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Azamgarh News: स्कूल आने में असमर्थ 354 बच्चों को घर पर दी जा रही शिक्षा
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आजमगढ़। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र के 354 छात्र दिव्यांगता के कारण स्कूल आने में असमर्थ हैं। प्रदेश सरकार की होम बेस्ड एजुकेशन के तहत इन बच्चों को घर पर ही औपचारिक शिक्षा दी जा रही है। इन बच्चों को पढ़ाने का काम स्पेशल एजुकेटर कर रहे हैं जो सप्ताह में एक दिन इन बच्चों के घर जाते हैं। दिव्यांगता की वजह से स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या 354 है। विभाग ने इनके लिए विशेष व्यवस्था की है। एक स्पेशल एजुकेटर सप्ताह में एक दिन उनके घर जाता है और उन्हें औपचारिक शिक्षा प्रदान करता है।
इस स्पेशल एजुकेटर का काम केवल यहीं खत्म नहीं होता। बच्चे के साथ-साथ वह अभिभावकों की भी काउंसिलिंग करता है ताकि बच्चे की दिव्यांगता को लेकर वे असहज न रहें और बच्चे को मुख्य धारा में लाने का प्रयास करते रहें। बीएसए राजीव कुमार पाठक ने बताया कि इस योजना में जिन बच्चों के घरों पर जा कर उन्हें औपचारिक शिक्षा दी जाती है उनमें ज्यादातर वंचित वर्ग के ही बच्चे शामिल होते हैं।
इन बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ उन्हें इस तरह से तैयार करने की कोशिश की जाती है ताकि वे दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों से भी आसानी से निपट सकें। उनकी दिव्यांगता के अनुसार उन्हें खेलकूद का सामान भी उपलब्ध कराया जाता है। इनमें ज्यादातर बच्चे चलने फिरने में असमर्थ होते हैं इसलिए उन्हें एक जगह बैठ कर ही खेलने वाला सामान दिया जाता है। इसके अलावा बच्चों को होम वर्क भी दिया जाता है ताकि वे खाली समय में अपनी पढ़ाई करते रहें।
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इस स्पेशल एजुकेटर का काम केवल यहीं खत्म नहीं होता। बच्चे के साथ-साथ वह अभिभावकों की भी काउंसिलिंग करता है ताकि बच्चे की दिव्यांगता को लेकर वे असहज न रहें और बच्चे को मुख्य धारा में लाने का प्रयास करते रहें। बीएसए राजीव कुमार पाठक ने बताया कि इस योजना में जिन बच्चों के घरों पर जा कर उन्हें औपचारिक शिक्षा दी जाती है उनमें ज्यादातर वंचित वर्ग के ही बच्चे शामिल होते हैं।
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इन बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ उन्हें इस तरह से तैयार करने की कोशिश की जाती है ताकि वे दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों से भी आसानी से निपट सकें। उनकी दिव्यांगता के अनुसार उन्हें खेलकूद का सामान भी उपलब्ध कराया जाता है। इनमें ज्यादातर बच्चे चलने फिरने में असमर्थ होते हैं इसलिए उन्हें एक जगह बैठ कर ही खेलने वाला सामान दिया जाता है। इसके अलावा बच्चों को होम वर्क भी दिया जाता है ताकि वे खाली समय में अपनी पढ़ाई करते रहें।
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