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प्रधानाचार्य का अंकपत्र और उपाधि निरस्त
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़ । दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति ने कोर्ट के आदेश के बाद गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर वेद प्रकाश सिंह पुत्र कपिलदेव सिंह के बीएससी के परीक्षा फल और उपाधि को निरस्त कर दिया है। जांच के दौरान यह पाया गया कि उन्होंने एक ही वर्ष में बीएससी की परीक्षा दो महाविद्यालयों से दी थी।
मऊ जनपद के इंटर कालेज में बोझी में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात वेद प्रकाश सिंह के ऊपर उनकी शिक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। कोर्ट के आदेश पर कुलपति द्वारा एक जांच समिति का गठन किया गया था। जिसमें प्रोफेसर शैलजा सिंह, डा. अहमद नसीम, प्रोफेसर रविकांत उपाध्याय और परीक्षा नियंत्रक शामिल थे। जांच टीम ने पाया कि वेद प्रकाश सिंह ने वर्ष 1986 में शिब्ली नेशनल महाविद्यालय से बीएसी प्रथम वर्ष और इसी वर्ष में मुरली मनोहर टाउन डिग्री कालेज बलिया से बीएसी भाग एक की परीक्षा उत्तीर्ण किया है। इतना ही नहीं उन्होंने बीएड 1990 में रतनसेन डिग्री कालेज बांसी बस्ती से भूतपूर्व परीक्षार्थी के रूप में दर्शाया गया है। जांच में यह पाया गया कि वह पूर्व में संस्था के छात्र थे ही नहीं, इसलिए यह डिग्री भी फर्जी है। इस पर परीक्षा समिति ने कुलपति की अनुमति से इनकी बीएससी और बीएड अंकपत्र और उपाधि को निरस्त करने का निर्देश दिया है।
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मऊ जनपद के इंटर कालेज में बोझी में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात वेद प्रकाश सिंह के ऊपर उनकी शिक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। कोर्ट के आदेश पर कुलपति द्वारा एक जांच समिति का गठन किया गया था। जिसमें प्रोफेसर शैलजा सिंह, डा. अहमद नसीम, प्रोफेसर रविकांत उपाध्याय और परीक्षा नियंत्रक शामिल थे। जांच टीम ने पाया कि वेद प्रकाश सिंह ने वर्ष 1986 में शिब्ली नेशनल महाविद्यालय से बीएसी प्रथम वर्ष और इसी वर्ष में मुरली मनोहर टाउन डिग्री कालेज बलिया से बीएसी भाग एक की परीक्षा उत्तीर्ण किया है। इतना ही नहीं उन्होंने बीएड 1990 में रतनसेन डिग्री कालेज बांसी बस्ती से भूतपूर्व परीक्षार्थी के रूप में दर्शाया गया है। जांच में यह पाया गया कि वह पूर्व में संस्था के छात्र थे ही नहीं, इसलिए यह डिग्री भी फर्जी है। इस पर परीक्षा समिति ने कुलपति की अनुमति से इनकी बीएससी और बीएड अंकपत्र और उपाधि को निरस्त करने का निर्देश दिया है।
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