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समाज कल्याण में पुराना है वेतन रोकने और जारी करने और खेल
Updated Fri, 26 Jan 2018 12:16 AM IST
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आजमगढ़। सोशल सेक्टर में 150 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाला समाज कल्याण विभाग अब समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन को लेकर सुर्खियों में हैं। हरिजन प्राथमिक पाठशाला लंगड़पुर के सात शिक्षकों को वेतन जारी करने के प्रमुख सचिव समाज कल्याण के आदेश को दो माह से ज्यादा समय से दबाकर बैठने वाले विभाग का ये खेल कोई नया नहीं है। शिक्षकों का वेतन रोकने-जारी करने के नाम पर धन उगाही करने, वेतन आयोग का लाभ और पदोन्नति के नाम पर वसूली का या खेल बहुत पुराना है। हरिजन प्राथमिक पाठशाला लंगड़पुर के सात शिक्षकों का वेतन अभी तक न जारी हो पाने के मामले में एक विभागीय लिपिक की संलिप्तता खुलकर सामने आ रही है।
100 से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति संदेह के घेरे में, नहीं होती जांच
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग से संचालित कुल 83 विद्यालयों में सौ से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति संदेह के घेरे में है, लेकिन इनकी जांच की जहमत नहीं उठाई गई। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से धन उगाही के लिए इनका वेतन रोकने और जारी करने का खेल चलता रहता है।
विभाग के 83 विद्यालयों में तैनात लगभग पांच सौ शिक्षकों में लगभग 100 की नियुक्ति संदेह के घेरे में होने का मामला कई बार विभागीय अधिकारियों के साथ ही जिलाधिकारी के सामने भी उठ चुका है। इसके बाद भी आज तक इसकी निष्पक्ष जांच करने की जहमत किसी भी अधिकारी ने नहीं उठाई। यदि मामले की शिकायत सीएम, कमिश्नर और जिलाधिकारी आदि से की जाती है तो शिकायत घूम फिरकर निस्तारण के लिए समाज कल्याण विभाग में ही आ जाती है। इसके बाद इसकी जांच का कोई प्रश्न ही नहीं रह जाता है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौका देखकर ऐसे शिक्षकों का वेतन रोक देते थे और बाद में जारी करने के नाम पर वसूली कर ली जाती थी। इसके साथ ही शिक्षकों को वेतन आयोग का लाभ दिलाने और पदोन्नति के नाम पर वसूली का या खेल चल रहा था। शिक्षक नेता हंसराज की माने तो ये खेल लंबे अरसे से जारी है। इसकी कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। नाम न छापने की शर्त पर विभागीय सूत्रों ने बताया कि विभाग से संचालित स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों पर रुपये लेकर नियुक्ति का खेल भी चल रहा था। पिछले दिनों विभाग के आफिस से एक प्रधानाध्यापक के बाइक को डिकी से लगभग तीन लाख रुपये गायब होने के मामले में चर्चा थी कि ये रुपये भी नियुक्ति के संबंध में देने के लिए लाए गए थे।
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वेतन रोकने में विभागीय कर्मचारी की भी मिलीभगत
लंगड़पुर स्थित हरिजन प्राइमरी पाठशाला के सात शिक्षकों का मामला प्रबंध समिति के विवाद में अटका था। इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी कि रिपोर्ट पर इन शिक्षकों का ग्रांट को शासन ने रोक दिया था। इसके विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट की शरण ले ली। कोर्ट ने सितंबर माह में विभाग को शिक्षकों तब से रुका लगभग डेढ़ करोड़ वेतन का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। शासन से जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश मिले, लेकिन वो दो माह तक मामले को दबाए बैठे रहे। वेतन जारी न करने के पीछे एक विभागीय बाबू का भी हाथ बताया जा रहा है। चर्चा है कि विद्यालय के दो गुट में एक को बाबू का संरक्षण प्राप्त था। इससे वेतन जारी किया जा सका था। बजट के प्रस्ताव आदि के फेर में मामले को लटकाया गया। पीड़ित पक्ष के अवमानना दाखिल करने पर अदालत ने प्रमुख सचिव को तलब कर लिया था। प्रमुख सचिव ने समाज कल्याण अधिकारी की मामले में लापरवाही मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर अपना अपना जवाब कोर्ट को सौंपा था।
मुद्दा उठाने पर रुका था वेतन
समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में फर्जी शिक्षकों की शिकायत की बार की गई है। हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक देवेंद्र सिंह, निजामाबाद के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय की शिक्षिका आशा देवी, हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक राजेश कुमार सिंह की शिकायत भी कई बार हुई, लेकिन समाज कल्याण अधिकारी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अमर उजाला की ओर से इसका मुद्दा उठाने पर कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद इनके वेतन पर रोक लगा दी गई थी।
प्रशिक्षण मुक्ति में भी हुआ था खेल
जिले में समाज कल्याण विभाग के 83 विद्यालय हैं। 1988 के बाद ये विद्यालय अनुदानिक होने से शुरू हुआ थे। उस समय इन स्कूलों में दसों साल से ऐसे शिक्षक कार्यरत थे जिनकी योग्यता आठवीं या दसवीं पास थी। आध्यापन में निपुण ऐसे शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र एजी बेसिक की ओर से दिए गए थे। विभागीय साठगांठ से कूटरचित प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र बनाकर भी कई शिक्षक बन गए। शिकायत में ऐसे प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र के गलत साबित होने पर भी समाज कल्याण विभाग की ओर से वेतन जारी किया जाता रहा। अमर उजाला के मुद्दा उठाने पर चार शिक्षकों का वेतन अभी भी रुका हुआ है।
समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन के आदेश अभी हमें नहीं मिले हैं। इससे मुझे पूरे मामले की जानकारी नहीं है। आदेश आने के बाद ही मामले में कुछ कह सकूंगा।
जितेंद्र सिंह, डीडी समाज कल्याण
100 से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति संदेह के घेरे में, नहीं होती जांच
आजमगढ़। समाज कल्याण विभाग से संचालित कुल 83 विद्यालयों में सौ से ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति संदेह के घेरे में है, लेकिन इनकी जांच की जहमत नहीं उठाई गई। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से धन उगाही के लिए इनका वेतन रोकने और जारी करने का खेल चलता रहता है।
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विभाग के 83 विद्यालयों में तैनात लगभग पांच सौ शिक्षकों में लगभग 100 की नियुक्ति संदेह के घेरे में होने का मामला कई बार विभागीय अधिकारियों के साथ ही जिलाधिकारी के सामने भी उठ चुका है। इसके बाद भी आज तक इसकी निष्पक्ष जांच करने की जहमत किसी भी अधिकारी ने नहीं उठाई। यदि मामले की शिकायत सीएम, कमिश्नर और जिलाधिकारी आदि से की जाती है तो शिकायत घूम फिरकर निस्तारण के लिए समाज कल्याण विभाग में ही आ जाती है। इसके बाद इसकी जांच का कोई प्रश्न ही नहीं रह जाता है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौका देखकर ऐसे शिक्षकों का वेतन रोक देते थे और बाद में जारी करने के नाम पर वसूली कर ली जाती थी। इसके साथ ही शिक्षकों को वेतन आयोग का लाभ दिलाने और पदोन्नति के नाम पर वसूली का या खेल चल रहा था। शिक्षक नेता हंसराज की माने तो ये खेल लंबे अरसे से जारी है। इसकी कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। नाम न छापने की शर्त पर विभागीय सूत्रों ने बताया कि विभाग से संचालित स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों पर रुपये लेकर नियुक्ति का खेल भी चल रहा था। पिछले दिनों विभाग के आफिस से एक प्रधानाध्यापक के बाइक को डिकी से लगभग तीन लाख रुपये गायब होने के मामले में चर्चा थी कि ये रुपये भी नियुक्ति के संबंध में देने के लिए लाए गए थे।
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वेतन रोकने में विभागीय कर्मचारी की भी मिलीभगत
लंगड़पुर स्थित हरिजन प्राइमरी पाठशाला के सात शिक्षकों का मामला प्रबंध समिति के विवाद में अटका था। इसके बाद समाज कल्याण अधिकारी कि रिपोर्ट पर इन शिक्षकों का ग्रांट को शासन ने रोक दिया था। इसके विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट की शरण ले ली। कोर्ट ने सितंबर माह में विभाग को शिक्षकों तब से रुका लगभग डेढ़ करोड़ वेतन का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। शासन से जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देश मिले, लेकिन वो दो माह तक मामले को दबाए बैठे रहे। वेतन जारी न करने के पीछे एक विभागीय बाबू का भी हाथ बताया जा रहा है। चर्चा है कि विद्यालय के दो गुट में एक को बाबू का संरक्षण प्राप्त था। इससे वेतन जारी किया जा सका था। बजट के प्रस्ताव आदि के फेर में मामले को लटकाया गया। पीड़ित पक्ष के अवमानना दाखिल करने पर अदालत ने प्रमुख सचिव को तलब कर लिया था। प्रमुख सचिव ने समाज कल्याण अधिकारी की मामले में लापरवाही मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर अपना अपना जवाब कोर्ट को सौंपा था।
मुद्दा उठाने पर रुका था वेतन
समाज कल्याण विभाग के स्कूलों में फर्जी शिक्षकों की शिकायत की बार की गई है। हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक देवेंद्र सिंह, निजामाबाद के वजीरमलपुर स्थित हरिजन कन्या प्राइमरी विद्यालय की शिक्षिका आशा देवी, हरिजन बाल विद्या मंदिर सैदपुर में तैनात सहायक अध्यापक राजेश कुमार सिंह की शिकायत भी कई बार हुई, लेकिन समाज कल्याण अधिकारी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। अमर उजाला की ओर से इसका मुद्दा उठाने पर कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद इनके वेतन पर रोक लगा दी गई थी।
प्रशिक्षण मुक्ति में भी हुआ था खेल
जिले में समाज कल्याण विभाग के 83 विद्यालय हैं। 1988 के बाद ये विद्यालय अनुदानिक होने से शुरू हुआ थे। उस समय इन स्कूलों में दसों साल से ऐसे शिक्षक कार्यरत थे जिनकी योग्यता आठवीं या दसवीं पास थी। आध्यापन में निपुण ऐसे शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र एजी बेसिक की ओर से दिए गए थे। विभागीय साठगांठ से कूटरचित प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र बनाकर भी कई शिक्षक बन गए। शिकायत में ऐसे प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र के गलत साबित होने पर भी समाज कल्याण विभाग की ओर से वेतन जारी किया जाता रहा। अमर उजाला के मुद्दा उठाने पर चार शिक्षकों का वेतन अभी भी रुका हुआ है।
समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन के आदेश अभी हमें नहीं मिले हैं। इससे मुझे पूरे मामले की जानकारी नहीं है। आदेश आने के बाद ही मामले में कुछ कह सकूंगा।
जितेंद्र सिंह, डीडी समाज कल्याण