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पुरुषों से ज्यादा महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:27 PM IST
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अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत शुक्रवार को नगर के मड़या स्थित डा. बीजे बनर्जी के आवास पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें महिलाओं ने ‘भ्रूण हत्या रोकने में महिलाओं की भूमिका’ पर खुलकर अपनी बात रखी और पुरुषों से ज्यादा महिलाओं को ही महिलाओं का दुश्मन बताया। कार्यक्रम की शुरुआत महिला मंडल की पूनम सिंह ने संवाद के विषय की जानकारी देते हुए की। संवाद में महिलाओं ने भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, दुष्कर्म, छेड़खानी और महिला अशिक्षा पर अपनी बातें रखीं। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने समाज में इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं के लिए पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को ही दोषी माना। उनका कहना था कि यदि महिलाएं अपने निर्णय पर अडिग हो तो इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। आज दहेज के कारण लोगों बेटियों को पैदा करने से डरते हैं।
हर कोई पुत्र की चाह रखता है। पुरुष प्रधान समाज में हम सारा दोष पुरुषों के सिर मढ़ देते हैं लेकिन अगर हम ध्यान दें तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन है क्योंकि यहीं महिलाएं ही सास, जेठानी या ननद होती है। इनके द्वारा ही अपनी बहु को प्रताड़ित किया जाता है। महिला सशक्तिकरण में सबसे बड़ी बाधा अशिक्षा है। महिलाओं ने कहा कि जिस प्रकार हम अपनी बेटियों को कपड़े पहनने के लिए टोकते रहते हैं उसी तरह से अगर हम अपने बेटों को शुरू से ही यह शिक्षा दें कि मुसीबत में घिरी लड़की की मदद करें न कि उसका फायदा उठाए तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगा सकते हैं। इसके लिए हमें अपने बच्चों में शुरू से ही अच्छे संस्कार का विकास करना होगा। हमें अपने बच्चों को इस बात के लिए भी प्रेरित करना होगा कि वह न दहेज लें और ना ही दहेज दें।
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हर कोई पुत्र की चाह रखता है। पुरुष प्रधान समाज में हम सारा दोष पुरुषों के सिर मढ़ देते हैं लेकिन अगर हम ध्यान दें तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि महिलाएं ही महिलाओं की दुश्मन है क्योंकि यहीं महिलाएं ही सास, जेठानी या ननद होती है। इनके द्वारा ही अपनी बहु को प्रताड़ित किया जाता है। महिला सशक्तिकरण में सबसे बड़ी बाधा अशिक्षा है। महिलाओं ने कहा कि जिस प्रकार हम अपनी बेटियों को कपड़े पहनने के लिए टोकते रहते हैं उसी तरह से अगर हम अपने बेटों को शुरू से ही यह शिक्षा दें कि मुसीबत में घिरी लड़की की मदद करें न कि उसका फायदा उठाए तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगा सकते हैं। इसके लिए हमें अपने बच्चों में शुरू से ही अच्छे संस्कार का विकास करना होगा। हमें अपने बच्चों को इस बात के लिए भी प्रेरित करना होगा कि वह न दहेज लें और ना ही दहेज दें।
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