लाटघाट। देवारांचल में घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जलस्तर में वृद्धि के साथ ही लोगों की परेशानी भी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही बढ़ रही बीमारियों ने भी लोगो को परेशान कर रहा है। फिर भी बीमार लोगों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। डॉक्टरों के तैनाती का दावा पूरी तरह से हवा-हवाई साबित हो रहा है। चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरे गांव के लोगों को अब पीने का पानी भी शुद्ध नहीं मिल रहा है। मजबूरी में लोग दुषित पानी पी रहे है। जिसके चलते अब क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां फैलने लगी है। सर्दी जुखाम, फोड़े-फुंसी के साथ ही वायर फीवर से कई दर्जन लोग बीमार पड़े हुए है और डॉक्टर की व्यवस्था न होने से इनका इलाज भी नहीं हो पा रहा है। परिजन झोलाछाप डॉक्टरो अथवा मेडिकल स्टोर से बीमारी बता कर दवा ला रहे है। स्वास्थ्य महकमा यह दावा कर रहा है कि स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती कर दी गई है। जिन्हें गांव-गांव पहुंच कर टीकाकरण व बीमार लोगों को दवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन वास्तविकता यह है कि गांव में जाना दूर बंधे पर बने बाढ़ चौकी पर भी डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं मिल रहे है। चक्की गांव में 11 वर्षीय लालू यादव, 6 वर्षीय आशीष, 9 वर्षीय आकाश, 6 वर्षीय धनंजय, 22 वर्षीया रीता, 14 वर्षीय गौरव, 55 वर्षीय रामकाल, 85 वर्षीया एकमली, 80 वर्षीय धन्नी, 78 वर्षीया सुखिया समेत कई लोग बीमार पड़े हुए है, जिनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।