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अतिक्रमण से खाली कराई 454.75 हेक्टेयर भूमि...यूपीसीडा तलाशेगा उद्योग की संभावनाएं

Tue, 13 Oct 2020 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 11:18 PM IST
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454.75 hectares of land evacuated due to encroachment ... UPCIDA will explore industry's prospects
आजमगढ़। पिछले दिनों मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लैंडबैंक से संबंधित बैठक हुई थी। इसमें योजना रास्व विभाग को निर्देश दिए गए थे कि भू माफियाओं से अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का विवरण यूपीसीडा को सौंपा जाए, ताकि मुक्त कराई गई भूमि पर यूपीसीडा औद्योगिकरण की संभावनाएं तलाश सके। राजस्व विभाग के अनुसार जनपद में 454.75 हेक्टेयर भूमि भूमाफियों से अतिक्रमण मुक्त कराई गई है। अब इसका सत्यापन कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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कोरोना काल में उत्पन्न हुई पलायन की परिस्थितियां और उससे हुई दुर्दशा के देखते हुए अब प्रत्येक जनपदों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। पिछले माह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई लैंडबैंक से संबंधित बैठक में अब तक एंटी भू माफिया योजना के तहत अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि पर विचार किया गया था। इस योजना के तहत विभिन्न जनपदों की ओर से अभी तक भू माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराई गई भूमि का विवरण शासन को भेजा गया था। प्रदेश में कई जनपदों में ऐसे भूमि सैकड़ों हेक्टेयर के रकबे में हैं। इसे देख योजना बनाई गई थी कि जनपदों अपने यहां खाली कराई गई भूमि का विस्तृत विवरण सीईओ यूपीसीडा को उपलब्ध कराएंगे, ताकि उस पर उद्योग लगाने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। जनपद में आजमगढ़ में भी एंटी भू माफिया के तहत 4.54.75 हेक्टेयर भूमि भूमाफियाओं से मुक्त कराई गई है। अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने जिलाधिकारी पत्र भेजकर उक्त भूमि का विस्तृत विवरण सीईओ यूपीसीडा को भेजने के निर्देश दिए हैं। आदेश के बाद जिला प्रशासन की ओर से उक्त भूमि के बारे में सभी तहसीलों से विस्तृत विवरण तलब किया गया है। तहसीलों से विवरण प्राप्त होते ही इसे यूपीसीडा को भेजा जाएगा।
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45 एकड़ भूमि पर अटक चुका है मामला
भू माफियाओं से खाली कराई गई 45 एकड़ भूमि पर उद्योग लगाने का एक मामला पहले ही खटाई में पड़ चुका है। इसकी प्रक्रिया वर्ष 2018 में तत्कालीन डीएम सीबी सिंह के समय शुरू हुई थी। तत्कालीन डीएम एनपी सिंह के प्रयास पर यूपीसीडा की ओर से इस पर कार्य भी शुरू किया गया था। निरीक्षण के बाद पता चला कि इस भूमि को लेकर कई वाद हाईकोर्ट में चल रहे हैं। नतीजा ये रहा कि मामला खटाई में चला गया।
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एक स्थान पर बड़ा रकबा मिलना मुश्किल
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर विवरण को तैयर किया जा रहा है, लेकिन उद्योग लगाने के लिए कम से कम एक स्थान पर 40 से 45 एकड़ भूमि चाहिए। इतना बड़ा रकबा एक स्थान पर मिलना मुश्किल है। जो जमीनें खाली कराई गई है। वो छोटे-छोटे रकबे में हैं। इन पर भी कोर्ट में चल रहे वादों से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के किनारे भी भेजा गया है प्रस्ताव
शासन की ओर से पिछले दिनों पूर्वांचल और गोरखपुर एक्सप्रेस-वे के किनारे डाउन स्ट्रीम में दो गुणे दो किमी की परिधि में आदियोगिक पार्क की स्थापना के लिए भूमि स्थापना का प्रस्ताव मांगा गया था। जनपद की चार तहसीलों से इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है। हालांकि राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जितनी परिधि में भूमि मांगी जा रही है इसमें काफी आबादी भी इसके दायरे में आएगी।

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भू-माफियाओं से खाली कराई गई लगभग 454 हेक्टेयर भूमि का विवरण सीईओ यूपीसीडा को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए तहसीलों से रिपोर्ट मांगी गई है। मिलते ही इसको यूपीसीडा को भेज दिया जाएगा।
हरिशंकर, सीआरओ
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