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लंका जलते ही जय श्रीराम के नारों से गूंजा क्षेत्र
Updated Thu, 28 Sep 2017 11:59 PM IST
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आजमगढ़। पुरानी कोतवाली के तत्वाधान में चल रही श्री रामलीला में बुधवार की रात कलाकारों ने बालि वध और लंका दहन प्रसंग का मंचन किया। हनुमान जी द्वारा लंका दहन करते ही जय श्री राम के जयकारे से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रीरामलीला मंचन में श्रीराम भक्त हनुमान जी माता सीता का पता लगाने के लिए सागर लांघ कर लंका पहुंचते हैं। जहां वह मच्छर के समान रूप धारण कर नगर में प्रवेश करते हैं। लंकिनी नाम की राक्षसी से उनका सामना होता है। वहां से वह अशोक वाटिका पहुंचते हैं। सीता से मुलाकात के बाद वह भूख लगने की बात कहते हुए अशोक वाटिका में फल खाते हैं। फल खाने के साथ ही वह पेड़ों को तहस-नहस कर देते हैं। इसकी सूचना मेघनाथ को जब मिलती है तो वह हनुमान जी को पकड़ने वहां पहुंचता है। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होता है। युद्घ के दौरान मेघनाद हनुमान को नागपाश में बांधकर रावण के दरबार ले जाता है। जहां रावण पहले तो हनुमान को मारने का आदेश देता है लेकिन विभिषण के कहने पर वह उनकी पूंछ में आग लगाने का आदेश देता है। पूंछ में आग लगत ही हनुमान जी हवा में उड़ जाते हैं। वह एक महल से दूसरे महल पर कूदते हैं और सभी में आग लगा देते हैं। हनुमान द्वारा लंका जलाने पर वहां मौजूद लोगों द्वारा लगाए जा रहे जय श्रीराम के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
प्रभु राम और सुग्रीव की मित्रता देख झूमे लोग
सरायमीर(ब्यूरो)। श्रीरामलीला सेवा समिति की ओर से बुधवार को सातवें दिन हुए मंचन में प्रभु श्रीराम भाई लक्ष्मण के साथ किष्किंधा पर्वत की तरफ जा रहे हैं। सुग्रीव को अनुचरों से खबर मिलने पर वो भयभीत होकर हनुमान को तपस्वियों का भेद लेने के लिए भेजते हैं। पवनसुत ब्राह्मण का रूप धारण दोनों तपस्वियों के पास पहुंचे। हनुमान प्रभु श्रीराम को पहचान लेते हैं और उनके चरणों में गिर पड़ते हैं। दोनों भाइयों को कंधे बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। इश मौके पर लालबहादुर सेठ., कृष्णकांत सेठ, राम नरायन गोंड़, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल, राहुल प्रजापति, अमरनाथ सेठ आदि लोग मौजूद रहे।
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प्रभु राम और सुग्रीव की मित्रता देख झूमे लोग
सरायमीर(ब्यूरो)। श्रीरामलीला सेवा समिति की ओर से बुधवार को सातवें दिन हुए मंचन में प्रभु श्रीराम भाई लक्ष्मण के साथ किष्किंधा पर्वत की तरफ जा रहे हैं। सुग्रीव को अनुचरों से खबर मिलने पर वो भयभीत होकर हनुमान को तपस्वियों का भेद लेने के लिए भेजते हैं। पवनसुत ब्राह्मण का रूप धारण दोनों तपस्वियों के पास पहुंचे। हनुमान प्रभु श्रीराम को पहचान लेते हैं और उनके चरणों में गिर पड़ते हैं। दोनों भाइयों को कंधे बैठाकर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। इश मौके पर लालबहादुर सेठ., कृष्णकांत सेठ, राम नरायन गोंड़, राजेंद्र प्रसाद जायसवाल, राहुल प्रजापति, अमरनाथ सेठ आदि लोग मौजूद रहे।
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