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शक्तिपीठ पल्हना धाम में उमड़ा रहा लोगों का रेला
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:47 PM IST
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पल्हना। लालगंज विकास खंड के पल्हना स्थित मां पाल्हमेश्वरी धाम में नवरात्र के अंतिम दिन मां का दर्शन करने के लिए श्रद्घालुओं का रेला उमड़ा रहा। लोगों लाल चुनरी और फूल माला चढ़ाया। इस दौरान मंदिर परिसर में मुंडन के साथ ही कड़ाही चढ़ाने वालों की काफी भीड़ लगी रही।
मां पाल्हमेश्वरी धाम की महिमा का वर्णन धर्मग्रंथों में भी मिलता है। पुराणों के अनुुसार महाराज दक्ष ने एक यज्ञ किया था जिसमें भगवान भोलेशंकर को निमंत्रण नहीं दिया था। उनके मना करने पर भी देवी सती अपने पिता के घर गई और वहां अपने पति का स्थान न पाकर वह क्रोध में अग्नि कुंड में कूद कर अपनी जान दे दी। सती के यज्ञ कुंड में कूदने की सूचना पर भगवान भोले शंकर ने काल भैरव को भेजकर यज्ञ को विध्वंस कर दिया और सती के शव को कंधे पर रखकर वह ब्रह्माँड का विचरण करने लगे। जिसके कारण तीनों लोगों में भूचाल आ गया। तब भगवान विष्णु ने सती के शव को सुदर्शन चक्र से काटना शुरू कर दिया। माना जाता है कि देवी के घुटने से लेकर पैर तक का भाग पल्हना में गिरा जो आज पाल्हमेश्वरी देवी के नाम से पूजित है। इस धाम को एकमात्र शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है।
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मां पाल्हमेश्वरी धाम की महिमा का वर्णन धर्मग्रंथों में भी मिलता है। पुराणों के अनुुसार महाराज दक्ष ने एक यज्ञ किया था जिसमें भगवान भोलेशंकर को निमंत्रण नहीं दिया था। उनके मना करने पर भी देवी सती अपने पिता के घर गई और वहां अपने पति का स्थान न पाकर वह क्रोध में अग्नि कुंड में कूद कर अपनी जान दे दी। सती के यज्ञ कुंड में कूदने की सूचना पर भगवान भोले शंकर ने काल भैरव को भेजकर यज्ञ को विध्वंस कर दिया और सती के शव को कंधे पर रखकर वह ब्रह्माँड का विचरण करने लगे। जिसके कारण तीनों लोगों में भूचाल आ गया। तब भगवान विष्णु ने सती के शव को सुदर्शन चक्र से काटना शुरू कर दिया। माना जाता है कि देवी के घुटने से लेकर पैर तक का भाग पल्हना में गिरा जो आज पाल्हमेश्वरी देवी के नाम से पूजित है। इस धाम को एकमात्र शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है।
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