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शिक्षा के मंदिर से ही बने भारतीय समाज के राष्ट्रीय नायक
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:41 PM IST
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आजमगढ़। नेशनल बुक ट्रस्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय की पहल पर जिला विद्यालय निरीक्षण वीके शर्मा के संयोजन में शिब्ली नेशनल इंटर कालेज में18वें आजमगढ़ पुस्तक मेले के चौथे दिन शिक्षण अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षक की भाषा विषय पर विषय प्रवर्तन करते हुए प्रसिद्ध लेखक और आकाशवाणी रीवा केन्द्र की केन्द्र निदेशक डा. निरजा माधव ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र का निर्माता होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में शिक्षा के मन्दिरों से ही राष्ट्र के नायक बने हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों का यह दायित्व है कि अपने समय की समस्याओं से रूबरू कराये और राष्ट्र के गौरवशाली परंपरा से भी जोड़े। उन्होंने कहा हमारे पाठ्यक्रम में प्रकृति के साथ जीने की आदत पर रचित साहित्य को हिस्सा बनाना होगा। राज्य सभा टीवी के एंकर एवं प्रसिद्ध पत्रकार सैयद इरफान ने कहा कि शिक्षक की नजरों में तिरस्कार और प्रोत्साहन दोनों छुपा होता है। ऐसे में शिक्षक ही न्यायाधीश है कि किन क्षणों में विद्यार्थियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पाठ्यक्रम कई बार समकालीन प्रश्नों से अछूते होते हैं। ऐेसे में शिक्षक का दायित्व है कि वह अपने समय के प्रश्नों से विद्यार्थियों का साक्षात्कार कराये। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भाषा मनुष्यता के निर्माण का पहला अध्याय है। मुुरादाबाद से आये प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. राकेश चक्र ने कहा कि बचपन में किताबें संस्कारों का बीजारोपण करती हैं और साहित्य सपने का मूर्त करता है। नेशनल बुक ट्रस्ट के कार्यक्रम अधिकारी श्री आमिर जिलानी ने कहा कि शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यशाला में शिक्षक की भाषा विषय के माध्यम से यह प्रयास किया गया कि शिक्षक समकालीन साहित्य से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय कार्याशाला के माध्यम से आजमगढ़ जनपद के 1000 शिक्षण संस्थाओं में पाठक मंच की स्थापना का उद्देयय है। प्रत्येक पाठक मंच को 500 रूपये की पुस्तक नि:शुल्क वितरित की जायेगी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि शिक्षक आत्मा के निर्माण का अभियंता है। शिक्षक गलत और सही का दृष्टि देता है। आज परस्पर सड़क दुर्घटना और जलवायु परिवर्तन के खतरों से भयभीत है। ऐसे में शिक्षक का यह दायित्व है कि वह समाज को स्वस्थ बनाने के अभियान का सहयात्री बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मौलाना उमैर सिद्दीक नदवी ने कहा कि शिब्ली एकेडमी पुस्तक संस्कृति के उन्नयन का एक बड़ा मंच है। पुस्तक मेले के माध्यम से सभी भाषाओं के शिक्षकों का एक सभा में एकत्र होना सामाजिक समरसता का प्रमाण है। कार्यक्रम में आए हुए लोगों का स्वागत करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के एके दीक्षित और वी.के. सिंह ने कहा कि रविवार को भी सुबह 10 बजे जनपद के प्रत्येक प्राथमिक, जूनियर, माध्यमिक, इंटर कालेज के शिक्षक सक्रिय हिस्सेदारी करेंगें। जिला विद्यालय निरीक्षक वीके शर्मा ने बताया कि रविवार को ललित कला विभाग काशी विद्यापीठ की विभागाध्यक्ष प्रो.मंजुला चतुर्वेदी, ललित कला विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डा.जेटली, हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. सूर्य नारायण एवं साहित्यकार जगदीश चन्द्र वर्नवाल कुन्द शिविर में विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लेगें। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए शिब्ली पीजी कालेज के प्राचार्य गयास असद खान ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों और शिक्षकों को ज्ञान की नयी धारा से जोडने का प्रयास है।
परंपराशील नाट्य स्रोतों के प्रवर्तक एवं साहित्य निर्माता श्री जगदीश चन्द्र माथुर की स्मृति को समर्पित आजमगढ़ पुस्तक मेले में सात दिवसीय नाट्य लेखन शिविर में आजमगढ़ के जल स्रोतों को लेखन का आधार बनाया जा रहा है। नाटक के प्रशिक्षु ताल सलोने, सरयू नदी, तमसा नदी के किनारे जिंदगी की व्यथा को प्रस्तुत कर रहे हैं। सुबह के सत्र में सैकड़ों विद्यार्थियों ने पुस्तक प्रदर्शनी में हिस्सा लिया। नाट्य लेखन कार्यशाला की शिविर निदेशक रीता रंजन ने बताया कि कल कार्यशाला में नदी और जीवन के रिश्ते को संबोधित गीतों को स्वर दिया जाएगा। पुस्तक मेले में पहुंची नवनियुक्त नगरपालिका अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव ने कहा कि पति का सपना रबरा करूंगी।
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मेले में इन किताबों की रही ज्यादा मांग
कोणार्क, रागदरवारी, रश्मिरथी, छप्पर, गुनाहों का देवता, मधुशाला, समय से संवाद, दिवाने गालिब, डिक्सनरी, ग्रामर बुक, कुछ नीति कुछ राजनीति, हर रास्ता गंगा की ओर, गोदान आदि
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उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षकों का यह दायित्व है कि अपने समय की समस्याओं से रूबरू कराये और राष्ट्र के गौरवशाली परंपरा से भी जोड़े। उन्होंने कहा हमारे पाठ्यक्रम में प्रकृति के साथ जीने की आदत पर रचित साहित्य को हिस्सा बनाना होगा। राज्य सभा टीवी के एंकर एवं प्रसिद्ध पत्रकार सैयद इरफान ने कहा कि शिक्षक की नजरों में तिरस्कार और प्रोत्साहन दोनों छुपा होता है। ऐसे में शिक्षक ही न्यायाधीश है कि किन क्षणों में विद्यार्थियों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पाठ्यक्रम कई बार समकालीन प्रश्नों से अछूते होते हैं। ऐेसे में शिक्षक का दायित्व है कि वह अपने समय के प्रश्नों से विद्यार्थियों का साक्षात्कार कराये। उन्होंने कहा कि शिक्षक की भाषा मनुष्यता के निर्माण का पहला अध्याय है। मुुरादाबाद से आये प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डा. राकेश चक्र ने कहा कि बचपन में किताबें संस्कारों का बीजारोपण करती हैं और साहित्य सपने का मूर्त करता है। नेशनल बुक ट्रस्ट के कार्यक्रम अधिकारी श्री आमिर जिलानी ने कहा कि शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यशाला में शिक्षक की भाषा विषय के माध्यम से यह प्रयास किया गया कि शिक्षक समकालीन साहित्य से जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय कार्याशाला के माध्यम से आजमगढ़ जनपद के 1000 शिक्षण संस्थाओं में पाठक मंच की स्थापना का उद्देयय है। प्रत्येक पाठक मंच को 500 रूपये की पुस्तक नि:शुल्क वितरित की जायेगी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृतिकर्मी राजीव रंजन ने कहा कि शिक्षक आत्मा के निर्माण का अभियंता है। शिक्षक गलत और सही का दृष्टि देता है। आज परस्पर सड़क दुर्घटना और जलवायु परिवर्तन के खतरों से भयभीत है। ऐसे में शिक्षक का यह दायित्व है कि वह समाज को स्वस्थ बनाने के अभियान का सहयात्री बने। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मौलाना उमैर सिद्दीक नदवी ने कहा कि शिब्ली एकेडमी पुस्तक संस्कृति के उन्नयन का एक बड़ा मंच है। पुस्तक मेले के माध्यम से सभी भाषाओं के शिक्षकों का एक सभा में एकत्र होना सामाजिक समरसता का प्रमाण है। कार्यक्रम में आए हुए लोगों का स्वागत करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के एके दीक्षित और वी.के. सिंह ने कहा कि रविवार को भी सुबह 10 बजे जनपद के प्रत्येक प्राथमिक, जूनियर, माध्यमिक, इंटर कालेज के शिक्षक सक्रिय हिस्सेदारी करेंगें। जिला विद्यालय निरीक्षक वीके शर्मा ने बताया कि रविवार को ललित कला विभाग काशी विद्यापीठ की विभागाध्यक्ष प्रो.मंजुला चतुर्वेदी, ललित कला विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डा.जेटली, हिन्दी विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. सूर्य नारायण एवं साहित्यकार जगदीश चन्द्र वर्नवाल कुन्द शिविर में विशेषज्ञ के रूप में हिस्सा लेगें। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए शिब्ली पीजी कालेज के प्राचार्य गयास असद खान ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों और शिक्षकों को ज्ञान की नयी धारा से जोडने का प्रयास है।
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परंपराशील नाट्य स्रोतों के प्रवर्तक एवं साहित्य निर्माता श्री जगदीश चन्द्र माथुर की स्मृति को समर्पित आजमगढ़ पुस्तक मेले में सात दिवसीय नाट्य लेखन शिविर में आजमगढ़ के जल स्रोतों को लेखन का आधार बनाया जा रहा है। नाटक के प्रशिक्षु ताल सलोने, सरयू नदी, तमसा नदी के किनारे जिंदगी की व्यथा को प्रस्तुत कर रहे हैं। सुबह के सत्र में सैकड़ों विद्यार्थियों ने पुस्तक प्रदर्शनी में हिस्सा लिया। नाट्य लेखन कार्यशाला की शिविर निदेशक रीता रंजन ने बताया कि कल कार्यशाला में नदी और जीवन के रिश्ते को संबोधित गीतों को स्वर दिया जाएगा। पुस्तक मेले में पहुंची नवनियुक्त नगरपालिका अध्यक्ष शीला श्रीवास्तव ने कहा कि पति का सपना रबरा करूंगी।
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मेले में इन किताबों की रही ज्यादा मांग
कोणार्क, रागदरवारी, रश्मिरथी, छप्पर, गुनाहों का देवता, मधुशाला, समय से संवाद, दिवाने गालिब, डिक्सनरी, ग्रामर बुक, कुछ नीति कुछ राजनीति, हर रास्ता गंगा की ओर, गोदान आदि