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अब पथ विक्रेताओं का भी होगा पंजीकरण, जारी होगा प्रमाण पत्र
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:21 AM IST
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आजमगढ़। सड़कों के किनारे फुटपाथ पर दूकान लगाने वाले फुटपाथ विक्रेताओं को अक्सर सड़क के किनारे से प्रशासन द्वारा हटा दिया जाता था। लेकिन प्रदेश सरकार ने अब इन फुटपाथ विक्रेताओं का पंजीकरण कर प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश जारी किया गया है। इसके लिए शासन द्वारा उप्र पथ विक्रेता नियमावली 2017 का गठन किया गया।
शासन के इस निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा जनपद की दोनों नगर पालिकाओं और 11 नगर पंचायतें जिस उपजिलाधिकारी के अधीन आती हैं उन्हें पत्र जारी कर दिया गया है। इस नियमावली के तहत पथ विक्रेताओं के अधिकारों का संरक्षण करने और पथ विक्रय क्रिया कलापों का विनिमय करने की दृष्टि से बनाई गई है। इस नियमावली में नगर पथ विक्रय समिति का गठन होगा। पथ विक्रेताओं के मध्य निर्वाचन की रीति, नगर पथ विक्रय समिति के कृत्य, समिति की बैठक, गणपूर्ति, बैठक में विनिश्चय, कार्यालय स्थल कर्मचारी वर्ग और सचिव का उपबंधन किया जाना, उप समितियां सर्वेक्षण, पथ विक्रेताओं का पंजीकरण, पथ विक्रय का प्रमाण प्रमाण पत्र जारी किया जाना है। इसके साथ ही विक्रय परिक्षेत्रों का सीमांकन, नए पथ विक्रय बाजार बनाने का उपबंध, पथ विक्रय प्रमाण पत्र का निरस्तीकरण या निलंबन, पथ विक्रेता का दायित्व, पुर्नस्थापना, बेदखली, वस्तुओं का अधिग्रहण और वापस किया जाना, उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं, विनिश्चय के विरुद्घ अपील, शिकायतों का निस्तारण, विवादों के समाधान की रीति, अनुश्रवण और विभिन्न स्तर पर नियंत्रण के साथ पर्यवेक्षण की व्यवस्था की गई है। बताते चलें कि प्रदेश सरकार ने फुटपाथ विक्रेताओं के लिए लाइसेंस जारी करने की बात कही थी ताकि इनके सामने आने वाली समस्याएं दूर हो सकें।
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शासन के इस निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा जनपद की दोनों नगर पालिकाओं और 11 नगर पंचायतें जिस उपजिलाधिकारी के अधीन आती हैं उन्हें पत्र जारी कर दिया गया है। इस नियमावली के तहत पथ विक्रेताओं के अधिकारों का संरक्षण करने और पथ विक्रय क्रिया कलापों का विनिमय करने की दृष्टि से बनाई गई है। इस नियमावली में नगर पथ विक्रय समिति का गठन होगा। पथ विक्रेताओं के मध्य निर्वाचन की रीति, नगर पथ विक्रय समिति के कृत्य, समिति की बैठक, गणपूर्ति, बैठक में विनिश्चय, कार्यालय स्थल कर्मचारी वर्ग और सचिव का उपबंधन किया जाना, उप समितियां सर्वेक्षण, पथ विक्रेताओं का पंजीकरण, पथ विक्रय का प्रमाण प्रमाण पत्र जारी किया जाना है। इसके साथ ही विक्रय परिक्षेत्रों का सीमांकन, नए पथ विक्रय बाजार बनाने का उपबंध, पथ विक्रय प्रमाण पत्र का निरस्तीकरण या निलंबन, पथ विक्रेता का दायित्व, पुर्नस्थापना, बेदखली, वस्तुओं का अधिग्रहण और वापस किया जाना, उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं, विनिश्चय के विरुद्घ अपील, शिकायतों का निस्तारण, विवादों के समाधान की रीति, अनुश्रवण और विभिन्न स्तर पर नियंत्रण के साथ पर्यवेक्षण की व्यवस्था की गई है। बताते चलें कि प्रदेश सरकार ने फुटपाथ विक्रेताओं के लिए लाइसेंस जारी करने की बात कही थी ताकि इनके सामने आने वाली समस्याएं दूर हो सकें।
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