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शहर से लेकर गांव तक फैला है लिपिक का साम्राज्य
Updated Fri, 06 Oct 2017 11:39 PM IST
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आजमगढ़। समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण और प्रोबेशन विभाग से संचालित कल्याणकारी योजनाओं के जरिए 62 लाख रुपये का गबन करने वाले गिरफ्तार प्रोबेशन विभाग के लिपिक का शहर से लेकर गांव तक साम्राज्य फैला हुआ है। उसने अपने, पत्नी और बच्चों के नाम अकूत संपत्ति बनाई है। गुरुवार को आरोपी का चालान करने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम शुक्रवार को उसके संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में जुट गई। अभी तक दो करोड़ से अधिक की प्रापर्टी की पहचान कर ली गई है। शेष की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है।
निजामाबाद तहसील क्षेत्र के रहने वाला सुभाष चंद्र पुत्र श्रीराम जिला प्रोबेशन कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनाती के समय जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों को न देकर स्वयं हड़प लिया। करीब 62 लाख रुपये गबन के मामले में उसके विरुद्ध सिधारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिसकी जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह को सौंपी गई थी। वर्तमान समय में सुभाष चंद्र किशोर न्यायालय बोर्ड मऊ में पेशकार के पद पर तैनात है। जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर बुधवार को पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसका चालान कर दिया गया। सुभाष का चालान करने के बाद पुलिस शुक्रवार को उसकी संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में जुट गई। इस दौरान पता चला कि सुभाष का शहर के अराजीबाग मुहल्ले में दस-दस बिस्वा का दो आलीशान इमारत है। इसमें से एक सुभाष के नाम का है, जबकि दूसरा उसकी पत्नी के नाम दर्ज है। इसके अलावा गांव में भी लाखों रुपये की लागत से बड़ी हवेली खड़ा किया है। डोनेशन के बल पर ही अपने बेटे को इंजीनियर बना लिया जो वर्तमान समय में कहीं नौकरी कर रहा है। शुक्रवार को हुई आय से अधिक संपत्ति की जांच में करीब दो करोड़ से अधिक के धनराशि की प्रापर्टी होना उजागर हुआ है। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र का अब तक दो करोड़ से अधिक के संपत्ति का ब्यौरा जुटा लिया गया है। शेष की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है। सूची तैयार होने के बाद वह प्रशासन को सौंप देंगे। बाद में सुभाष की बेनामी संपत्ति कुर्क की जाएगी। कुंवर वीपी सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र शहर कोतवाली और कप्तानगंज थाने से भी वांछित था।
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निजामाबाद तहसील क्षेत्र के रहने वाला सुभाष चंद्र पुत्र श्रीराम जिला प्रोबेशन कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनाती के समय जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों को न देकर स्वयं हड़प लिया। करीब 62 लाख रुपये गबन के मामले में उसके विरुद्ध सिधारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जिसकी जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह को सौंपी गई थी। वर्तमान समय में सुभाष चंद्र किशोर न्यायालय बोर्ड मऊ में पेशकार के पद पर तैनात है। जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर बुधवार को पुलिस ने सुभाष को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को उसका चालान कर दिया गया। सुभाष का चालान करने के बाद पुलिस शुक्रवार को उसकी संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में जुट गई। इस दौरान पता चला कि सुभाष का शहर के अराजीबाग मुहल्ले में दस-दस बिस्वा का दो आलीशान इमारत है। इसमें से एक सुभाष के नाम का है, जबकि दूसरा उसकी पत्नी के नाम दर्ज है। इसके अलावा गांव में भी लाखों रुपये की लागत से बड़ी हवेली खड़ा किया है। डोनेशन के बल पर ही अपने बेटे को इंजीनियर बना लिया जो वर्तमान समय में कहीं नौकरी कर रहा है। शुक्रवार को हुई आय से अधिक संपत्ति की जांच में करीब दो करोड़ से अधिक के धनराशि की प्रापर्टी होना उजागर हुआ है। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर कुंवर वीपी सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र का अब तक दो करोड़ से अधिक के संपत्ति का ब्यौरा जुटा लिया गया है। शेष की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है। सूची तैयार होने के बाद वह प्रशासन को सौंप देंगे। बाद में सुभाष की बेनामी संपत्ति कुर्क की जाएगी। कुंवर वीपी सिंह ने बताया कि सुभाष चंद्र शहर कोतवाली और कप्तानगंज थाने से भी वांछित था।
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