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अनुदानित और हरिजन विद्यालयों में भ्रष्टाचार और गबन की जांच के लिए बनी कमेटी

Tue, 08 May 2018 11:36 PM IST
Updated Tue, 08 May 2018 11:36 PM IST
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अनुदानित और हरिजन विद्यालयों में भ्रष्टाचार और गबन की जांच के लिए बनी कमेटी
पिछले माह सगड़ी तहसील के सैदपुर स्थित अनुदानित पूर्व माध्यमिक विद्यालय और सैदपुर में ही समाज कल्याण विभाग से संचालित विद्यालय में भ्रष्टाचार, गबन, फर्जी नियुक्ति के मामले में नामित जांच अधिकारी ने मामले की जांच के लिए चार अधिकारियों की कमेटी का गठन कर दिया है। एसडीएम सगड़ी, एसओसी, बीएसए और समाज कल्याण अधिकारी को मामले की जांच सौंपी गई है।
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सामाजिक कार्यकर्ता अरुण सिंह ने 14 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री से जनसुनवाई में शिकायत की थी कि सगड़ी तहसील के शिक्षा क्षेत्रन महाराजगंज स्थित अनुदानित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गबन किया जा रहा है। विद्यालय में प्रबंध समिति के सदस्यों के अपने रिश्तेदारों की भर्ती कराने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही प्रधानाध्यापक, शिक्षिका और एक लिपिक की नियुक्ति को भी फर्जी बताया गया था। साथ ही विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी दिखाकर अध्यापकों की नियुक्ति करने का आरोप भी लगाया गया था।
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वहीं, सैदपुर में ही समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूल में फर्जी नियुक्ति करने फर्जी प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र से प्रशिक्षित वेतनमान जारी कराने और अन्य भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। बताया था कि पूर्व की जांच में पांच अध्यापकों के प्रशिक्षण मुक्ति प्रमाण-पत्र फर्जी साबित हो चुके हैं। इसके बाद भी आरोपियों पर एफआईआर और रिकवरी की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके साथ प्रबंधक पर विभागीय मिलीभगत से फर्जी नियुक्ति करने के आरोप लगे थे। विद्यालय में कार्यरत 11 शिक्षकों में नौ को फर्जी बताया गया था। इसमें एक अध्यापक देवेंद्र सिंह की डिग्री जांच में पहले ही फर्जी साबित हो चुकी है, लेकिन विभागीय मिलीभगत से अभी तक उस पर एफआईआर और रिकवरी की कार्रवाई नहीं हो सकी है। दोनों ही विद्यालय को एक ही परिसर में संचालित बताया गया है। इसके साथ ही प्रबंधक पर फर्जी तरीके से 50 एकड़ सरकारी जमीन कब्जाने का भी आरोप लगया था। मुख्यमंत्री के यहां से शिकायत के मुख्य राजस्व अधिकारी आलोक वर्मा को स्थानांतरित की गई थी। मुख्य राजस्व अधिकारी ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी में एसडीएम सगड़ी, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, बीएसए और समाज कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया है। सभी अधिकारियों को प्रत्येक बिंदु पर जांच कर 25 मई तक रिपोर्ट तलब की गई है।
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मुख्यमंत्री के यहां से शिकायत मुझे मार्क हुई थी। शिकायत में दो विद्यालयों में कई तरीके भ्रष्टाचार के साथ फर्जी नियुक्तियों के भी आरोप लगाए गए हैं। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। 25 मई तक रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- आलोक वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी
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