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दूध और खोवा की बड़ी डिमांड, सक्रिय हुए मिलावटखोर

Mon, 26 Feb 2018 12:08 AM IST
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:08 AM IST
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दूध और खोवा की बड़ी डिमांड, सक्रिय हुए मिलावटखोर
आजमगढ़। फेस्टिवल सीजन में दूध और मावा (खोवा) की डिमांड बढ़ जाती है। होली पर मावा की मांग तीन गुनी से ज्यादा हो जाती है। ये बढ़ी हुई डिमांड मिलावटखोरों को भी सक्रिय कर देती है। होली पर मिठाई और गुझिया में भरने के लिए खोवा की मांग देखते हुए दुकानदार भी इसे डंप करने जुट गए। वहीं, खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्रवाई अभी कागजों में ही चल रहे हैं। पहले ही रोडवेज से काफी मात्रा में नकली खोवा पकड़ा जा चुका है।
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मिलावटी खावा से पेट दर्द, डायरिया, मरोड़, पेट में भारीपन, एसिडिटी और इनडाइजेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका ज्यादा मात्रा में सेवन करने से इंटरनल ऑर्गन्स पर भी बुरा असर पड़ सकता है। लिटमस पेपर, घटिया किस्म का सॉलिड मिल्क, टेलकम पाउडर, चूना, चॉक और सफेद केमिकल्स जैसी चीजों के मिलावट की बाते भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे मावे से बनी मिठाइयों से किडनी और लीवर पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। इतना ही नहीं, इससे कैंसर, फूड प्वाइजनिंग, वॉमिटिंग और डायरिया जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।मिठाई के व्यापार से जुड़े कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार से भी बाहर से काफी मात्रा में खोवा मंगाया गया है। गाजीपुर और कानपुर के व्यापारियों से डिमांड भी की जा चुकी है।
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ऐसे बनता है मिलावटी खोवा
सूंघने पर मिलावटी खोवा की खुशबू अजीब सी महसूस होती है, जबकि ओरिजिनल खोवा की महक सुखद होती है।
आजमगढ़। मिलावटी खोवा बनाने में दूध के पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। रिफाइंड और वेजीटेबल ऑयल मिलाया जाता है। रसायन, आलू, शकरकंदी का प्रयोग भी किया जाता है। वाशिंग पाउडर और चिकनाहट लाने के लिए रिफाइंड, मोबिल आयल एवं एसेंट पाउडर डाला जाता है। मिलावटखोर कई बार यूरिया के घोल में पाउडर और मोबिल डालकर भी सिंथेटिक दूध तैयार करते हैं। थोड़ा असली दूध मिलाकर लिटमस पेपर डाला जाता है। फिर इसी से नकली खोवा और पनीर तैयार किया जाता है।
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ऐसे करें पहचान
-यदि खोवा सफेद या हल्के पीले रंग का है तो वह मिलावटी हो सकता है।
-खोवा को हाथ से रगड़ने पर ओरिजिनल होने पर घी छोड़ता है। इसकी महक से असली-नकली की पहचान हो जाती है।
-चखकर देखने पर असली खोवा का स्वाद अच्छा लगता है, नकली होने पर यह कड़वा या अजीब स्वाद वाला लग सकता है।
-नकली खोवा आसानी से पानी में नहीं घुलता।


खाने से नुकसान:
-मिलावटी खोवा किडनी व लिवर को खराब कर सकता है। इसमें संक्रमण पैदा कर सकता है। इसके साथ ही सिर दर्द, पेट दर्द व त्वचा रोग हो सकते हैं। पेट खराब होने वा आंतों में संक्रमण होने की भी संभावना है।


नकली औक मिलावटी खोवा पर खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नजडर रखी जा रही है। आम लोग भी खोवा लेते समय उसे चखकर, सूंघकर व रगड़कर अवश्य देखें। यदि इसका रंग सफेद या पीला है और महक अजीब सी है तो मिलावटी हो सकता है। -डीके राय, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी


मिलावटी खोवा सीधे लीवर और किडनी पर प्रभाव डालता है। ज्वाइंडिस व आंतों में संक्रमण भी पैदा कर सकता है। उल्टी-दस्त, अपच व सिरदर्द का कारण बन सकता है। -डॉ. राजनाथ, वरिष्ठ फिजीशियन
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