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अनुदान का इंतजार कर रहे मदरसा प्रबंधकों में जगी आस
Updated Sat, 17 Feb 2018 12:16 AM IST
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अमिलो। अरबी फारसी मदरसों के आधुनिकीकरण और अनुदान के लिए प्रदेश सरकार ने करोड़ों रूपये का बजट क्या दिया मदरसा प्रबंधकों और शिक्षकों में हर्ष व्याप्त हो गया है। उन्हें आशा है कि इस बजट से शिक्षकों का वर्षों से रूका मानदेय मिलेगा। प्रबंधकों को आशा है कि वर्षों की अनुदान की फाइल जो धूल फांक रही है वह आगे बढ़ेगी।
मदरसा अजीजिया नासिरूल ओलूम के प्रबंधक शकील अहमद अंसारी का कहना है कि प्रदेश सरकार आलिया स्तर के मान्यता प्राप्त मदरसों पर मेहरबान दिख रही है। यह बजट आशा की किरन लेकर आया है। शायद जो मदरसे अनुदान की फाइल लगा कर प्रतीक्षा कर रहे हैं उन्हें इस बजट का लाभ मिले। अगर ऐसा होता है तो मदरसों का निश्चित रूप से भला होगा।
नूरूल इस्लाम शिक्षण संस्थान खालिसपुर में तैनात आधुनिक मदरसा शिक्षक रामसमुझ यादव ने कहा कि आधुनिक शिक्षकों को वर्षों से मानदेय नहीं मिला है। केंद्र का अंश एमए योग्यताधारी शिक्षकों को 12 हजार रूपये और राज्य का अंश तीन हजार रूपये मिलता है। जो पिछले पांच वर्षों से नहीं मिला है। इस बजट से आधुनिक शिक्षकों में एक आशा की किरन फूटी है कि उनके बकाया मानदेय का भुगतान होऊगा।
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मदरसा गौसिया अशरफिया सालारपुर मुबारकपुर के आधुनिक शिक्षक अनीस अहमद अंसारी ने बताया कि बजट में प्रावधान तो हुआ है लेकिन पोर्टल लाक के बाद की प्रक्रिया डिजीटल सिग्नेचर द्वारा लाक करना है। जो काफी धीमी गति से चल रहा है। मदरसा की मान्यता पहली मिली और प्लेज मान्यता मिलने के 20 दिन बाद जमा हुआ जिसके कारण डिजीटल सिग्नेचर लाक में कठिनाई आ रही है। जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होगी तब तक बजट आने का हम आधुनिक शिक्षकों को लाभ नहीं मिल पाएगा।
आधुनिक शिक्षक नूरूल इस्लाम ने कहा कि बजट से मदरसों का भला हो सकता है और जो बकाया राज्यांश और केंद्रांश है शायद अब इसका भुगतान हो जाए। इसका भुगतान होने से विगत पांच वर्षों से मानदेय न मिलने से मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे शिक्षकों को फायदा होगा।
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मदरसा अजीजिया नासिरूल ओलूम के प्रबंधक शकील अहमद अंसारी का कहना है कि प्रदेश सरकार आलिया स्तर के मान्यता प्राप्त मदरसों पर मेहरबान दिख रही है। यह बजट आशा की किरन लेकर आया है। शायद जो मदरसे अनुदान की फाइल लगा कर प्रतीक्षा कर रहे हैं उन्हें इस बजट का लाभ मिले। अगर ऐसा होता है तो मदरसों का निश्चित रूप से भला होगा।
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नूरूल इस्लाम शिक्षण संस्थान खालिसपुर में तैनात आधुनिक मदरसा शिक्षक रामसमुझ यादव ने कहा कि आधुनिक शिक्षकों को वर्षों से मानदेय नहीं मिला है। केंद्र का अंश एमए योग्यताधारी शिक्षकों को 12 हजार रूपये और राज्य का अंश तीन हजार रूपये मिलता है। जो पिछले पांच वर्षों से नहीं मिला है। इस बजट से आधुनिक शिक्षकों में एक आशा की किरन फूटी है कि उनके बकाया मानदेय का भुगतान होऊगा।
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मदरसा गौसिया अशरफिया सालारपुर मुबारकपुर के आधुनिक शिक्षक अनीस अहमद अंसारी ने बताया कि बजट में प्रावधान तो हुआ है लेकिन पोर्टल लाक के बाद की प्रक्रिया डिजीटल सिग्नेचर द्वारा लाक करना है। जो काफी धीमी गति से चल रहा है। मदरसा की मान्यता पहली मिली और प्लेज मान्यता मिलने के 20 दिन बाद जमा हुआ जिसके कारण डिजीटल सिग्नेचर लाक में कठिनाई आ रही है। जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होगी तब तक बजट आने का हम आधुनिक शिक्षकों को लाभ नहीं मिल पाएगा।
आधुनिक शिक्षक नूरूल इस्लाम ने कहा कि बजट से मदरसों का भला हो सकता है और जो बकाया राज्यांश और केंद्रांश है शायद अब इसका भुगतान हो जाए। इसका भुगतान होने से विगत पांच वर्षों से मानदेय न मिलने से मुफलिसी की जिंदगी गुजार रहे शिक्षकों को फायदा होगा।