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दूसरे दिन भी लगी आस्था की डुबकी
Updated Sun, 05 Nov 2017 11:42 PM IST
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मेजवां/अहरौला। फूलपुर तहसील मुख्यालय स्थित पवित्र दुर्वासा धाम स्थित तमसा-मंजूषा नदी के संगम में कार्तिक पूर्णिका मेले के आखिरी दिन रविवार को भी हजारों की संख्या में लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद मेले में जमकर खरीदारी की। मेले में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।
दुर्वासा धाम पर कार्तिक पूर्णिमा के मद्देनजर उमड़ा आस्था का सैलाब रविवार को भी जारी रहा। काफी संख्या में लोगों ने संगम में डुबकी लगाकर मंदिर में पूजा अर्चना की। रविवार को खजला, गृहस्थी, और काला जादू के टेंट हटाने शुरू हो गए थे। मौत का कुंआ लोगों के उत्सुकता का केंद्र बना था। दुर्वासा स्थित मेला केंद्र तक श्रद्धालु सरलता पूर्वक पहुंच सके, इसके दो स्थानों पर बैरियर लगाए गए थे। पहले बैरियर के पहले बड़े वाहनों को रोका गया। दूसरे बैरियर से दो पहिया वाहनों के प्रवेश वर्जित थे। इसके लगने से श्रद्धालुओं को भीड़ से निजात मिली। स्वयंसेवी संस्थाओं ने विकलांग लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का कार्य किया। दत्तात्रेय चंद्रमा के प्रमुख बलराम तिवारी ने बताया कि सेवादारों को परिचय पत्र जारी किया गया था। इससे लोगो को परेशानी का सामना न करना पड़े। मेला तक लोगों को पहुंचाने में डग्गामार वाहनो की चांदी रही। वाहन चालकों ने मनमाने ढंग से किराया उसूला। मेला में चार थानों की पुलिस लगाई गई थी। दुर्वासा के प्रधान रामकवल तिवारी ने दूरदराज से आए श्रद्वालुओं, पुलिस-प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं का आभार प्रकट किया।
मेले में हुई जमकर खरीदारी
अहरौला। दुर्वासा धाम पर लगे मेले में रविवार को भी महिलाओं ने गृहस्थी और पुरुषों ने खेती-किसानी के लिए खरीदारी की। बच्चे मनोरंजन और खिलौनों आदि खरीदने में मशगूल रहे। सबसे ज्यादा कमाई गन्ना बेचने वालों की रही। एक गन्ने की कीमत 15से 20 रुपये रही। मिलावटखोर भी रहे मेले में सक्रिय रहे।
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सुरक्षा व्यवस्था में रही कमी
अहरौला। श्रद्धालुओं को मेले के बाहर कई घंटों तक जाम के झाम को झेलना पड़ा। कई जगहों पर महिलाओं से छेड़छाड़ भी हुई। एक महिला की चेन भी कट गई। एसडीएम बागीश शुक्ला से मेला समिति के लोग सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की, तब जाकर कोतवाल मेले में पहुंचे। नेशनल क्राइम इंवेस्टीगेशन ब्यूरो के निदेशक शरद राय ने बताया की वे अपनी सात सदस्यों की टीम के साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे।
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दुर्वासा धाम पर कार्तिक पूर्णिमा के मद्देनजर उमड़ा आस्था का सैलाब रविवार को भी जारी रहा। काफी संख्या में लोगों ने संगम में डुबकी लगाकर मंदिर में पूजा अर्चना की। रविवार को खजला, गृहस्थी, और काला जादू के टेंट हटाने शुरू हो गए थे। मौत का कुंआ लोगों के उत्सुकता का केंद्र बना था। दुर्वासा स्थित मेला केंद्र तक श्रद्धालु सरलता पूर्वक पहुंच सके, इसके दो स्थानों पर बैरियर लगाए गए थे। पहले बैरियर के पहले बड़े वाहनों को रोका गया। दूसरे बैरियर से दो पहिया वाहनों के प्रवेश वर्जित थे। इसके लगने से श्रद्धालुओं को भीड़ से निजात मिली। स्वयंसेवी संस्थाओं ने विकलांग लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का कार्य किया। दत्तात्रेय चंद्रमा के प्रमुख बलराम तिवारी ने बताया कि सेवादारों को परिचय पत्र जारी किया गया था। इससे लोगो को परेशानी का सामना न करना पड़े। मेला तक लोगों को पहुंचाने में डग्गामार वाहनो की चांदी रही। वाहन चालकों ने मनमाने ढंग से किराया उसूला। मेला में चार थानों की पुलिस लगाई गई थी। दुर्वासा के प्रधान रामकवल तिवारी ने दूरदराज से आए श्रद्वालुओं, पुलिस-प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं का आभार प्रकट किया।
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मेले में हुई जमकर खरीदारी
अहरौला। दुर्वासा धाम पर लगे मेले में रविवार को भी महिलाओं ने गृहस्थी और पुरुषों ने खेती-किसानी के लिए खरीदारी की। बच्चे मनोरंजन और खिलौनों आदि खरीदने में मशगूल रहे। सबसे ज्यादा कमाई गन्ना बेचने वालों की रही। एक गन्ने की कीमत 15से 20 रुपये रही। मिलावटखोर भी रहे मेले में सक्रिय रहे।
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सुरक्षा व्यवस्था में रही कमी
अहरौला। श्रद्धालुओं को मेले के बाहर कई घंटों तक जाम के झाम को झेलना पड़ा। कई जगहों पर महिलाओं से छेड़छाड़ भी हुई। एक महिला की चेन भी कट गई। एसडीएम बागीश शुक्ला से मेला समिति के लोग सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की, तब जाकर कोतवाल मेले में पहुंचे। नेशनल क्राइम इंवेस्टीगेशन ब्यूरो के निदेशक शरद राय ने बताया की वे अपनी सात सदस्यों की टीम के साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखे हुए थे।