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अकीदत के साथ मनाया गया उर्स

Fri, 16 Feb 2018 12:17 AM IST
Updated Fri, 16 Feb 2018 12:17 AM IST
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अकीदत के साथ मनाया गया उर्स
आजमगढ़। नगर के दलालघाट स्थित मौलाना याकूब साहब का114वां उर्स बड़ी ही अकीदत के साथ अकीदतमंदों ने गुरुवार को मनाया। मजार पर चादर चढ़ाकर लोगों ने सलामती की दुआ मांगी।
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मजार के मोतवल्ली शकील अहमद और वसीम अहमद ने प्रात: छह बजे मजार पर कुरआनख्वानी कराई। दो बजे तकिया मुस्लिम मुसाफिर से कव्वाली के साथ चादर और गागर के साथ जुलूस निकाला गया। गागर,चादर का जुलूस कोट चौराहा, जालंधरी, टेढिय़ा मस्जिद, बाजबहादुर से राजा साहब किला होते मजार पर पहुंचा। जहां मजार पर चादरपोशी की गई। शकील अहमद ने बताया कि मौलाना हजरत याकूब साहब सूफी संत थे। वह जनपद इलाहाबाद के रहने वाले थे। 30 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने फकीरिया ले लिया। 1807 में वे दलालघाट तमसा नदी के किनारे आकर इबादत करने लगे। उन्होंने बताया कि आप बहुत ही पहुंचे फकीर थे। जब भी बाढ़ आती है, पानी जब मजार को छू लेता तो बाढ़ का पानी घटना शुरु हो जाता है। इनके बहुत से चमत्कार प्रसिद्ध है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि जो भी मजार पर जाकर मन्नत मांगता है उसकी मन्नत जरुर पूरी होती है। उर्स में दूरदराज के अकीदतमंद शामिल हुए थे।
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मजलिस 25 को
सरायमीर। क्षेत्र के निजामुद्दीनपुर गांव में 25 फरवरी को मजलिस का आयोजन सुबह दस बजे दिन में किया जाएगा। मजलिस को मौलाना सय्यद मोहम्मद अली गौहर फैजाबाद और परवीन बानो इलाहाबाद संबोधित करेंगी। सोजख्वानी शहनशाह हुसैन और पेशखानी नायब बलियावी करेंगे। ये जानकारी मो. हुसैन ने दी।
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कुरान की रोशनी में बेहतरीन जिंदगी जीने का पैगाम दिया
सरायमीर। कस्बा के मोहल्ला सिराजी का पुरा स्थित अजाख़ाना जहरा में अल्हाज मजीद हुसैन करबलाई की 40वें की मजलिस गुरुवार को हुई। कुरानख्वानी का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया। मजलिस का आगाज तिलावते कलाम पाक से शुरू हुआ। सोजखानी के फ़रायज अकबरपुर के जहीर अब्बास और हमनवा ने की। पेशखानी कैसर अब्बास जलालपुरी और राशिद हैदर जौनपुरी ने की। लखनऊ के जिशान अली आजमी ने फलसफ़ा ए मौतों हयात पेश किया। कहा कि जमाने में नफरतों का बाजार गर्म है। प्रो. वसी हसन खान ने कुरान और हदीस की रोशनी में एक बेहतरीन जिंदगी जीने का पैगाम दिया। कहा कि कर्बला हमेशा जिंदा रहने की जीती जागती मिसाल है। संचालन मौलाना मो. तकी नजफी ने किया। शिया कमेटी के अध्यक्ष सैयद कायम रजा और मो. हुसैन ने आभार जताया।
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