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जिला अस्पताल में फायर सिलेंडर तक नहीं, महिला अस्पताल में नहीं हुआ रीफिल
Updated Sun, 16 Jul 2017 11:31 PM IST
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आजमगढ़। लखनऊ स्थित केजीएमसी ट्रामा सेंटर में आग लगने से शिफ्टिंग के दौरान छह मरीजों की मौत हो गई। जांच के दौरान पाया गया कि अग्नि सुरक्षा के उपाय प्रभावी नहीं थे। यही हालत जिला अस्पतालों की भी है। जिला अस्पताल में तो फायर संयत्र है ही नहीं, वहीं महिला अस्पताल में एक्सपायरी फायर संयंत्र से अग्नि सुरक्षा की जा रही है। ऐसे में यदि हादसा हुआ तो हजारों लोगों की जान पर बन आएगी।
केजीएमसी में आग लगने का ये मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी कई बार यहां आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ताजा हालात बताते हैं कि पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया। हादसे के बाद पाया गया कि आग की घटना निबटने के लिए जो संयत्र लगे थो वो प्रभावी नहीं थे। सीएम ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। कमोबेश यही स्थिति हर जिले में हैं। बात जिला अस्पताल की ओर से करें तो यहां रोजाना लगभग 1400 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों के साथ लगभग तीन गुने तीमारदार भी होते हैं, जिनकी जिला अस्पताल में भीड़ लगी रहती है। यदि आग लगने की घटना होती है तो हजारों की भीड़ को बचाने के लिए यहां एक फायर सिलेंडर तक नहीं है। वहीं, महिला अस्पताल में 500 से 600 ओपीडी रोज होती है। अग्नि सुरक्षा के लिए एक सिलेंडर लगा भी है तो वो एक्सपायर हो चुका है। फायर सिलेंडर को एक साल में रीफिल कराना होता है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में लगा सिलेंडर इस सीमा को पार कर चुका है। ऐसी स्थिति आग लगने की कोई घटना होने पर दमकल विभाग ही सहारा है। यदि वो भी समय पर नहीं पहुंचती है तो जानमाल का नुकसान होना तय है।
संयत्र तो लगे, पाइप और टूल्स गायब
आमजगढ़। कलक्ट्रेट में तो फायर संयत्र सही है, लेकिन बात विकास भवन की करें तो पांच मंजिल के विकास भवन में आग की सुरक्षा के लिए तीन संयंत्र लगे हैं, लेकिन किसी में भी सामान पूरा नहीं है। सभी संयत्रों से पाइप और टूल्स गायब हैं। ये कहां रखे गए हैं, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है।
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अग्नि सुरक्षा प्लांट के लिए बजट बनाकर शासन को भेजा गया है। वहीं से अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसके तहत 20 हजार लीटर की टंकी बनेगी। पाइप से अस्पताल के कनेक्ट किया जाएगा।
डॉ. जीएल केशरवानी, सीएमएस जिला अस्पताल
आग की सुरक्षा के लिए एक फायर सिलेंडर लगाया गया है। उसकी रीफिल डेट निकलने की जानकारी नहीं हैं। यदि ऐसा है तो चेक कराया जाएगा।
डॉ. ममता अग्रवाल, सीएमएस महिला अस्पताल
फायर सिलेंडर को हर साल चेक कराने के बाद जरूरत के अनुसार रीफिल कराना होता है। नहीं तो वो कभी भी जरूरत पड़ने पर धोखा दे सकता है। एक साल में पाउडर में सीलन की समस्या आ जाती है।
सुभाष सिंह, सीएफओ
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केजीएमसी में आग लगने का ये मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी कई बार यहां आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। ताजा हालात बताते हैं कि पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया। हादसे के बाद पाया गया कि आग की घटना निबटने के लिए जो संयत्र लगे थो वो प्रभावी नहीं थे। सीएम ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। कमोबेश यही स्थिति हर जिले में हैं। बात जिला अस्पताल की ओर से करें तो यहां रोजाना लगभग 1400 से 1500 मरीजों की ओपीडी होती है। मरीजों के साथ लगभग तीन गुने तीमारदार भी होते हैं, जिनकी जिला अस्पताल में भीड़ लगी रहती है। यदि आग लगने की घटना होती है तो हजारों की भीड़ को बचाने के लिए यहां एक फायर सिलेंडर तक नहीं है। वहीं, महिला अस्पताल में 500 से 600 ओपीडी रोज होती है। अग्नि सुरक्षा के लिए एक सिलेंडर लगा भी है तो वो एक्सपायर हो चुका है। फायर सिलेंडर को एक साल में रीफिल कराना होता है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में लगा सिलेंडर इस सीमा को पार कर चुका है। ऐसी स्थिति आग लगने की कोई घटना होने पर दमकल विभाग ही सहारा है। यदि वो भी समय पर नहीं पहुंचती है तो जानमाल का नुकसान होना तय है।
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संयत्र तो लगे, पाइप और टूल्स गायब
आमजगढ़। कलक्ट्रेट में तो फायर संयत्र सही है, लेकिन बात विकास भवन की करें तो पांच मंजिल के विकास भवन में आग की सुरक्षा के लिए तीन संयंत्र लगे हैं, लेकिन किसी में भी सामान पूरा नहीं है। सभी संयत्रों से पाइप और टूल्स गायब हैं। ये कहां रखे गए हैं, इसके बारे में किसी को जानकारी नहीं है।
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अग्नि सुरक्षा प्लांट के लिए बजट बनाकर शासन को भेजा गया है। वहीं से अभी मंजूरी नहीं मिली है। इसके तहत 20 हजार लीटर की टंकी बनेगी। पाइप से अस्पताल के कनेक्ट किया जाएगा।
डॉ. जीएल केशरवानी, सीएमएस जिला अस्पताल
आग की सुरक्षा के लिए एक फायर सिलेंडर लगाया गया है। उसकी रीफिल डेट निकलने की जानकारी नहीं हैं। यदि ऐसा है तो चेक कराया जाएगा।
डॉ. ममता अग्रवाल, सीएमएस महिला अस्पताल
फायर सिलेंडर को हर साल चेक कराने के बाद जरूरत के अनुसार रीफिल कराना होता है। नहीं तो वो कभी भी जरूरत पड़ने पर धोखा दे सकता है। एक साल में पाउडर में सीलन की समस्या आ जाती है।
सुभाष सिंह, सीएफओ