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तमसा की संभावित बाढ़ से शहर को बचाने के लिए मिले 99 लाख
Updated Tue, 22 May 2018 11:56 PM IST
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आजमगढ़।
शहर सुरक्षा बांध को काटकर बनाए गए गौरीशंकर घाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग और बाढ़ सुरक्षा के उपाय के लिए शासन ने बाढ़ खंड को 99 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से शहर को तमसा की संभावित बाढ़ से बचाने की कवायद की जाएगी।
शहर की जीवनदायिनी तमसा भले ही आज नाले का रूप धारण कर ली है, लेकिन कभी इस नदी के बाढ़ से पूरा शहर घिर गया था। 1955 में तमसा में आई बाढ़ से पूरा शहर जलमग्न हो गया था। वहीं, 1971-72 की बाढ़ भी शहर के लिए विकराल साबित हुई थी। इसी बाढ़ के बाद शहर को तीन तरफ से घेरे तमसा नदी के किनारे बंधे का निर्माण कराया गया। आज हालात यह है कि कई स्थानों पर शहर सुरक्षा बांध का भी अस्तित्व मिट चुका है। यदि तमसा में बाढ़ आ गई तो शहर को बचाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। शहर की सीमा बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए गौरीशंकरघाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग के लिए तो शहर सुरक्षा बांध को काफी चौड़ाई में काट दिया गया लेकिन इस स्थान पर तमसा के संभावित बाढ़ से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किया गया। अमर उजाला ने 19 मई के अंक में इस समस्या को ‘बांध को काटना शहर के लिए खतरनाक’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं, शासन ने इसे संज्ञान में लेते हुए गौरीशंकर घाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग और बाढ़ से सुरक्षा के उपाय के लिए 99 लाख की धनराशि बाढ़ खंड को जारी कर दिया है।
शासन से बाढ़ सुरक्षा के मद में पैसे के आवंटन की अभी जानकारी नहीं है। फिर भी बरसात का मौसम शुरू होने के पूर्व ही बाढ़ से सुरक्षा के उपाय कराना शुरू कर दिया जाएगा। जो पैसा शासन भेज रहा है, उससे शहर सुरक्षा बांध की स्थिति में सुधार लाने की कवायद की जाएगी। जहां कहीं भी बांध कट गया है, वहा जरूरत के अनुरूप मिट्टी और बोरी का काम कराया जाएगा। - कृष्ण कुमार, एई, बाढ़ खंड, आजमगढ़
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शहर सुरक्षा बांध को काटकर बनाए गए गौरीशंकर घाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग और बाढ़ सुरक्षा के उपाय के लिए शासन ने बाढ़ खंड को 99 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इस धनराशि से शहर को तमसा की संभावित बाढ़ से बचाने की कवायद की जाएगी।
शहर की जीवनदायिनी तमसा भले ही आज नाले का रूप धारण कर ली है, लेकिन कभी इस नदी के बाढ़ से पूरा शहर घिर गया था। 1955 में तमसा में आई बाढ़ से पूरा शहर जलमग्न हो गया था। वहीं, 1971-72 की बाढ़ भी शहर के लिए विकराल साबित हुई थी। इसी बाढ़ के बाद शहर को तीन तरफ से घेरे तमसा नदी के किनारे बंधे का निर्माण कराया गया। आज हालात यह है कि कई स्थानों पर शहर सुरक्षा बांध का भी अस्तित्व मिट चुका है। यदि तमसा में बाढ़ आ गई तो शहर को बचाना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जाएगा। शहर की सीमा बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए गौरीशंकरघाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग के लिए तो शहर सुरक्षा बांध को काफी चौड़ाई में काट दिया गया लेकिन इस स्थान पर तमसा के संभावित बाढ़ से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किया गया। अमर उजाला ने 19 मई के अंक में इस समस्या को ‘बांध को काटना शहर के लिए खतरनाक’ शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। वहीं, शासन ने इसे संज्ञान में लेते हुए गौरीशंकर घाट-हथिया पुल के संपर्क मार्ग और बाढ़ से सुरक्षा के उपाय के लिए 99 लाख की धनराशि बाढ़ खंड को जारी कर दिया है।
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शासन से बाढ़ सुरक्षा के मद में पैसे के आवंटन की अभी जानकारी नहीं है। फिर भी बरसात का मौसम शुरू होने के पूर्व ही बाढ़ से सुरक्षा के उपाय कराना शुरू कर दिया जाएगा। जो पैसा शासन भेज रहा है, उससे शहर सुरक्षा बांध की स्थिति में सुधार लाने की कवायद की जाएगी। जहां कहीं भी बांध कट गया है, वहा जरूरत के अनुरूप मिट्टी और बोरी का काम कराया जाएगा। - कृष्ण कुमार, एई, बाढ़ खंड, आजमगढ़
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