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ॐबयारॐ की प्रस्तुति में दिखा यायावरी जीवन
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आजमगढ़। सूत्रधार संस्थान की ओर से शारदा टॉकीज में चल रहे 14वें आजमगढ़ रंग महोत्सव की दूसरी नाट्य संध्या में रविवार को ‘बयार’ का मंचन हुआ। अलिफ थिएटर दिल्ली की सजी प्रस्तुति ‘बयार’ का भावपूर्ण मंचन रौनक खान के निर्देशन में हुआ जिसमें एक ऐसे नाचने गाने वाली मंडली और टोली की कहानी से रूबरू कराया गया जो कि भावनात्मक रूप से लोक कलाओं व पारंपरिक विधाओं से जुड़े हैं।
कहानी कुछ यूं थी कि गांव में नाच मंडली आई जो कुछ दिन यहीं रुक कर आसपास के गांव में प्रोग्राम करेगी। उसी गांव में बाला नाम का एक लड़का जिसे नाच-गाने का बहुत शौक है का मेलजोल मंडली से होता है। बाला के पिता नाच-गाने के धुर विरोधी हैं। अक्सर बाला को नाच गाने के लिए मार भी पड़ती है। इन सब बातों से तंग आकर बाला मंडली के साथ भाग जाता है। फिर शुरू होता है नाच गाने का यायावरी भरा जीवन...। भोजपुरी लोक संस्कृति के लवंडा नाच पर आधारित इस प्रस्तुति ने एक बार फिर सबको अश्लीलता के दौर में विलुप्त हो रहे नाच से रूबरू कराया। रणजीत कुमार की प्रकाश परिकल्पना और रौनक खान की संगीत परिकल्पना और निर्देशन ने दर्शकों पूरे नाटक में बांध कर रखा। अंगद, संदीप, रितेश, हरिओम, पुनीत, शुभम, सूरज, विवेक पांडेय, नीरज सिंह, शिखा मौर्य, कंचन मौर्य का योगदान सराहनीय रहा। शुभारंभ भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक रमेश चंद्र गुप्ता, डॉ. निर्मल वर्मा और सुदर्शन अग्रवाल ने किया। अतुल तिवारी, अजीत राय, डॉ सीके त्यागी, डॉ. अमित राय आदि मौजूद रहे। संचालन अभिषेक पंडित ने किया। सोमवार को सघन सोसायटी भोपाल की ओर से ‘चिड़ियाघर’ का मंचन होगा।
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कहानी कुछ यूं थी कि गांव में नाच मंडली आई जो कुछ दिन यहीं रुक कर आसपास के गांव में प्रोग्राम करेगी। उसी गांव में बाला नाम का एक लड़का जिसे नाच-गाने का बहुत शौक है का मेलजोल मंडली से होता है। बाला के पिता नाच-गाने के धुर विरोधी हैं। अक्सर बाला को नाच गाने के लिए मार भी पड़ती है। इन सब बातों से तंग आकर बाला मंडली के साथ भाग जाता है। फिर शुरू होता है नाच गाने का यायावरी भरा जीवन...। भोजपुरी लोक संस्कृति के लवंडा नाच पर आधारित इस प्रस्तुति ने एक बार फिर सबको अश्लीलता के दौर में विलुप्त हो रहे नाच से रूबरू कराया। रणजीत कुमार की प्रकाश परिकल्पना और रौनक खान की संगीत परिकल्पना और निर्देशन ने दर्शकों पूरे नाटक में बांध कर रखा। अंगद, संदीप, रितेश, हरिओम, पुनीत, शुभम, सूरज, विवेक पांडेय, नीरज सिंह, शिखा मौर्य, कंचन मौर्य का योगदान सराहनीय रहा। शुभारंभ भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक रमेश चंद्र गुप्ता, डॉ. निर्मल वर्मा और सुदर्शन अग्रवाल ने किया। अतुल तिवारी, अजीत राय, डॉ सीके त्यागी, डॉ. अमित राय आदि मौजूद रहे। संचालन अभिषेक पंडित ने किया। सोमवार को सघन सोसायटी भोपाल की ओर से ‘चिड़ियाघर’ का मंचन होगा।
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