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बच्चे 25 शिक्षक दो, तीन की और तैनाती की तैयारी
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:16 PM IST
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आजमगढ़। पल्हनी विकास खंड के सुदईपुर स्थित कौशल्या बालिका जूनियर हाईस्कूल में दो सहायक अध्यापकों और एक प्रधानाध्यापक की नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन को लेकर रार शुरू हो गई है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की है।
अधिकारियों को भेजे पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में पहले से दो अध्यापक, एक चौकीदार और एक दाई की नियुक्ति है। यहां पर पंजीकृत बच्चों की संख्या 25 है लेकिन प्रतिदिन नौ से 10 की संख्या में ही बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में तीन और की नियुक्ति समझ से परे है। बच्चों की कम संख्या को लेकर हुई शिकायत की जांच डीआई द्वारा की गई थी। इसके बाद भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा नियुक्ति की अनुमति प्रदान करना न्याय संगत नहीं है।
जबकि लखनऊ में 14 विद्यालयों का वेतन और नियुक्ति अपर मुख्य सचिव द्वारा छात्र संख्या कम होने के आधार पर रोक दिया। इस विज्ञापन पर 29 नवंबर को साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थी पहुंचे तो विद्यालय की स्थिति जानने के बाद वह प्रबंधक से अपना पैसा मांगने लगे। पूछने पर पता चला कि पूर्व में उन लोगों से 15 से 20 लाख रुपये लिए जा चुके हैं। ग्रामीण और क्षेत्रवासी रामविनय यादव, तीर्थराज, कौशलेश, श्याम सुंदर, राजेश राम, मकबूल अहमद, सतीश राम, महामुनि, रामपति राम, ज्ञानू, करिया, बाढ़ू ने अधिकारियों से नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की है।
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शासनादेश के अनुसार जूनियर विद्यालय में चार सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक की जगह है। अगर वहां खाली है तो उसकी अनुमति देनी ही थी नहीं तो यह लोग हाईकोर्ट जाएंगे और जवाब हमें देना होगा। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी नहीं है।
देवेंद्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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अधिकारियों को भेजे पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में पहले से दो अध्यापक, एक चौकीदार और एक दाई की नियुक्ति है। यहां पर पंजीकृत बच्चों की संख्या 25 है लेकिन प्रतिदिन नौ से 10 की संख्या में ही बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। ऐसे में तीन और की नियुक्ति समझ से परे है। बच्चों की कम संख्या को लेकर हुई शिकायत की जांच डीआई द्वारा की गई थी। इसके बाद भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा नियुक्ति की अनुमति प्रदान करना न्याय संगत नहीं है।
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जबकि लखनऊ में 14 विद्यालयों का वेतन और नियुक्ति अपर मुख्य सचिव द्वारा छात्र संख्या कम होने के आधार पर रोक दिया। इस विज्ञापन पर 29 नवंबर को साक्षात्कार के लिए अभ्यर्थी पहुंचे तो विद्यालय की स्थिति जानने के बाद वह प्रबंधक से अपना पैसा मांगने लगे। पूछने पर पता चला कि पूर्व में उन लोगों से 15 से 20 लाख रुपये लिए जा चुके हैं। ग्रामीण और क्षेत्रवासी रामविनय यादव, तीर्थराज, कौशलेश, श्याम सुंदर, राजेश राम, मकबूल अहमद, सतीश राम, महामुनि, रामपति राम, ज्ञानू, करिया, बाढ़ू ने अधिकारियों से नियुक्ति के लिए निकले विज्ञापन को निरस्त करने की मांग की है।
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शासनादेश के अनुसार जूनियर विद्यालय में चार सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक की जगह है। अगर वहां खाली है तो उसकी अनुमति देनी ही थी नहीं तो यह लोग हाईकोर्ट जाएंगे और जवाब हमें देना होगा। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी नहीं है।
देवेंद्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।