुरआन का उर्दू में अनुवाद किया। उन्होंने अपनी लिखी किताबों के जरिए वहाबियत को रद्द किया और मुसलमानों के इमानों और अकीदे को बचाया आज भी हिंदुस्तान में 80 प्रतिशत मुसलमान जो सुन्नी कहलाते हैं। आला हजरत के चाहने वाले है। आखिर में सलातो सलाम और दुआ होने के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर मदरसे के प्रबंधक गुलाम रब्बानी रिजवी, शोएब खान, मुमताज अहमद, हाजी अनवारुल हक, इम्तियाज अहमद, हाजी समसुल हक, उज्मा शरीफ, शफीना हाफिज गुलाम सरवर मौजूद थे। संचालन नूरु निशा ने किया।