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तीन हजार की मूर्तियों के दाम हुए पांच हजार
Updated Sun, 17 Sep 2017 11:51 PM IST
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रानी की सराय। दशहरा, दिपावली, छठ आदि पर्वों पर जगह-जगह स्थापित होने वाली मूर्तियां भी महंगाई की मार से अछूती नहीं हैं। इन मूर्तियों के दामों में भी भारी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। मूर्ति बनाने वाले कलाकारों की मानें तो मूर्ति बनाने में प्रयुक्त होने वाले सामानों के दामों में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है।
जनपद के रानी की सराय कस्बे में बंगाल से मूर्ति का निर्माण करने के लिए कलाकार आते हैं। जो वर्ष के आठ महीने यहां रहकर मूर्ति का निर्माण करते हैं। पहले सिर्फ एक ही कलाकार आते थे। अब 12-13 की संख्या में कलाकार कस्बे में रहकर मूर्ति बना रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के दौर में हर मूर्तिकार अपनी मूर्ति केे आकर्षक बनाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। मूर्ति बनाने वाले कलाकार दशहरे में दुर्गा मां, दीवाली में लक्ष्मी गणेश आदि की प्रतिमाएं बनाते हैं। मूर्ति कलाकार जून से लेकर होली तक विभिन्न क्षेत्रों में मेलों में मूर्तिया का निर्माण करते है। कस्बे से जिले के अलावा गाजीपुर, मऊ आदि जनपदों में मूर्तियों को बेचा जाता है। मूर्तियों के निर्माण में पुआल, बांस, सुतली, लकड़ी, मिट्टी, कपड़ा और कच्चा रंग का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में बाजार में मिलने वाले इन सामानों के दाम काफी बढ़ गए हैं। कलाकारों की मानें तो जो मूर्तियां पिछले वर्ष तीन हजार सेट में जाती थी अब वह पांच से छह हजार में जा रही हैं। मिट्टी के दाम प्रति ट्राली चार सौ रुपये था लेकिन खनन पर रोक लगने के कारण अब यह 800 रुपये ट्राली मिल रही है। वहीं कच्चा रंग, कपड़ा, बांस आदि के दामों में बढ़ोतरी हुई है। कस्बे में बी पाल, धानू पाल, एस पाल आदि बंगाल के कलाकारों द्वारा मूर्ति का निर्माण किया जाता है।
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जनपद के रानी की सराय कस्बे में बंगाल से मूर्ति का निर्माण करने के लिए कलाकार आते हैं। जो वर्ष के आठ महीने यहां रहकर मूर्ति का निर्माण करते हैं। पहले सिर्फ एक ही कलाकार आते थे। अब 12-13 की संख्या में कलाकार कस्बे में रहकर मूर्ति बना रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के दौर में हर मूर्तिकार अपनी मूर्ति केे आकर्षक बनाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। मूर्ति बनाने वाले कलाकार दशहरे में दुर्गा मां, दीवाली में लक्ष्मी गणेश आदि की प्रतिमाएं बनाते हैं। मूर्ति कलाकार जून से लेकर होली तक विभिन्न क्षेत्रों में मेलों में मूर्तिया का निर्माण करते है। कस्बे से जिले के अलावा गाजीपुर, मऊ आदि जनपदों में मूर्तियों को बेचा जाता है। मूर्तियों के निर्माण में पुआल, बांस, सुतली, लकड़ी, मिट्टी, कपड़ा और कच्चा रंग का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में बाजार में मिलने वाले इन सामानों के दाम काफी बढ़ गए हैं। कलाकारों की मानें तो जो मूर्तियां पिछले वर्ष तीन हजार सेट में जाती थी अब वह पांच से छह हजार में जा रही हैं। मिट्टी के दाम प्रति ट्राली चार सौ रुपये था लेकिन खनन पर रोक लगने के कारण अब यह 800 रुपये ट्राली मिल रही है। वहीं कच्चा रंग, कपड़ा, बांस आदि के दामों में बढ़ोतरी हुई है। कस्बे में बी पाल, धानू पाल, एस पाल आदि बंगाल के कलाकारों द्वारा मूर्ति का निर्माण किया जाता है।
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