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निर्धारित समय में जनपद का ओडीएफ होना मुश्किल

Mon, 01 Jan 2018 11:37 PM IST
Updated Mon, 01 Jan 2018 11:37 PM IST
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निर्धारित समय में जनपद का ओडीएफ होना मुश्किल
आजमगढ़। केंद्र सरकार द्वारा दो अक्टूबर 2018 तक पूरे देश को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन अपने जनपद में गांवों को ओडीएफ घोषित करने की जो प्रगति है उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि जनपद निर्धारित समय में ओडीएफ हो सकेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को दो अक्टूबर 2018 तक ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 2015 में हुई घोषणा के बाद जहां प्रदेश के पश्चिमांचल में इस योजना पर काम हुआ वहीं अपने जनपद में इस योजना को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई रूचि नहीं दिखाई। जिसका परिणाम है कि जनपद आज भी इस मामले में अन्य जनपदों से पीछे है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद इसमें तेजी आई जरूर लेकिन यह तेजी इतनी नहीं है कि निर्धारित समय में पूरे जनपद को ओडीएफ कर सके।
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जनपद में कुल राजस्व गांवों की संख्या 3267 है। विभागीय आंकड़ों की मानें तो अब तक 92 गांवों को ही ओडीएफ किया जा सका है। एक हफ्ते में 10 और गांवों के ओडीएफ होने की संभावना है। दिसंबर माह में 15 गांव ही ओडीएफ हो सके। इस प्रकार अगर देखें तो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समयावधि में 10 माह का समय शेष है। अगर एक माह में विभाग 15 गांवों को ओडीएफ करता है तो वह निर्धारित अवधि में केवल 150 राजस्व गांवों को ही ओडीएफ कर सकता है। हाल ही में जिले के नोडल अधिकारी आलोक कुमार प्रथम ने शौचालय निर्माण की धीमी प्रगति पर असंतोष जताया था। उन्होंने 30 हजार शौचालय का पैसा जारी होने के बाद सिर्फ 15 हजार शौचालयों की जीयो टैगिंग होने पर विभाग को फटकार भी लगाई थी। हालांकि जिले में शौचालय निर्माण में तेजी आई है लेकिन इतनी तेजी नहीं आई कि निर्धारित समय पर काम को पूरा कर सके।
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जिले में पूर्व में इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ था। जिसके कारण जीरो से कार्य को करना पड़ रहा है। लोगों में शौचालय के प्रति जागरूकता की कमी भी बाधक बन रही है। लेकिन लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
जितेंद्र नाथ मिश्र, डीपीआरओ।
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