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राजा होता है अपनी प्रजा के कृत्यों का जवाबदेह
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:58 PM IST
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आजमगढ़। नगर के वेस्ली इंटर कालेज परिसर में मानव जनहित सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा के तीसरे दिन नारद मोह का मंचन किया। कथा वाचक पंडित बाल व्यास कौशल किशोर जी महाराज ने नारद मोह के जरिए अहंकार से होने वाली हानियों को दृष्टिगोचर किया।
उन्होंने कहा कि मानव जीवन में अहंकार न आने पाए इससे सदैव बचना चाहिए। क्योंकि नारद मोह की कथा अहंकार आने पर किस तरह मनुष्य पश्चाताप की अग्नि में जलता है इसका बड़ा ही सटीक और मार्गदर्शी उदाहरण है। राजा अपने प्रजा के कृत्यों का जवाबदेह होता है और राजा के कृत्यों की प्रजा को दंड भोगना पड़ता है इसमें कोई संदेह नहीं है। इस धरा पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के अवतार लेने के अनेकों कारण हैं। रामजी विष्णु के अंशावतार है। जबकि लोग यह समझते हैं कि रामजी विष्णु के ही रूप हैं। तुलसी कृृत रामचरित मानस वह अदृभुत ग्रंथ है जो मानव को मानव बनाती है ओर सार्थक जीवन जीने की कला सिखाती है। आचार्य हरेंद्र पाठक के नेतृत्व में नित्य झांकी पूजन, व्यास पूजन और आरती का प्रस्तुतिकरण किया जा रहा है। इस मौके पर राय अनूप कुमार श्रीवास्तव, अरविंद चित्रांश, रामानंद शर्मा, गुलाब सेठ, जगदंबा श्रीवास्तव, सुभाषचंद्र श्रीवास्तव, दीनानाथ लाल, सुभाष तिवारी कुंदन, घनश्याम तिवारी आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि मानव जीवन में अहंकार न आने पाए इससे सदैव बचना चाहिए। क्योंकि नारद मोह की कथा अहंकार आने पर किस तरह मनुष्य पश्चाताप की अग्नि में जलता है इसका बड़ा ही सटीक और मार्गदर्शी उदाहरण है। राजा अपने प्रजा के कृत्यों का जवाबदेह होता है और राजा के कृत्यों की प्रजा को दंड भोगना पड़ता है इसमें कोई संदेह नहीं है। इस धरा पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के अवतार लेने के अनेकों कारण हैं। रामजी विष्णु के अंशावतार है। जबकि लोग यह समझते हैं कि रामजी विष्णु के ही रूप हैं। तुलसी कृृत रामचरित मानस वह अदृभुत ग्रंथ है जो मानव को मानव बनाती है ओर सार्थक जीवन जीने की कला सिखाती है। आचार्य हरेंद्र पाठक के नेतृत्व में नित्य झांकी पूजन, व्यास पूजन और आरती का प्रस्तुतिकरण किया जा रहा है। इस मौके पर राय अनूप कुमार श्रीवास्तव, अरविंद चित्रांश, रामानंद शर्मा, गुलाब सेठ, जगदंबा श्रीवास्तव, सुभाषचंद्र श्रीवास्तव, दीनानाथ लाल, सुभाष तिवारी कुंदन, घनश्याम तिवारी आदि उपस्थित थे।
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