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जेल की अव्यवस्था दूर नहीं हुई तो गंभीर होंगे परिणाम
Updated Fri, 02 Feb 2018 11:28 PM IST
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आजमगढ़। अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत से जेल के भीतर तमाम अव्यवस्थाएं व्याप्त हैं। यदि समय रहते जेल के भीतर की अव्यवस्थाओं को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में इसके और गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
जेल के अस्पताल में निरुद्ध बंदियों में ज्यादातर पुलिस की गोली से घायल होने वाले भर्ती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जेल को उपलब्ध कराया गया एक्सरे मशीन और मैटल डिटेक्टर खराब पड़े हैं। ऐसा ही कुछ हाल सीसीटीवी कैमरों का भी है। जेल के बैरक नंबर एक, दो, तीन और पांच में बंदियों की संख्या अधिक होने की वजह से यहां मादक पदार्थों का सेवन अधिक होता है। चेकिंग के दौरान इसी बैरकों से ही गांजा, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा आदि बरामद होता है। जेल सूत्रों की मानें तो कुछ बंदी रक्षकों की मिलीभगत से भीतर पांच सौ रुपये में सादा और एक हजार रुपये प्रतिमाह की दर से इंटरनेट की मोबाइल उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा कुख्यात अपराधियों को बैरक नंबर सात और आठ में रखा जाता है। इस बैरक में निरुद्ध अपराधी अपने गिरोह या परिचितों को रखने के लिए बंदी रक्षकों को आठ सौ से एक हजार रुपये देकर उन्हें अपनी बैरक में शिफ्ट करा लेते हैं। जेल के भीतर की उजागर हुई खामियों की रिपोर्ट अधिकारी द्वारा शासन को भेजा जाता है, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ जाता है। इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि जहां 22 जनवरी की रात बंदी रक्षक मानसिंह यादव को बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी। वहीं लापरवाही के चलते ही गुरुवार की देर शाम को बंदी फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।
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जेल के अस्पताल में निरुद्ध बंदियों में ज्यादातर पुलिस की गोली से घायल होने वाले भर्ती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जेल को उपलब्ध कराया गया एक्सरे मशीन और मैटल डिटेक्टर खराब पड़े हैं। ऐसा ही कुछ हाल सीसीटीवी कैमरों का भी है। जेल के बैरक नंबर एक, दो, तीन और पांच में बंदियों की संख्या अधिक होने की वजह से यहां मादक पदार्थों का सेवन अधिक होता है। चेकिंग के दौरान इसी बैरकों से ही गांजा, सिगरेट, तंबाकू, गुटखा आदि बरामद होता है। जेल सूत्रों की मानें तो कुछ बंदी रक्षकों की मिलीभगत से भीतर पांच सौ रुपये में सादा और एक हजार रुपये प्रतिमाह की दर से इंटरनेट की मोबाइल उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा कुख्यात अपराधियों को बैरक नंबर सात और आठ में रखा जाता है। इस बैरक में निरुद्ध अपराधी अपने गिरोह या परिचितों को रखने के लिए बंदी रक्षकों को आठ सौ से एक हजार रुपये देकर उन्हें अपनी बैरक में शिफ्ट करा लेते हैं। जेल के भीतर की उजागर हुई खामियों की रिपोर्ट अधिकारी द्वारा शासन को भेजा जाता है, लेकिन बाद में मामला ठंडा पड़ जाता है। इसी लापरवाही का परिणाम रहा कि जहां 22 जनवरी की रात बंदी रक्षक मानसिंह यादव को बाइक सवार बदमाशों ने गोली मार दी। वहीं लापरवाही के चलते ही गुरुवार की देर शाम को बंदी फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।
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