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बुनकरों के 30 करोड़ खा गए अफसर
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 27 Oct 2017 11:49 PM IST
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आजमगढ़। बुनकरों के उत्थान के लिए गठित समितियों ने बुनकरों के विकास के लिए आए धन की जमकर बंदरबांट की गई है। मुबारकपुर में पंजीकृत 150 से 200 समितियों को पिछले दो साल में टर्नओवर के आधार पर बुनकरों के प्रोत्साहन के लिए लगभग 30 करोड़ की धनराशि मिली। इससे बुनकरों का भला करना था।
सूत्रों की मानें तो समितियों की ओर से इस धन की बंदरबांट कर ली गई। कागजों में इस धन से खरीदारों को ही 10 से 20 प्रतिशत की छूट देना दिखाया गया है। अब खरीदारों को इस दी जाने वाली इस छूट से बुनकरों का क्या फायदा हुआ ये समझ से परे है। जांच में अब समितियों का गला फंसना तय है।
पब्लिसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लगाए गए बिलों पर भी फर्जी हस्ताक्षर की बातें भी बुनकरों की ओर से कही जा रही है।
बुनकरों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक वर्ष केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से वित्तपोषित योजनाओं के तहत रजिस्टर्ड समितियों को प्रोत्साहन करोड़ों की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन समितियों की ओर से बुनकरों के नाम से आई धनराशि को हड़पा जा रहा है।
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बुनकरों की ओर से 11 समितियों की शिकायत आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग से की गई थी।
आयुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी की ओर से इन सोसाइटियों जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर किया गया है।
जिन समतियों की शिकायत की गई हैं, उसमें भारती हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी, विकास बुनकर कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड नयापुर, न्यू इंडिया हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा खिजिर, संगम हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी,
सिल्क हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड समौधी, इंडियन हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा दीवान, शमा इंडिया कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा दिवान, भारत हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी, डायमंड सिल्क बुनकर उद्योग सहकारी संघ लिमिटेड पुरा रानी,
रेशमी करघा उद्योग सहकारी संघ लिमिटेड कटरा, आयुनिक बुनकर सहकारी संघ पुरा सोफी शामिल हैं।
इस नाम न छापने की शर्त पर कुछ बुनकरों ने बताया कि समितियों के नाम पर फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है। समितियों में शामिल बुनकरों को तो पता ही नहीं होता है कि वो समिति में हैं। इसलिए समितियों ने नियमों को ताक पर रख कर बुनकरों के विकास के लिए आए धन की जमकर बंदरबांट की है।
बताया कि मुबारकपुर में पंजीकृत 150 से 200 समितियों को पिछले दो साल में टर्नओवर के आधार पर बुनकरों के प्रोत्साहन के लिए लगभग 30 करोड़ की धनराशि मिली। इससे बुनकरों का भला करना था, लेकिन समितियों की ओर से फर्जी तरीके से इन पैसों से खरीदारों को 10 से 20 प्रतिशत की छूट देना दिखाया गया है।
पब्लिसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च दिखा फर्जी बिल लगाए गए हैं। ऐसे में जांच में अब समितियों का गला फंसना तय है।
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सूत्रों की मानें तो समितियों की ओर से इस धन की बंदरबांट कर ली गई। कागजों में इस धन से खरीदारों को ही 10 से 20 प्रतिशत की छूट देना दिखाया गया है। अब खरीदारों को इस दी जाने वाली इस छूट से बुनकरों का क्या फायदा हुआ ये समझ से परे है। जांच में अब समितियों का गला फंसना तय है।
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पब्लिसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लगाए गए बिलों पर भी फर्जी हस्ताक्षर की बातें भी बुनकरों की ओर से कही जा रही है।
बुनकरों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रत्येक वर्ष केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से वित्तपोषित योजनाओं के तहत रजिस्टर्ड समितियों को प्रोत्साहन करोड़ों की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन समितियों की ओर से बुनकरों के नाम से आई धनराशि को हड़पा जा रहा है।
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बुनकरों की ओर से 11 समितियों की शिकायत आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग से की गई थी।
आयुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी की ओर से इन सोसाइटियों जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर किया गया है।
जिन समतियों की शिकायत की गई हैं, उसमें भारती हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी, विकास बुनकर कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड नयापुर, न्यू इंडिया हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा खिजिर, संगम हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी,
सिल्क हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड समौधी, इंडियन हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा दीवान, शमा इंडिया कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा दिवान, भारत हैंडलूम कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पुरा रानी, डायमंड सिल्क बुनकर उद्योग सहकारी संघ लिमिटेड पुरा रानी,
रेशमी करघा उद्योग सहकारी संघ लिमिटेड कटरा, आयुनिक बुनकर सहकारी संघ पुरा सोफी शामिल हैं।
इस नाम न छापने की शर्त पर कुछ बुनकरों ने बताया कि समितियों के नाम पर फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है। समितियों में शामिल बुनकरों को तो पता ही नहीं होता है कि वो समिति में हैं। इसलिए समितियों ने नियमों को ताक पर रख कर बुनकरों के विकास के लिए आए धन की जमकर बंदरबांट की है।
बताया कि मुबारकपुर में पंजीकृत 150 से 200 समितियों को पिछले दो साल में टर्नओवर के आधार पर बुनकरों के प्रोत्साहन के लिए लगभग 30 करोड़ की धनराशि मिली। इससे बुनकरों का भला करना था, लेकिन समितियों की ओर से फर्जी तरीके से इन पैसों से खरीदारों को 10 से 20 प्रतिशत की छूट देना दिखाया गया है।
पब्लिसिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च दिखा फर्जी बिल लगाए गए हैं। ऐसे में जांच में अब समितियों का गला फंसना तय है।