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देय किश्त न जमा करने पर बालू खनन का पट्टा निरस्त
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आजमगढ़। बालू खनन का पट्टा लेने के बाद देय धनराशि की द्वितीय और द्वितीय किश्त न जमा करने पर जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने सोमवार को पट्टा निरस्त कर दिया। साथ ही ठेकेदार द्वारा जमा की गई पहली किश्त को राज्यसरकार के पक्ष के जब्त करने का आदेश जारी किया है।
जिला खान निरीक्षण विनीत सिंह ने बताया कि शासनादेश 14 अगस्त 2917 के तहत अंबेडकर नगर जनपद के जैतपुर निवासी विनय कुमार चतुर्वेदी को सगड़ी तहसील के कर्महा उर्फ करनऊपुर के आराजी संख्या 338, 339 मि., 343 और 344 जिसका रकबा 4.580 हेक्टेअर भूमि से घाघरा नदी में साधारण बालू खान के लिए पांच वर्ष का पट्टा दिया गया। पट्टा आवंटन होने के बाद इनके द्वारा पहली किश्त तो जमा की गई लेकिन दूसरी किश्त का 85 लाख 98 हजार 950 रुपये जमा नहीं किया।
तीसरी किश्त की ही इतनी ही धनराशि को भी इनके द्वारा जमा नहीं किया गया। इस पर खनन विभाग की ओर से 20 जुलाई, नौ अक्टूबर और 24 अक्टूबर को नोटिस निर्गत की गई। लेकिन इनके द्वारा धनराशि का भुगतान करने की बजाय पट्टा समर्पण का प्रार्थना पत्र दिया गया जबकि शासनादेश में समर्पण की व्यवस्था नहीं है। उनके द्वारा न तो बकाया धनराशि जमा की गई और ना ही इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण दिया गया। उप्र उपखनिज परिहार नियमावली 1963 के नियम-58 और खनन पट्टा विलेख भाग तीन के सामान्य उपबंध के अनुसार नियमों प्रसंविदाओं और शर्तों को भंग करने पर पट्टा समाप्त किए जाने का प्राविधान है। अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिलाधिकारी ने विनय कुमार चतुर्वेदी के खनन पट्टे को निरस्त कर दिया है। साथ ही उनके द्वारा जमा की पहली किश्त की धनराशि को जब्त करने का आदेश दिया है।
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जिला खान निरीक्षण विनीत सिंह ने बताया कि शासनादेश 14 अगस्त 2917 के तहत अंबेडकर नगर जनपद के जैतपुर निवासी विनय कुमार चतुर्वेदी को सगड़ी तहसील के कर्महा उर्फ करनऊपुर के आराजी संख्या 338, 339 मि., 343 और 344 जिसका रकबा 4.580 हेक्टेअर भूमि से घाघरा नदी में साधारण बालू खान के लिए पांच वर्ष का पट्टा दिया गया। पट्टा आवंटन होने के बाद इनके द्वारा पहली किश्त तो जमा की गई लेकिन दूसरी किश्त का 85 लाख 98 हजार 950 रुपये जमा नहीं किया।
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तीसरी किश्त की ही इतनी ही धनराशि को भी इनके द्वारा जमा नहीं किया गया। इस पर खनन विभाग की ओर से 20 जुलाई, नौ अक्टूबर और 24 अक्टूबर को नोटिस निर्गत की गई। लेकिन इनके द्वारा धनराशि का भुगतान करने की बजाय पट्टा समर्पण का प्रार्थना पत्र दिया गया जबकि शासनादेश में समर्पण की व्यवस्था नहीं है। उनके द्वारा न तो बकाया धनराशि जमा की गई और ना ही इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण दिया गया। उप्र उपखनिज परिहार नियमावली 1963 के नियम-58 और खनन पट्टा विलेख भाग तीन के सामान्य उपबंध के अनुसार नियमों प्रसंविदाओं और शर्तों को भंग करने पर पट्टा समाप्त किए जाने का प्राविधान है। अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिलाधिकारी ने विनय कुमार चतुर्वेदी के खनन पट्टे को निरस्त कर दिया है। साथ ही उनके द्वारा जमा की पहली किश्त की धनराशि को जब्त करने का आदेश दिया है।
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